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Punjabi Devi Bhajan

मईया घरे अइली (Maiya Ghare Aaili) - Mona Singh Devigeet - BhaktiLok

45 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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देवी माता की कृपा: मईया घरे अइली

आपका मन प्रसन्न हो, अपने मन में देवी माता का स्मरण करें। इस भजन को गाने से मन और आत्मा को शांति मिलती है।

मईया घरे अइली मईया घरे अइली, ज़गत-जननी अइली दुःख-दीनी, सुख-स्वरूपा, सदा साथ रहिती मईया घरे अइली, ज़गत-जननी अइली प्रेम-झुराके, मन की बाड़ी में अइली दुःख-दीनी, सुख-स्वरूपा, सदा साथ रहिती मईया घरे अइली, ज़गत-जननी अइली सधिया सब भव्य कर दे, सच्चे मन से गावे मन से जो तुम गाओगी, कुण्डली द्वार ले आएगी जग में जो हर जगह छा गई हो, उधर भागी आएगी दुःख-दीनी, सुख-स्वरूपा, सदा साथ रहिती मईया घरे अइली, ज़गत-जननी अइली मन की पट्टी हटा दो, सच्चे द्वारा ले चलो नाड़ी पर तुम ध्यान लगाओ, जीवित करती चित्त को असुर-विनाशिनी, जग की संजीवनी, सिद्धि देती यश को दुःख-दीनी, सुख-स्वरूपा, सदा साथ रहिती मईया घरे अइली, ज़गत-जननी अइली लौटी जब तुम घरे, मैया भूले रहे ही भावुकता में सजा लो, या याद कर लो सब कुछ आग में जो जलकर टपकाती हो, उधारीन दिल के तो दुःख-दीनी, सुख-स्वरूपा, सदा साथ रहिती मईया घरे अइली, ज़गत-जननी अइली तुम्हारी सदा की याउं, ले आओ प्रेम शरण में तुमसे ही जिए हैं सब, तुम्हे परणाम कर तट पर तुमसे ही बन जाती सारी रचनाएँ, हे माँ वन में खेलती दुःख-दीनी, सुख-स्वरूपा, सदा साथ रहिती मईया घरे अइली, ज़गत-जननी अइली

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मुख्य विषय देवी माँ की सर्वव्यापकता और कृपा का अनुभव करना है। 'मईया घरे अइली' में माँ की उपस्थिति का एहसास कराते हुए भक्त उनकी ओर अपनी भावनाएं समर्पित करता है। भजन में यह उल्लेखित है कि देवी माँ सिर्फ अम्बा या जननी नहीं हैं, बल्कि हमारी सुख-साधना की स्वरूपा भी हैं। 'दुःख-दीनी, सुख-स्वरूपा' का प्रभाव हमें बताता है कि माँ परेशानियों और दुखों को दूर करती हैं और हमारे जीवन में खुशियों का संचार करती हैं। इस तरह, माता का आशीर्वाद हमारे जीवन में शांति और समृद्धि लेकर आता है।

भजन में भक्त का भाव ऐसा है जैसे कि वह माता को अपने घर में आमंत्रित कर रहा है और उनसे सहयोग की कामना कर रहा है। 'प्रेम-झुराके, मन की बाड़ी में अइली' में यह स्पष्ट है कि माता का प्रेम एवं संरक्षण मन को सुकून और आनंद प्रदान करता है। यहाँ भक्त की मानसिकता बिल्कुल स्पष्ट दिखाई देती है, जिसमें वह माँ को अपने मन की बाड़ी में बसा कर अपने दुःख-दर्द बाँटता है। यह एक गहरा आध्यात्मिक संबंध दर्शाता है, जहाँ भक्त अपने भक्ति भाव के माध्यम से माँ के प्रति अपनी श्रद्धा का इज़हार करता है।

इस भजन के माध्यम से भक्ति मार्ग की गहराई को समझा जा सकता है। यह प्रतिपादित करता है कि कैसे देवी माँ के प्रति सच्ची भक्ति हमको जीवन में सुख और शांति का अनुभव कराती है। 'नाड़ी पर तुम ध्यान लगाओ, जीवित करती चित्त को' इस पंक्ति में ध्यान और मनन की विधि भी प्रदर्शित होती है। भक्तिपूर्ण जीवन का यह मार्ग हमें देवी माँ के प्रति श्रद्धा, भक्ति और समर्पण का भाव विकसित करने के लिए प्रेरित करता है। यहाँ भक्ति का अर्थ है अपनी भावनाओं को खुद से जोड़ना और जीवन में सकारात्मकता लाना।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का पौराणिक संदर्भ देवी माँ के विभिन्न स्वरूपों में निहित है। 'मईया' का उल्लेख भारतीय संस्कृति में मातृ देवी के रूप में सर्वश्रेष्ठ स्थान रखता है। वेसे तो माँ दुर्गा, काली, भगवती आदि कई रूपों में जानी जाती हैं, पर इस भजन में देवी माता की सर्वव्यापकता का एहसास है। पुराणों के अनुसार, माँ का आशीर्वाद हर भक्त के लिए अनिवार्य है और इस भजन के माध्यम से भक्त उनसे कृपा की याचना करता है। इन भावनाओं को श्रद्धा से व्यक्त करना हमें जीवन की कठिनाइयों में संबल प्रदान करता है।

मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें। इस भजन का जाप करने से भक्त को मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आंतरिक संतुलन की प्राप्ति होती है। यह न केवल आध्यात्मिक लाभ बल्कि मानसिक स्वास्थ्य में भी सुधार लाता है। भक्त का ध्यान केन्द्रित हो जाता है और यह जीवन की कठिनाइयों में सहारा प्रदान करता है। इससे मानसिक स्थिति शांत होती है और आस्था में वृद्धि होती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जाप सुबह या संध्या के समय करना सर्वोत्तम रहता है। इस दौरान एक दीप जलाना और देवी माता को फूल या मिठाई का भोग अर्पित करना चाहिए। मन को शुद्ध और एकाग्र करके बैठना चाहिए, जिससे भक्ति के भाव अधिक गहराई से अनुभव किए जा सकें। सही मुद्रा में बैठकर भजन गाने पर ध्यान उन्मुख होता है और भक्त का मन भक्ति में लीन हो जाता है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

इस भजन का उद्देश्य देवी माँ की कृपा को अनुभव करना और भक्त के मन में उनके प्रति प्रेम और श्रद्धा जागृत करना है।

क्या यह भजन केवल देवी माँ के लिए है?

यह भजन मुख्यतः देवी माँ को समर्पित है, लेकिन यह भक्ति और भक्ति मार्ग के परिपेक्ष्य में सभी शक्तियों के प्रति सम्मान व्यक्त करता है।

भजन गाने का सही समय कौन सा है?

इस भजन का जाप सुबह या संध्या के समय करना चाहिए, जब मन एकाग्र और शांत होता है।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 01 Sep 2026

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