मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन
शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें
मन में बसके तेरी मूर्ति (Mann Mein Basake Teri Murti Lyrics in Hindi) -
Mann Mein Basake Teri Murti
मन में बसाके तेरी मूर्ति
Mann Mein Basake Teri Murti
मन में बसाके तेरी मूर्ति
Utaru Main Ambe Teri Aarti
उतारू मैं अम्बे तेरी आरती
Utaru Main Ambe Teri Aarti
उतारू मैं अम्बे तेरी आरती
Tu Hi Sarva Mangla Tu Hi Bhagvati
तू ही सर्व मंगला तू ही भगवती
Tu Hi Sarva Mangla Tu Hi Bhagvati
तू ही सर्व मंगला तू ही भगवती
Utaru Main Ambe Teri Aarti
उतारू मैं अम्बे तेरी आरती
Utaru Main Ambe Teri Aarti
उतारू मैं अम्बे तेरी आरती
Karuna Karo Kasht Haro Chinta Mita Do
करुणा करो कष्ट हरो चिंता मिटा दो
Aaya Sharan Puju Charan Bhagya Jaga Do
आया शरण पुजू चरण भाग्य जगा दो
Karuna Karo Kasht Haro Chinta Mita Do
करुणा करो कष्ट हरो चिंता मिटा दो
Aaya Sharan Puju Charan Bhagya Jaga Do
आया शरण पुजू चरण भाग्य जगा दो
Tere Siva Ambe Shiva Aasra Nahi
तेरे सिवा अम्बे शिवा आसरा नहीं
Mann Ki Jise Baat Kahe Dusra Nahi
मन की जिसे बात कहे दूसरा नहीं
Lakhon Ka Tune Uddhar Hai Kiya
लाखों का तूने उद्धार है किया
Manga Jisne Jo Tumne Maa Diya
मांगा जिसने जो तुमने माँ दिया
Chotisi Meri Thi Ye Maana Vinti
छोटीसी मेरी थी ये माना विनती
Mann Mein Basake Teri Murti
मन में बसाके तेरी मूर्ति
Mann Mein Basake Teri Murti
मन में बसाके तेरी मूर्ति
Utaru Main Ambe Teri Aarti
उतारू मैं अम्बे तेरी आरती
Utaru Main Ambe Teri Aarti
उतारू मैं अम्बे तेरी आरती
Bhav Mein Phasi Aaj Meri Tar Do Naiya
भव में फसी आज मेरी तार दो नैया
Tujhse Bada Maa Ji Koi Aur Na Maiya
तुझसे बड़ा माँ जी कोई और ना मैया
Bhav Mein Phasi Aaj Meri Tar Do Naiya
भव में फसी आज मेरी तार दो नैया
Tujhse Bada Maa Ji Koi Aur Na Maiya
तुझसे बड़ा माँ जी कोई और ना मैया
Jispe Tera Haath Use Aanch Kyu Aaye
जिसपे तेरा हाथ उसे आंच क्यों आये
Dur Karo Ab To Kale Gam Ke Saye
दूर करो अब तो काले गम के साये
Dard Ki Dava Tere Paas Maa
दर्द की दवा तेरे पास माँ
Toot Jaye Na Meri Aas Maa
टूट जाये ना मेरी आस माँ
Zindagi Daya Ki Hai Bheekh Mangti
ज़िन्दगी दया की है भीख मांगती
Mann Mein Basake Teri Murti
मन में बसाके तेरी मूर्ति
Mann Mein Basake Teri Murti
मन में बसाके तेरी मूर्ति
Utaru Main Ambe Teri Aarti
उतारू मैं अम्बे तेरी आरती
Utaru Main Ambe Teri Aarti
उतारू मैं अम्बे तेरी आरती
Tu Hi Sarva Mangla Tu Hi Bhagvati
तू ही सर्व मंगला तू ही भगवती
Tu Hi Sarva Mangla Tu Hi Bhagvati
तू ही सर्व मंगला तू ही भगवती
Utaru Main Ambe Teri Aarti
उतारू मैं अम्बे तेरी आरती
Utaru Main Ambe Teri Aarti
उतारू मैं अम्बे तेरी आरती
सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।
🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ
यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "मन में बसके तेरी मूर्ति " ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।
भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।
🔍 विशेष महत्त्व और लाभ
श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।
सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।
🕒 साधना एवं गायन विधि
भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।
भजनों को गाने की सही विधि क्या है?
भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।
क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?
हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।
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