आज का पंचांग (Columbus) | सूर्योदय: ०४:२० PM | सूर्यास्त: ०५:४८ AM
Punjabi Devi Bhajan

दस मेरी माँ (Das Mere Maa) - Gyan Pankaj Mata Rani Bhajan Devi Geet - Bhaktilok

56 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
आकार:
कंट्रास्ट:

माँ की कृपा: दशा सुधारने का भजन

यह भजन माँ दुर्गा की महिमा का बखान करता है, जीव को संकट से मुक्त करने की सामर्थ्य दर्शाता है।

दस मेरी माँ (1) मैं जो आया दुनिया में, माँ मैं तेरे बल पर; दुःख मेरी जीवन को जाएं, माँ मैं तेरे बल पर। (2) ध्यान मेरा तेरा, यस मेरे माँ का; संजीवनी बिलकुल माँ, मैं न मरे रुख पर। (3) शुचि मेरी माँ की बात करे, दुर्गा वेचु मेरी माँ की। (4) नारी का प्रदर्शन है, कल्याणी बनी मेरा पाथ। (5) मेरी मां हर संकट में, तेरा सानिध्य सदा मेरे साथ। (6) मुझे कोई कर ना सकें, तेरा नाम लूं मैं; संतान की महिमा में आएं, सदा नमस्ते माँ। (7) लहराये जैसे जल, कोयल गाये गीत; माँ मेरे मन्दिर में अपना भवन आवे। (8) तू ही दुख हरने वाली, तू ही सुख देने वाली। (9) माता तू धरती पर आए, औषधि का रूप बाद में। (10) शान्ति का वरदानी, मेरा सदा बलिदान कर। दस मेरी माँ, मेरा जो बल है तेरा, माँ की कृपा पाकर सुख दे।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन 'दस मेरी माँ' में माता की अनुग्रह और कृपा का बखान किया गया है। यहां 'दस' का अर्थ है 'दस बार' या 'कई बार' होना। पहले दो बोलों में भक्ति भाव से यह स्पष्ट किया गया है कि माँ ही संजीवनी, दुःख के नाशक और जीवन के बल की स्रोत हैं। 'मैं जो आया दुनिया में, माँ मैं तेरे बल पर' यह दर्शाता है कि व्यक्ति की अस्तित्व का आधार माँ की शक्ति पर निर्भर करता है। भक्ति के माध्यम से जीवन में कठिनाइयों के समय सहारा लेने की भावना भव्य रूप से व्यक्त की गई है।

इस भजन में प्रेम, शरणागति और विश्वास का एक अलौकिक मिश्रण नजर आता है। जैसे-जैसे भक्त माता का स्मरण करते हैं, उनका दुख और कष्ट दूर होते जाते हैं। 'तू ही दुख हरने वाली, तू ही सुख देने वाली' यह वाक्य प्रतीक है उस आस्था का, जिसमें भक्त संपूर्ण अनुपूर्णता को मातृत्व में खोजता है। माता की उपासना से भक्त की जीवन यात्रा में प्रेम और संवेदनाओं का अत्यधिक महत्व है। यह एक मानसिक और आत्मिक शांति की ओर ले जाने वाला मार्ग है।

इस भजन में भक्ति मार्ग की महत्ता को दर्शाया गया है। भक्त का प्रणाम मात्र एक अदृश्य शक्ति को पहचानना है। 'लहराये जैसे जल, कोयल गाये गीत', यह दर्शाता है कि आस्था और भक्ति के परिणाम स्वरूप हर जीवित प्राणी में नया जीवन बनेगा। माता देवी की आराधना के माध्यम से भक्त का मार्गदर्शन होता है। माँ का चित्रण केवल एक देवी के रूप में नहीं, यहाँ असली मातृत्व और करुणा के रूप में किया गया है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन संस्कृतियों और पौराणिक कथाओं से भरा हुआ है, जिसमें माता दुर्गा का ऐतिहासिक महत्व दर्शाया गया है। देवी दुर्गा की महाकवि में कई रूपों में पूजा की गई है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, देवी दुर्गा ने दानवों का नाश किया और जीवन को संतुलित किया। इस भजन में माँ का स्वरूप और उनकी शक्ति के दर्शन होते हैं, जिससे भक्तों को प्रेरणा मिलती है कि वे अपने कष्टों के समय माँ की शरण लें।

मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें। इस भजन का जाप करने से मानसिक शांति और सकारात्मकता में वृद्धि होती है। भक्त, जिन्हें जीवन में तनाव या कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, ऐसे में यह भजन उन्हें मानसिक स्थिरता और बल प्रदान करता है। नियमित रूप से इस भजन का पाठ करने से आत्मबल में वृद्धि होती है और आध्यात्मिक ऊर्जा संचित होती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जाप सुबह या शाम के समय किया जा सकता है। पूजा करने के समय एक दीपक जलाना और पुष्प अर्पित करना शुभ माना जाता है। ध्यान के समय साधक को शांत स्थान पर बैठकर माँ के नाम का स्मरण करते हुए ध्यान लगाना चाहिए। सकारात्मक मनःस्थिति आवश्यक है ताकि भजन का प्रभाव सही तरीके से सुगम हो सके।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

इस भजन का मुख्य उद्देश्य माँ दुर्गा की कृपा से जीवन में सुख और शांति की प्राप्ति है, और यह भक्त की आस्था और कर्तव्य का प्रतिनिधित्व करता है।

किस अवसर पर इस भजन का गायन किया जाता है?

यह भजन विशेष रूप से नवरात्रि, दुर्गा पूजा और अन्य धार्मिक अवसरों पर गाया जाता है, जब भक्त माँ की आराधना करते हैं।

इस भजन का जप करने से क्या लाभ होते हैं?

इस भजन का जप मानसिक और आध्यात्मिक उद्धार में सहायक होता है, जिससे भक्त को मानसिक सुकून और सकारात्मकता का एहसास होता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 22 Aug 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!