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Punjabi Devi Bhajan

जय देवी जय देवी जय महालक्ष्मी लिरिक्स श्री महालक्ष्मी आरती (Jay Devi Jay Devi Jay Mahalakshmi Lyrics in Hindi)

203 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind | 2 मिनट पठन समय
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जय देवी जय देवी जय महालक्ष्मी लिरिक्स श्री महालक्ष्मी आरती (Jay Devi Jay Devi Jay Mahalakshmi Lyrics in Hindi)


श्री महालक्ष्मीची आरती

जय देवी जय देवी जय महालक्ष्मी।

वससी व्यापकरुपे तू स्थूलसूक्ष्मी॥

जय देवी जय देवी.......॥


जय देवी जय देवी जय महालक्ष

वससी व्यापकरुपे तू स्थूलसूक्ष्मी॥

जय देवी जय देवी.......॥


करवीरपुरवासिनी सुरवरमुनिमाता।

पुरहरवरदायिनी मुरहरप्रियकान्ता।

कमलाकारें जठरी जन्मविला धाता।

सहस्त्रवदनी भूधर न पुरे गुण गातां॥


जय देवी जय देवी.......॥

जय देवी जय देवी जय महालक्ष्मी।

वससी व्यापकरुपे तू स्थूलसूक्ष्मी॥

जय देवी जय देवी.......॥


जय देवी जय देवी जय महालक्ष्मी।

वससी व्यापकरुपे तू स्थूलसूक्ष्मी॥

जय देवी जय देवी.......॥


मातुलिंग गदा खेटक रविकिरणीं।

झळके हाटकवाटी पीयुषरसपाणी।

माणिकरसना सुरंगवसना मृगनयनी।

शशिकरवदना राजस मदनाची जननी॥


जय देवी जय देवी.......॥

जय देवी जय देवी जय महालक्ष्मी।

वससी व्यापकरुपे तू स्थूलसूक्ष्मी॥

जय देवी जय देवी.......॥


जय देवी जय देवी जय महालक्ष्मी।

वससी व्यापकरुपे तू स्थूलसूक्ष्मी॥

जय देवी जय देवी.......॥


तारा शक्ति अगम्या शिवभजकां गौरी।

सांख्य म्हणती प्रकृती निर्गुण निर्धारी।

गायत्री निजबीजा निगमागम सारी।

प्रगटे पद्मावती निजधर्माचारी॥


जय देवी जय देवी.......॥

जय देवी जय देवी जय महालक्ष्मी।

वससी व्यापकरुपे तू स्थूलसूक्ष्मी॥

जय देवी जय देवी.......॥

जय देवी जय देवी जय महालक्ष्मी।

वससी व्यापकरुपे तू स्थूलसूक्ष्मी॥

जय देवी जय देवी.......॥


अमृतभरिते सरिते अघदुरितें वारीं।

मारी दुर्घट असुरां भवदुस्तर तारीं।

वारी मायापटल प्रणमत परिवारी।

हें रुप चिद्रूप दावी निर्धारी॥


जय देवी जय देवी.......॥

जय देवी जय देवी जय महालक्ष्मी।

वससी व्यापकरुपे तू स्थूलसूक्ष्मी॥

जय देवी जय देवी.......॥

जय देवी जय देवी जय महालक्ष्मी।

वससी व्यापकरुपे तू स्थूलसूक्ष्मी॥

जय देवी जय देवी.......॥


चतुराननें कुश्चित कर्मांच्या ओळी।

लिहिल्या असतिल माते माझे निजभाळी।

पुसोनि चरणातळी पदसुमने क्षाळी।

मुक्तेश्वर नागर क्षीरसागरबाळी॥


जय देवी जय देवी.......॥

जय देवी जय देवी जय महालक्ष्मी।

वससी व्यापकरुपे तू स्थूलसूक्ष्मी॥

जय देवी जय देवी.......॥

जय देवी जय देवी जय महालक्ष्मी।

वससी व्यापकरुपे तू स्थूलसूक्ष्मी॥

जय देवी जय देवी.......॥ 

जयदेवी जयदेवी श्रीलक्ष्मीमाते । प्रसन्न होऊनि आतां वर दे आम्हांते।। धृ. ।।

श्रीविष्णुकांते तव विश्वावरि सत्ता । स्थिरचर दौलत देसी लक्ष्मीव्रत करितां ।। १ ।।

जननी तुजऐसी या नाही त्रिभुवनीं । सुरवर वंदिती मस्तक ठेवुनि तव चरणी ।। २ ।।

कृपाप्रसादें तुझिया लाभे सुखशांति । चिंताक्लेशहि जाती नुरते आपत्ती ।। ३ ।।

वैभव ऐश्वर्याचें आणि अपार द्रव्याचें । देसी दान दयाळे सदैव सौख्याचे ।। ४ ।।

यास्तव मिलिंदमाधव आरती ओवाळी । प्रेमें भक्तिभावें लोटांगण घाली ।। ५ ।।



🙏 भजन का विस्तृत अर्थ और भावार्थ (Lyrics Meaning)

आदिशक्ति माता दुर्गा, महालक्ष्मी और महासरस्वती को समर्पित यह भजन "जय देवी जय देवी जय महालक्ष्मी लिरिक्स श्री महालक्ष्मी आरती (Jay Devi Jay Devi Jay Mahalakshmi Lyrics in Hindi)" जगत जननी की कृपा और महिमा का गान करता है। सनातन परंपरा में स्त्री शक्ति को सृष्टि का आदि कारण माना गया है। इस भजन की एक-एक पंक्ति माता के ममतामयी और दुष्टनाशिनी रूप का वर्णन करती है।

भजन का मूल स्वर माता के प्रति समर्पण का है। जब भक्त माता के चरणों में प्रणाम कर अपनी प्रार्थना रखता है, तो देवी मां उसके समस्त कष्टों को हर लेती हैं। यह भजन साधक के भीतर शक्ति, करुणा, तेज और पवित्रता का संचार करता है।

🔍 भजन का विशेष महत्त्व और आध्यात्मिक लाभ (Significance)

देवीभागवत पुराण के अनुसार, माता की उपासना से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चारों पुरुषार्थों की सिद्धि होती है। विशेषकर नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के भजनों का संकीर्तन करने से घर में रिद्धि-सिद्धि और सुख-समृद्धि का वास होता है।

मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें। देवी भजनों के संकीर्तन से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है, दरिद्रता का नाश होता है और व्यापार तथा नौकरी में उन्नति के द्वार खुलते हैं। यह जीवन में सुख, शांति और सुरक्षा का अनुभव कराता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि (Chanting Rules)

माता की पूजा के लिए शुक्रवार, अष्टमी तिथि और नवरात्रि का काल सर्वोत्तम है। पूजा स्थान पर लाल फूल, धूप-दीप अर्पित कर मां के सामने घी का अखण्ड ज्योत जलाएं और भक्तिभाव से संकीर्तन करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

मां दुर्गा के भजनों का संकीर्तन विशेष रूप से कब करना चाहिए?

यद्यपि नियमित संकीर्तन उत्तम है, किन्तु शुक्रवार के दिन और शारदीय व चैत्र नवरात्रि के पावन दिनों में मां दुर्गा के भजन असीम सुख-समृद्धि प्रदान करते हैं।

देवी पूजा में किस रंग के वस्त्रों का उपयोग करना शुभ माना जाता है?

माता दुर्गा और शक्ति स्वरूपा देवी पूजा में लाल, पीले अथवा नारंगी (भगवा) रंग के वस्त्र धारण करना अत्यंत शुभ माना गया है।

क्या देवी उपासना से व्यापारिक बाधाएं दूर होती हैं?

हाँ, मां लक्ष्मी और मां दुर्गा की कृपा से व्यापार में आ रही रुकावटें दूर होती हैं और आर्थिक तंगी से मुक्ति मिलती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 14 Aug 2026

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