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भक्ति रस काव्य व भजन

शंकरजी का डमरू बाजे (Shankarji Ka Damroo) - Baje Kailsash Kher Ganesh Bhajan - Bhaktilok

91 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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शिव की महिमा: डमरू की मधुर ध्वनि

शंकरजी का डमरू बाजे भजन, भक्तों को शिव की अनंत कृपा का अनुभव कराता है।

शंकरजी का डमरू बाजे, कंठ में मस्तक झूमे। नंदी के संग बैठे शंकर, कैलाश पर फिरते घूमे। ॐ नमः शिवाय कहकर, भक्त जन इसे गाते। हर हर महादेव, ये भक्ति का संगी साथ लाते। नदियों से गूंज उठे, ये स्वर सुनती है आकाश। जब जब डमरू बजता है, तब होती है सृष्टि की शुरुआत। शिव की महिमा अनंत है, ये धरती इसे मानती। शिवाराधना से जगता, हर मन में एक उमंग-ती। शिव सती के संग बंधे, प्रेम का अद्भुत संयोग। कैलाश की गोद में खेलते, नंदी उनके साथ रहेगा। जिससे मिलती है सारी सुख-संपत्ति, भक्त जन उसे चढ़ाए। अर्पण करके मन से भक्ति, शिव सदा का साथ पाए। शंकरजी का डमरू बजता, आवाज देता सृष्टि का। हर सांस में बसी है प्रार्थना, भगवान सदा रहते पास। शिव भक्ति में जो संलग्न हों, उनका हर दासी रहे एक चौथाई। प्रेम में डूबे रहते हों जो, वे शिव के कृपा से पर्याप्त होंगे।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मुख्य विषय भगवान शिव का डमरू है, जो सृष्टि के सृजन का प्रतीक है। जब डमरू बजता है, तब संसार में नई जीवात्माओं का आगमन होता है। भगवान शिव का स्वरुप और उनके साथ नंदी का होना दर्शाता है कि देवत्व और भक्ति का संघर्ष सदा चलता रहता है। भक्त जन अपनी भक्ति में 'ॐ नमः शिवाय' का उच्चारण करते हुए, शिव को स्मरण करते हैं। यह न केवल अद्वितीय भक्ति का प्रतीक है, बल्कि यह भक्तों को शिव की अनंत महिमा को अर्पित करता है। हर हर महादेव का उच्चारण, शिव की प्रेरणा से भरे वातावरण को दर्शाता है।

भजन में यह भी दिखाया गया है कि जब भगवान शिव डमरू बजाते हैं, तब समस्त नदियाँ और आकाश उनसे गूंज उठते हैं। यह चित्रण उस अद्भुत क्षण का है जब शिव की कृपा से सभी जीवों में प्रेम और उमंग जागृत होती है। शिव सती के प्रेम में बंधे हैं, जो प्रेम का अद्भुत संयोग है। भक्त जब उन्हें श्रद्धापूर्वक याद करते हैं, तब उनके प्रति आस्था प्रगाढ़ होती है और जीवन में सुख-संपत्ति का संचार होता है। यहां भावार्थ है कि भक्ति में प्रेम और श्रद्धा होनी चाहिए, जिससे व्यक्ति शिव के सच्चे भक्त बन सके।

इस भजन में अकसर देखा जाता है कि शिव की महिमा और भक्ति मार्ग का समावेश होता है। यह भक्ति मार्ग हमें सिखाता है कि कैसे हम अपने मन को शुद्ध करके भगवान शिव का ध्यान करें। शिव की सच्ची आराधना में साधक का मन एकाग्र रहता है और वे कृष्ण का साक्षात्कार करने के लिए तत्पर रहते हैं। यह भजन हमें यह दिखाता है कि हर भक्त की यात्रा अलग होती है, लेकिन शिव की कृपा में सभी एक समान होते हैं।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

भगवान शिव का डमरू प्राचीन भारतीय ग्रंथों, खासकर पुराणों में एक महत्वपूर्ण प्रतीक है। इस भजन में यह संदेश दिया गया है कि कैसे भगवान शिव की भक्ति और सरलता सृष्टि के मूल में बसी हुई है। 'शिवपुराण' में वर्णन मिलता है कि शिव का डमरू सृष्टि के प्रारंभ, मध्य और अंत का प्रतीक है। भजन के माध्यम से, भक्त भगवान शिव के प्रति अपनी भक्ति को व्यक्त करते हैं तथा सृष्टि के व्यवस्थापक के रूप में उन्हें स्मरण करते हैं।

भगवान शिव की महिमा, लिंगोत्पत्ति और पवित्र तीर्थों के विवरण के लिए शिव पुराण का संपूर्ण अध्ययन करें। इस भजन का सामूहिक रूप से गाना मानसिक शांति और आंतरिक स्थिरता को लाने में मदद करता है। यह ध्यान और साधना में गहराई से उतरने का अनुभव कराता है। नियमित रूप से इस भजन का पाठ करने से भक्तों में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है, जिससे मानसिक तनाव का निवारण होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का आदर्श समय सुबह-सुबह और संध्या के समय है, जब वातावरण शांति और ध्यान के लिए अनुकूल होता है। विशेष रूप से जब भजन गाया जाए, तब दीप जलाना और पुष्प अर्पित करना शुभ माना जाता है। सही मुद्रा में बैठना और ध्यान को केंद्रित करना, भावनाओं को सही दिशा में लगाने में मदद करता है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

शंकरजी का डमरू बजने का क्या अर्थ है?

बजता हुआ डमरू सृष्टि के सृजन और जीवन के प्रारम्भ का प्रतीक है, जो भगवान शिव की महिमा को दर्शाता है।

क्या यह भजन शिव आराधना में विशेष है?

हाँ, यह भजन शिव की अद्वितीय महिमा, प्रेम और समर्पण को दर्शाता है, जो भक्तों को गहन भक्ति का अनुभव कराता है।

इस भजन का पाठ करने से कौन से लाभ हैं?

इस भजन का नियमित पाठ मानसिक शांति, ऊर्जा का संचार और आध्यात्मिक उन्नति में मदद करता है।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 21 Aug 2026

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