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गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु र्गुरुर्देवो महेश्वरः हिंदी मीनिंग (Gurur Brahma Gurur Vishnu Hindi Meaning)

115 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें



गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु र्गुरुर्देवो महेश्वरः हिंदी मीनिंग Gurur Brahma Gurur Vishnu Hindi Meaning - Bhaktilok

गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु र्गुरुर्देवो महेश्वरः

गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु र्गुरुर्देवो महेश्वरः |

गुरुः साक्षात् परं ब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः ||

गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु र्गुरुर्देवो महेश्वरः |

गुरुः साक्षात् परं ब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः ||

भारत की #सांस्कृतिक पहचान है की यहाँ पर गुरु के पद को सर्वोच्च और अत्यंत ही आदर का प्रतीक माना जाता है। कबीर साहेब ने कहा की "गुरु गोविन्द दोउ खड़े, काके लागूं पाँय" स्पष्ट है की गुरु गोविन्द से भी अधिक महत्त्व रखता है। गुरु ही जो सद्मार्ग की और अग्रसर होने के लिए प्रेरित करता है और स्वंय के द्वारा अर्जित ज्ञान को साधक को बांटता है। गुरु (Guru) शब्द दो अक्षरों "गु" और "रु" से बना है जहाँ गु का अर्थ है 'अन्धकार और रु का अर्थ है' प्रकाश। इसका अर्थ हुआ की गुरु अपने शिष्य / साधक को अन्धकार से निकाल कर रौशनी की तरफ अग्रसर करता है, रौशनी की ओर ले जाता है।  ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी ने भी गुरु शब्द को लिक्सोग्राफी में शामिल किया है। प्रबंधन शिक्षा में गुरु बहुत प्रसिद्ध है क्योंकि सबसे कुशल व्यक्ति को प्रबंधन गुरु के रूप में संबोधित किया जाता है। गुरु की महिमा पर पकाश डालने वाला यह श्लोक आदि शंकराचार्य जी के द्वारा रचित है और यह श्लोक गुरु स्त्रोतम का एक भाग है।

"गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु र्गुरुर्देवो महेश्वरः" मन्त्र का हिंदी मीनिंग : - 

गुरु ही ब्रह्म है जो सृष्टि के रचियता हैं। गुरु ही श्रष्टि के पालक हैं जैसे श्री विष्णु जी। गुरु ही इस श्रष्टि के संहारक भी हैं जैसे श्री शिव। 

गुरुः साक्षात् परं ब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः मन्त्र का हिंदी मीनिंग : -

गुरु साक्षात पूर्ण ब्रह्म हैं जिनको अभिवादन है (ऐसे गुरु को नमन/अभिवादन ). भाव है की ईश्वर तुल्य ऐसे गुरु को मैं नमस्कार करता हूँ। 

Word Meaning of Gurur Brahma Gurur Vishnu Mantra : - 

गुरु /Guru: मार्गदर्शन करने वाला, भेद की बातें और शिक्षा देने वाला।

ब्रह्मा; भगवान् ब्रह्मा जी।

विष्णुं : भगवान् विष्णु।

देवा : ईश्वर।

महेश्वरा : भगवान् शिव जो जगत के रक्षक होने के साथ साथ विनाशक भी हैं।

साक्षात : स्वंय ही।

परब्रह्म : जो सर्वोच्च नियामक शक्ति है।

तस्मै : को (गुरु  को )

श्री : पवित्र।

नमह :अभिवादन। 

संतों और ऋषियों के आध्यात्मिक इतिहास की गहरी समझ के लिए संत एवं ऋषि ज्ञानकोश अवश्य पढ़ें।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

शिरडी के साईं बाबा को समर्पित यह भजन "गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु र्गुरुर्देवो महेश्वरः हिंदी मीनिंग (Gurur Brahma Gurur Vishnu Hindi Meaning)" सबका मालिक एक होने के सिद्धांत को प्रतिपादित करता है। साईं बाबा का जीवन काल सादगी, प्रेम, सहिष्णुता और मानवता का संदेश देता है। इस भजन की सरल पंक्तियां भक्त को सीधे बाबा के दिव्य आशीर्वाद और करुणा से जोड़ती हैं।

भजन का मुख्य भाव श्रद्धा और सबूरी (धैर्य) का है। साईं बाबा अपने भक्तों को वचन देते हैं कि जो भी उनके द्वार पर आएगा, वह कभी खाली हाथ नहीं जाएगा। बाबा की उदी (भस्म) और उनके वचनों का स्मरण ही इस भजन का सार है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

साईं बाबा के भजनों के संकीर्तन से भक्तों के मन में धर्म-जाति के भेद से ऊपर उठकर प्राणी मात्र के प्रति प्रेम की भावना जागृत होती है। बाबा की पूजा में सादगी और शुद्ध अंतःकरण का विशेष महत्त्व है।

संतों और ऋषियों के आध्यात्मिक इतिहास की गहरी समझ के लिए संत एवं ऋषि ज्ञानकोश अवश्य पढ़ें। साईं बाबा के भजन से पारिवारिक शांति प्राप्त होती है, मन के द्वेष और कलह दूर होते हैं और साधक में संतोष तथा धैर्य का विकास होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

साईं बाबा की आराधना के लिए गुरुवार का दिन विशेष रूप से फलदायी है। साईं बाबा की मूर्ति या चित्र के सम्मुख दीप जलाकर, उदी का तिलक लगाएं और श्रद्धापूर्वक भजन गाएं।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

शिरडी साईं बाबा की उपासना के दो मुख्य स्तंभ क्या हैं?

बाबा ने अपने भक्तों को 'श्रद्धा' (विश्वास) और 'सबूरी' (धैर्य) को जीवन का मूल आधार बनाने की शिक्षा दी थी।

साईं भजनों के संकीर्तन के लिए कौन सा दिन उत्तम है?

गुरुवार (गुरु दिवस) का दिन साईं बाबा के पूजन, व्रत और भजन संकीर्तन के लिए अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है।

साईं बाबा की 'उदी' का क्या महत्त्व है?

उदी बाबा की धूनी की पवित्र भस्म है। भक्तों का अटूट विश्वास है कि उदी धारण करने से शारीरिक बीमारियां और मानसिक कष्ट दूर होते हैं।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 29 Aug 2026

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