मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन
शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें
कन्हैया ले चल परली पार भजन लिरिक्स (Kanhaiya Le Chal Parli Paar Bhajan Lyrics in Hindi)- Bhaktilok
कन्हैया ले चल परली पार भजन लिरिक्स (Kanhaiya Le Chal Parli Paar Bhajan Lyrics in Hindi)-
Album - Kanhayia Le Chal Parli Paar
Song - Kanhayia Le Chal Parli Paar
Singer - Kumar Vishu
Lyrics - Traditional
Music - Lovely Sharma
Lable - Saawariya
Digital Partner - Vianet Media
सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।
कन्हैया ले चल परली पार भजन लिरिक्स (Kanhaiya Le Chal Parli Paar Bhajan Lyrics in Hindi)-
कन्हैया ले चल परली पार
साँवरिया ले चल परली पार
जहां विराजे राधा रानी
अलबेली सरकार
विनती मेरी मान सनेही
तन मन है कुर्बान सनेही
कब से आस लिए बैठी हूँ
जग को बाँध किये बैठी हूँ
मैं तो तेरे संग चलूंगी
ले चल मुझको पार
साँवरिया ले चल परली पार
कन्हैया ले चल परली पार
साँवरिया ले चल परली पार
जहां विराजे राधा रानी
अलबेली सरकार
गुण अवगुण सब तेरे अर्पण
पाप पुण्य सब तेरे अर्पण
बुद्धि सहत मन तेरे अर्पण
यह जीवन भी तेरे अर्पण
मैं तेरे चरणो की दासी
मेरे प्राण आधार
साँवरिया ले चल परली पार
कन्हैया ले चल परली पार
साँवरिया ले चल परली पार
जहां विराजे राधा रानी
अलबेली सरकार
तेरी आस लगा बैठी हूँ
लज्जा शील गवा बैठी हूँ
मैं अपना आप लूटा बैठी हूँ
आँखें खूब थका बैठी हूँ
साँवरिया मैं तेरी रागिनी
तू मेरा राग मल्हार
साँवरिया ले चल परली पार
जग की कुछ परवाह नहीं है
सूझती अब कोई राह नहीं है.
तेरे बिना कोई चाह नहीं है.
और बची कोई राह नहीं है
मेरे प्रीतम मेरे माझी
अब करदो बेडा पार
साँवरिया ले चल परली पार
Also read :दिल की हर धड़कन से तेरा नाम निकलता है लिरिक्स Dil Ki Har Dhadkan Se Lyrics
आनंद धन जहा बरस रहा
पीय पीय कर कोई बरस रहा है
पत्ता पत्ता हरष रहा है
भगत बेचारा क्यों तरस रहा है
बहुत हुई अब हार गयी मैं
क्यों छोड़ा मझदार
कन्हैया ले चल परली पार
साँवरिया ले चल परली पार
जहां विराजे राधा रानी
अलबेली सरकार
Also Read Krishna Bhajan:-
🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ
यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "कन्हैया ले चल परली पार भजन लिरिक्स (Kanhaiya Le Chal Parli Paar Bhajan Lyrics in Hindi)- Bhaktilok" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।
भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।
🔍 विशेष महत्त्व और लाभ
श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।
सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।
🕒 साधना एवं गायन विधि
भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।
भजनों को गाने की सही विधि क्या है?
भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।
क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?
हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।
पाठकों के विचार (0)
भक्ति रस चर्चा में भाग लें