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श्री कृष्ण चालीसा लिरिक्स (Shri Krishna Chalisa Lyrics in Hindi) - bhaktilok

64 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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श्री कृष्ण चालीसा: कृष्ण कृपा का समर्पण

श्री कृष्ण चालीसा का गायन कर भक्त अपने जीवन में कृष्ण की कृपा को आमंत्रित करें।

श्री कृष्ण चालीसा लिरिक्स (Shri Krishna Chalisa Lyrics in Hindi) - bhaktilok ॥ दोहा॥ बंशी शोभित कर मधुरनील जलद तन श्याम । अरुण अधर जनु बिम्बफलनयन कमल अभिराम ॥ पूर्ण इन्द्र अरविन्द मुखपीताम्बर शुभ साज । जय मनमोहन मदन छविकृष्णचन्द्र महाराज ॥ ॥ चौपाई ॥ जय यदुनंदन जय जगवंदन । जय वसुदेव देवकी नन्दन ॥ जय यशुदा सुत नन्द दुलारे । जय प्रभु भक्तन के दृग तारे ॥ जय नटनागर नाग नथइया | कृष्ण कन्हइया धेनु चरइया ॥ पुनि नख पर प्रभु गिरिवर धारो । आओ दीनन कष्ट निवारो ॥4॥ वंशी मधुर अधर धरि टेरौ । होवे पूर्ण विनय यह मेरौ ॥ आओ हरि पुनि माखन चाखो । आज लाज भारत की राखो ॥ गोल कपोल चिबुक अरुणारे । मृदु मुस्कान मोहिनी डारे ॥ राजित राजिव नयन विशाला । मोर मुकुट वैजन्तीमाला ॥8॥ कुंडल श्रवण पीत पट आछे । कटि किंकिणी काछनी काछे ॥ नील जलज सुन्दर तनु सोहे । छबि लखि सुर नर मुनिमन मोहे ॥ मस्तक तिलक अलक घुँघराले । आओ कृष्ण बांसुरी वाले ॥ करि पय पान पूतनहि तार्यो । अका बका कागासुर मार्यो ॥12॥ मधुवन जलत अगिन जब ज्वाला । भै शीतल लखतहिं नंदलाला ॥ सुरपति जब ब्रज चढ़्यो रिसाई । मूसर धार वारि वर्षाई ॥ लगत लगत व्रज चहन बहायो । गोवर्धन नख धारि बचायो ॥16॥ दुष्ट कंस अति उधम मचायो । कोटि कमल जब फूल मंगायो ॥ नाथि कालियहिं तब तुम लीन्हें । चरण चिह्न दै निर्भय कीन्हें ॥ करि गोपिन संग रास विलासा । सबकी पूरण करी अभिलाषा ॥ केतिक महा असुर संहार्यो । कंसहि केस पकड़ि दै मार्यो ॥20॥ मातपिता की बन्दि छुड़ाई । उग्रसेन कहँ राज दिलाई ॥ महि से मृतक छहों सुत लायो । मातु देवकी शोक मिटायो ॥ भौमासुर मुर दैत्य संहारी । लाये षट दश सहसकुमारी ॥ दै भीमहिं तृण चीर सहारा । जरासिंधु राक्षस कहँ मारा ॥24॥ असुर बकासुर आदिक मार्यो । भक्तन के तब कष्ट निवार्यो ॥ दीन सुदामा के दुःख टार्यो । तंदुल तीन मूंठ मुख डार्य ॥...

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

श्री कृष्ण चालीसा का मुख्य विषय भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं और उनके अद्भुत गुणों का गुणगान करना है। इस भजन में भगवान की सुंदरता, शक्ति और दयालुता का वर्णन है। 'बंशी शोभित कर मधुरनील जलद तन श्याम' पंक्ति से यह स्पष्ट होता है कि भगवान कृष्ण का रूप अत्यंत आकर्षक और मनमोहक है। उनके अद्भुत व्यक्तित्व की तुलना माधुर्य, सौंदर्य और दिव्यता से की गई है। चालीसा के माध्यम से, भक्त श्री कृष्ण के विभिन्न रंगों और लीलाओं का वर्णन करते हैं, जैसे कि नटनागर योग, गोपियों के साथ रास, तथा दुष्ट कंस और अन्य असुरों का संहार। यह पूर्णता की गारंटी करने वाला ध्यान है, जो भक्तों को उनके कष्टों से मुक्त करता है।

कृष्ण चालीसा का भावार्थ केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भक्त की आत्मा की गहराईयों को छूता है। जैसे 'आओ हरि पुनि माखन चाखो' में यह आग्रह किया गया है कि भगवान कृष्ण को हमारे जीवन में शामिल किया जाए। हमें उनकी जैसे सरलता, दयालुता, और करुणा को अपनाना चाहिए। कृष्ण की गोपाल का रूप और उनके द्वारा भक्तों के प्रति की गई करुणा हमें यह सिखाती है कि सच्ची भक्ति में नतमस्तक होना और ईश्वर के प्रति समर्पित रहना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। यह भजन भक्तों को आध्यात्मिक आनंद और मानसिक शांति प्रदान करता है।

श्री कृष्ण चालीसा में भक्तिभाव और भक्ति मार्ग का प्रमुखता से वर्णन मिलता है। कृष्ण के प्रति श्रद्धा और प्रेम का होना, उन्हें अरण्य से मुक्तिस्वरूप मानते हैं। 'जय यदुनंदन जय जगवंदन' में यह स्पष्ट हो रहा है कि कृष्ण का अस्तित्व सभी जीवों के लिए आनंद और विजय का स्रोत है। भक्ति में आत्मसमर्पण की भावना दिखाई गई है, जहां भक्त केवल कृष्ण की शरण में आकर अपने सारे पापों और कष्टों से छुटकारा पाते हैं। यह चालीसा प्रेम, भक्ति, और समर्पण का मार्ग दिखाती है, जो जीवन को उच्चतम आध्यात्मिक स्तर पर ले जाती है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

कृष्ण चालीसा का महत्व भारतीय पौराणिक कथाओं में अत्यधिक गहरा है। यह गीता, भागवत और महाभारत जैसे ग्रंथों में वर्णित भगवान कृष्ण की लीलाओं पर आधारित है। भक्तों को यह चालीसा सुनाने से उनकी भक्ति में वृद्धि होती है। कंस का वध और गोवर्धन की रक्षा करने की घटनाएँ इस भजन में वर्णित हैं, जो प्रेरित करती हैं कि ईश्वर हमेशा अपने भक्तों के साथ होता है। यह चालीसा न केवल भक्ति की एक अभिव्यक्ति है, बल्कि यह जीवन में सकारात्मकता, साहस, और धैर्य भी लाती है।

श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें। श्री कृष्ण चालीसा का पाठ करने से मानसिक शांति, तनाव मुक्ति, और आंतरिक संतुलन प्राप्त होता है। यह भजन श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शक्ति का संचार करता है और जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करने में सहायता करता है। नियमित रूप से इस चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति की जीवन में सकारात्मकता की वृद्धि होती है, जिससे वह अपने कष्टों और समस्याओं का सामना साहस के साथ कर सकता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

श्री कृष्ण चालीसा का पाठ सुबह सूर्योदय के समय या शाम को संध्या के समय करना सबसे उत्तम होता है। इस दौरान एक साफ वस्त्र पहनकर, पूजा स्थल पर दीपक जलाकर, और फूलों के साथ भगवान कृष्ण की तस्वीर के आगे बैठकर इस चालीसा का पाठ करना चाहिए। मन को एकाग्र करना आवश्यक है ताकि श्रद्धा और भक्ति से हर शब्द का उच्चारण किया जा सके।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

क्या श्री कृष्ण चालीसा का पाठ सभी के लिए अनिवार्य है?

हां, श्री कृष्ण चालीसा का पाठ सभी भक्तों के लिए अत्यंत लाभकारी है, चाहे वे युवा हों या वृद्ध, यह सभी के लिए उपयुक्त है।

कितनी बार श्री कृष्ण चालीसा का पाठ करना चाहिए?

इसका कोई निश्चित नियम नहीं है, लेकिन प्रतिदिन एक बार या विशेष अवसरों पर इसे पढ़ना अनिवारी होता है। सप्ताह में एक बार इसे पढ़ना भी लाभकारी है।

क्या पाठ के दौरान कोई विशेष सामग्री की आवश्यकता होती है?

जी हां, पाठ के दौरान फूल, धूप और दीपक होना चाहिए, जिससे पूजा का माहौल भक्तिमय बने और भगवान कृष्ण की कृपा प्राप्त हो।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 29 Aug 2026

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