आज का पंचांग (Columbus) | सूर्योदय: ०४:२६ PM | सूर्यास्त: ०५:३८ AM
Radha Kriya Kataksh Stotram

राहु स्तोत्रम् लिरिक्स इन संस्कृत(Rahu Stotram Lyrics Sanskrit )

95 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
आकार:
कंट्रास्ट:

राहु स्तोत्र: संकटमोचन की दिव्य स्तुति

यह स्तोत्र राहु देव के प्रति भक्तिपूर्ण समर्पण है, संकटों के नाश और कृपा प्राप्ति का साधन।

राहु स्तोत्रम् लिरिक्स इन संस्कृत(Rahu Stotram Lyrics Sanskrit ) - Bhaktilok राहु स्तोत्रम् लिरिक्स इन संस्कृत(Rahu Stotram Lyrics Sanskrit ) - अस्य श्रीराहुस्तोत्रस्य वामदेव ऋषिः । गायत्री छन्दः । राहुर्देवता ।राहुप्रीत्यर्थं जपे विनियोगः ॥राहुर्दानव मन्त्री च सिंहिकाचित्तनन्दनः ।अर्धकायः सदाक्रोधी चन्द्रादित्यविमर्दनः ॥ १ ॥रौद्रो रुद्रप्रियो दैत्यः स्वर्भानुर्भानुमीतिदः ।ग्रहराजः सुधापायी राकातिथ्यभिलाषुकः ॥ २ ॥कालदृष्टिः कालरुपः श्रीकष्ठह्रदयाश्रयः ।विधुंतुदः सैंहिकेयो घोररुपो महाबलः ॥ ३ ॥ग्रहपीडाकरो द्रंष्टी रक्तनेत्रो महोदरः ।पञ्चविंशति नामानि स्मृत्वा राहुं सदा नरः ॥ ४ ॥यः पठेन्महती पीडा तस्य नश्यति केवलम् ।विरोग्यं पुत्रमतुलां श्रियं धान्यं पशूंस्तथा ॥ ५ ॥ददाति राहुस्तस्मै यः पठते स्तोत्रमुत्तमम् ।सततं पठते यस्तु जीवेद्वर्षशतं नरः ॥ ६ ॥ ॥इति श्रीस्कन्दपुराणे राहुस्तोत्रं संपूर्णम् ॥

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस स्तोत्र में राहु के अद्भुत स्वरूपों का वर्णन किया गया है। पहले श्लोक में राहु को आधे शरीर वाले क्रोधित देवता के रूप में वर्णित किया गया है, जो चंद्रमा और सूर्य के साथ युद्ध करते हैं। यह युद्ध जीवन में आने वाली बाधाओं और कठिनाइयों का प्रतीक है। राहु को 'दानव मन्त्री' कहा गया है, जिसका अर्थ है कि वह दानवों का एक प्रमुख सलाहकार है। इनके प्रति भक्ति भाव से पाठ करने पर भक्‍त के जीवन में आने वाली कठिनाइयों का अंत हो सकता है। जबकि अन्य श्लोकों में राहु की शक्तियों, उनकी रौद्रता और राक्षसी स्वरूप का वर्णन किया गया है, जिससे यह समझ आता है कि राहु का सम्बंध मानवीय जीवन में संकटों को उत्पन्न करने से है।

राहु का नाम लेते समय हमें उसकी ऊर्जा और प्रभाव का ध्यान रखना चाहिए। यह स्तोत्र न केवल राहु की महिमा का बखान करता है, बल्कि भक्तों को राहु के प्रभावों से नकारात्मकता को दूर करने की प्रेरणा भी देता है। 'रक्तनेत्रो महोदरः' जैसे शब्द यह दर्शाते हैं कि राहु की दृष्टि में कठिनाई उत्पन्न करने की सामर्थ्य है। लेकिन जब कोई भक्त इसका ध्यान करता है, तो उसका जीवन सुख और समृद्धि से भर जाता है, जैसा कि आगे के श्लोकों में कहा गया है। यह ध्यान देने योग्य है कि जो राहु स्तोत्र का उच्चारण सही समय और श्रद्धा से करता है, वह न केवल भौतिक दुखों से मुक्त होता है, बल्कि उसे विशेष आशीर्वाद भी प्राप्त होते हैं।

राहु स्तोत्र की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि यह व्यक्ति को भक्ति मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। इसमें जो भी बाधाएँ आती हैं, उन पर विजय प्राप्त करने का मार्ग दिखाया गया है। राहु की उपासना से व्यक्ति अपनी मानसिक स्थिति को मजबूती दे सकता है, और सांसारिक दुखों के प्रति संयम रख सकता है। साथ ही, यह स्तोत्र अध्यात्मिकता और भक्ति का अहसास भी कराता है। भक्त जब राहु स्तोत्र का जाप करता है, तो वह आंतरिक शांति और शक्ति प्राप्त करता है, जो उसकी आत्मा को ऊंचाई पर ले जाने का कार्य करती है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह स्तोत्र विशेष रूप से स्कंदपुराण में उल्लिखित है, जो हिंदू धर्म के प्रमुख ग्रंथों में से एक है। राहु का नाम लेते समय इसे ग्रहों के राजा के रूप में संदर्भित किया गया है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, राहु का वर्चस्व मानसिक तनाव और अशांति के समय प्रकट होता है। यह स्तोत्र उन सभी भक्तों के लिए महत्वपूर्ण है जो राहु के नकारात्मक प्रभावों से जूझ रहे हैं। इसके पाठ से व्यक्ति को मार्गदर्शन मिलता है, जिससे वह जीवन की कठिनाइयों पर विजय प्राप्त कर सकता है। भक्तों का यह मानना है कि इस स्तोत्र के माध्यम से वे राहु देव की कृपा प्राप्त कर सकते हैं, और इससे उनकी जीवन की बाधाएँ समाप्त होती हैं।

प्रभु श्री राम के आदर्शों और मर्यादा पुरुषोत्तम के सम्पूर्ण चरित्र का रसास्वादन करने के लिए रामायण महाग्रंथ अन्वेषक का उपयोग करें। राहु स्तोत्र का जाप करने से व्यक्ति को मानसिक शांति, स्वास्थ्य में सुधार और आर्थिक समृद्धि के लाभ होते हैं। यह साधक को नकारात्मकता से मुक्त करता है और उसे आत्मविश्वास प्रदान करता है। नियमित पाठ करने से भक्त की आय में वृद्धि हो सकती है और जीवन के संकटों में कमी आ सकती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

राहु स्तोत्र का पाठ सुबह सूर्योदय से पहले या रात्रि में स्नान के पश्चात करना उत्तम रहता है। पाठ करते समय ध्यानपूर्वक समर्पण भाव रखना आवश्यक है। भक्त को एक साफ स्थान पर बैठकर दीया जलाना चाहिए और मार्गदर्शक की कृपा के लिए विशेष सामग्रियों की अर्पणा करनी चाहिए। शांत मन और दृढ़ निश्चय के साथ पाठ करना चाहिए।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

राहु स्तोत्र क्यों पढ़ना चाहिए?

राहु स्तोत्र का पाठ संकटों को दूर करने, मानसिक शांति और समृद्धि प्राप्त करने के लिए करना चाहिए।

इस स्तोत्र का पढ़ने का सही समय क्या है?

इस स्तोत्र का पाठ सुबह सूर्योदय से पहले या रात को करना शुभ रहता है।

क्या राहु स्तोत्र का पाठ रोज करना चाहिए?

हां, नियमित रूप से राहु स्तोत्र का पाठ करने से लाभ के अवसर बढ़ते हैं और राहु देव की कृपा प्राप्त होती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 30 Aug 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!