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श्री सत्यनारायण आरती (Shri Satyanarayan Aarti Lyrics in Hindi) - Lakshmi Bhajan - Bhaktilok

104 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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श्री सत्यनारायण आरती: सत्य की प्राप्ति का मार्ग

इस आरती में श्री सत्यनारायण की कृपा से भक्तों को सुख, समृद्धि और शांति की प्राप्ति होती है।

श्री सत्यनारायण आरती (Shri Satyanarayan Aarti Lyrics in Hindi) - Lakshmi Bhajan - Bhaktilokश्री सत्यनारायण आरती (Shri Satyanarayan Aarti Lyrics in Hindi) -ॐ जय लक्ष्मीरमणा स्वामी जय लक्ष्मीरमणा |सत्यनारायण स्वामी जन पातक हरणा || जय लक्ष्मीरमणारत्नजडित सिंहासन अद्भुत छवि राजें |नारद करत निरतंर घंटा ध्वनी बाजें ॥ॐ जय लक्ष्मीरमणा स्वामी....प्रकट भयें कलिकारण द्विज को दरस दियो |बूढों ब्राम्हण बनके ,कंचन महल कियों ॥ॐ जय लक्ष्मीरमणा स्वामी.....दुर्बल भील कठार जिन पर कृपा करी |च्रंदचूड एक राजा तिनकी विपत्ति हरी ॥ॐ जय लक्ष्मीरमणा स्वामी.....वैश्य मनोरथ पायों श्रद्धा तज दिन्ही |सो फल भोग्यों प्रभूजी फेर स्तुति किन्ही ॥ॐ जय लक्ष्मीरमणा स्वामी.....भाव भक्ति के कारन .छिन छिन रुप धरें |श्रद्धा धारण किन्ही तिनके काज सरें ॥ॐ जय लक्ष्मीरमणा स्वामी.....ग्वाल बाल संग राजा वन में भक्ति करि |मनवांचित फल दिन्हो दीन दयालु हरि ॥ॐ जय लक्ष्मीरमणा स्वामी.....चढत प्रसाद सवायों दली फल मेवा |धूप दीप तुलसी से राजी सत्य देवा ॥ॐ जय लक्ष्मीरमणा स्वामी.....सत्यनारायणजी की आरती जो कोई नर गावे |ऋद्धि सिद्धी सुख संपत्ति सहज रुप पावे ॥ॐ जय लक्ष्मीरमणा स्वामी.....ॐ जय लक्ष्मीरमणा स्वामी जय लक्ष्मीरमणा|सत्यनारायण स्वामी जन पातक हरणा ॥ जय लक्ष्मीरमणा

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

श्री सत्यनारायण आरती में भक्त श्री सत्यनारायण भगवान की स्तुति करते हैं, जो सत्य का प्रतीक हैं। 'जय लक्ष्मीरमणा' कहकर भगवान लक्ष्मी के साथ सत्यनारायण की महिमा का गुणगान किया जाता है। आरती में यह प्रकट किया गया है कि सत्यनारायण भगवान सभी प्रकार के पातकों को हर लेते हैं। जैसे कि 'सत्यनारायण स्वामी जन पातक हरणा' में भक्त उनकी कृपा से अपनी गलतियों और पापों से मुक्ति की प्रार्थना कर रहे हैं। इसके अलावा, 'रत्नजडित सिंहासन अद्भुत छवि राजें' से यह स्पष्ट होता है कि भगवान की दिव्य सत्ता और उनके भव्य रूप को दर्शाया गया है। यह आरती निरंतर भगवान की स्तुति के माध्यम से भक्तों को मानसिक शांति और सकारात्मकता प्रदान करती है, विशेषकर जब वे संकट में होते हैं।

इस आरती में हर एक पद में विभिन्न पात्रताओं की कहानियाँ सम्मिलित की गई हैं। 'प्रकट भयें कलिकारण द्विज को दरस दियो' से आशय है कि भगवान सत्यनारायण ने ब्राह्मणों को दर्शन देकर उन्हें आशीर्वाद दिया। विभिन्न सामाजिक वर्गों जैसे दुर्बल भील और राजा चंद्रचूड की कहानियाँ यह दर्शाती हैं कि भगवान किसी भी जाति या स्थिति के व्यक्ति की मदद करने के लिए सदैव तत्पर होते हैं। इस तरह, 'भाव भक्ति के कारण छिन छिन रुप धरें' बताता है कि श्रद्धा और भक्ति से लेकर हर भक्त को भगवान का अनुभव होता है, और वह उन्हें विभिन्न रूपों में दर्शन देते हैं।

आरती के माध्यम से, एक गहन भावनात्मक संबंध स्थापित किया जाता है। 'ग्वाल बाल संग राजा वन में भक्ति करि' जैसी पंक्तियाँ ये दर्शाती हैं कि भक्ति न केवल एक व्यक्तिगत अनुभव है, बल्कि सामाजिक भी है। भगवान की भक्ति से ही सामूहिक मनोविज्ञान को सुख मिलता है। 'चढत प्रसाद सवायों दली फल मेवा' में यह शिक्षित किया गया है कि भक्ति में प्रसाद अर्पित करने का महत्व है, जो हमें मानसिक और आध्यात्मिक आनन्द की ओर ले जाता है। इस प्रकार, आरती भक्तों को भक्ति मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करती है, जिससे उन्हें परमात्मा का अनुभव होता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह आरती विशेष रूप से श्री सत्यनारायण की पूजा के समय गाई जाती है, जो कि लम्बी और शुभ कार्यों के लिए प्रख्यात है। विभिन्न पुराणों में ऐसे उल्लेख मिलते हैं, जिनमें भगवान सत्यनारायण की आराधना करने वालों को सुख, शांति और समृद्धि का आश्वासन मिलता है। 'सत्यनारायण व्रत' विशेष रूप से भाग्य और सुख-संपत्ति की प्राप्ति के लिए मनाया जाता है और यह महाकुंभ, रामायण और महाभारत में भी उल्लेखित है। सत्य के पालन से मनुष्य की धार्मिकता और आचारशुद्धता को दर्शाया गया है, जो उनके जीवन को सुख और संतोष से भर देता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। श्री सत्यनारायण आरती का पाठ मानसिक संतुलन, शांति और सकारात्मकता प्रदान करता है। इसके अलावा, इसे गाने से भक्तों की आंतरिक ऊर्जा में वृद्धि होती है। इस आरती का निरंतर जाप करने से भक्त ऋद्धि, सिद्धि, और धन-संपत्ति को प्राप्त करते हैं, जिससे उनकी जीवन की कठिनाइयाँ दूर होती हैं।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस आरती का पाठ सुबह या शाम के समय किया जाना चाहिए, जिससे एक संतुलित वातावरण निर्मित हो सके। भक्तों को अपने श्रद्धा भाव से दीपक जलाना चाहिए और तुलसी के पत्ते अर्पित करने चाहिए। आरती करते समय ध्यान और समर्पण से रहना आवश्यक है, जिससे भगवान की कृपा शीघ्र प्राप्त हो सके।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

श्री सत्यनारायण आरती का महत्व क्या है?

यह आरती भगवान सत्यनारायण की महानता और कृपा का बखान करती है, जिससे भक्त जीवन में सुख, समृद्धि और शांति की प्राप्ति करते हैं।

इस आरती का पाठ कब करना चाहिए?

श्री सत्यनारायण आरती का पाठ विशेषतः पूर्णिमा और संक्रांति जैसे पर्वों पर किया जाता है, लेकिन इसे प्रतिदिन भी गाया जा सकता है।

क्या इस आरती का पाठ करने से कोई विशेष लाभ होता है?

जी हाँ, इस आरती का नियमित पाठ करने से भक्तों को मानसिक शांति, धन-संपत्ति, और बुराइयों से मुक्ति की प्राप्ति होती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 28 Aug 2026

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