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Chhath Puja Geet

हे छठी मईया (He Chhathi Maiya) - Chhathpooja Geet Kishan Sanware Chhath Puja Song - Bhaktilok

115 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

हे छठी मईया, हे छठी मईया तुम्हरे चरणन में मोर निवेदन हे छठी मईया, हे छठी मईया सूरज के अरुण किरण में तुम हो चाँद की शीतल ज्योति में तुम हो धरती के कण-कण में तुम समाई हे छठी मईया, हे छठी मईया छठ का पर्व आयो भैया परिवार सब आई भैया घाट-घाट पर उमड़ी भीड़ हे छठी मईया, हे छठी मईया अरुण-अरुण सूरज उगते हैं शाम ढले जब डूबते हैं तुम्हरी पूजा का यही विधान हे छठी मईया, हे छठी मईया खीर-पूरी, ठेकुआ, खिचड़ी सकरपारे की मिठाई भरी भोग लगाके खाते सब भैया हे छठी मईया, हे छठी मईया संतान देना, सुख देना रोग-शोक सब हर देना दीर्घायु हो सब परिवार हे छठी मईया, हे छठी मईया व्रत रखते हैं छ: दिन भैया घाट पर नहाते सब भैया तुम्हरे आशीष का इंतजार हे छठी मईया, हे छठी मईया

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

यह भजन 'हे छठी मईया' छठ पूजा के महान पर्व को समर्पित है, जो भारतीय संस्कृति में सबसे प्राचीन और पवित्र त्योहारों में से एक है। इस गीत में छठी माता को ब्रह्मांड की सर्वव्यापी शक्ति के रूप में चित्रित किया गया है। 'सूरज के अरुण किरण में तुम हो, चाँद की शीतल ज्योति में तुम हो' - ये पंक्तियाँ दर्शाती हैं कि छठी देवी प्रकृति के प्रत्येक तत्व में विद्यमान हैं। भजन में छठ पूजा की पारंपरिक परंपराओं जैसे घाटों पर भीड़, अरुण-सूर्य की पूजा, और विशेष भोग (खीर-पूरी, ठेकुआ) का वर्णन है। यह गीत छठी माता से संतान, सुख, रोग-मुक्ति और दीर्घायु का आशीर्वाद माँगता है। छठ व्रत की कठोर तपस्या और छ: दिन तक चलने वाली इस पूजा प्रक्रिया को भक्ति के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

इस भजन की भावनात्मक गहराई छठी माता के प्रति परिवार की अटूट श्रद्धा और विश्वास को दर्शाती है। 'व्रत रखते हैं छ: दिन भैया, घाट पर नहाते सब भैया' - ये पंक्तियाँ निरंतरता और समर्पण के भाव को प्रकट करती हैं। छठ पूजा की परंपरा में परिवार के सभी सदस्य एक साथ आते हैं, जो सामूहिक भक्ति का प्रतीक है। 'तुम्हरे चरणन में मोर निवेदन' - ये शब्द पूर्ण समर्पण और आत्मसमर्पण की भावना व्यक्त करते हैं। भोग का वितरण और पारिवारिक त्योहार का उत्सव इस बात को दर्शाता है कि छठी माता केवल एक देवता नहीं, बल्कि परिवार की सुरक्षक और पालनहार मानी जाती हैं। 'संतान देना, सुख देना, रोग-शोक सब हर देना' - ये प्रार्थनाएँ साधारण जनता की सहज आशाओं को प्रतिबिंबित करती हैं।

भक्ति मार्ग की दृष्टि से यह भजन 'शक्ति साधना' का एक उत्तम उदाहरण है। छठी माता को देवी दुर्गा, अन्नपूर्णा और सावित्री के रूप में माना जाता है। इस गीत में प्रकृति पूजन की वैदिक परंपरा का समावेश है जहाँ सूर्य और जल दोनों को ही पवित्र माना गया है। 'धरती के कण-कण में तुम समाई' - यह अद्वैत दर्शन की ओर इशारा करता है जहाँ सर्वत्र परमात्मा का अस्तित्व माना जाता है। छठ पूजा की कठोर साधना सांसारिक सुखों से त्याग की माँग करती है, जिससे भक्त की आंतरिक शुद्धि होती है। यह भक्ति निष्काम कर्मयोग के सिद्धांत पर आधारित है, जहाँ भक्त अपनी इच्छाओं को पूर्ण करने के लिए नहीं, बल्कि भगवान की प्रसन्नता के लिए पूजा करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

छठी माता का संबंध भारतीय पौराणिक परंपरा में बहुत गहरा है। महाभारत और रामायण में भी इसी शक्ति का उल्लेख मिलता है। छठ पूजा का सबसे प्राचीन उल्लेख सूर्य पुराण में मिलता है, जहाँ छठी देवी को सूर्य देव की शक्ति के रूप में वर्णित किया गया है। द्रौपदी की कथा के अनुसार, जब पाँडव अपने पराजय के दिनों में थे, तब द्रौपदी ने छठ पूजा की, जिससे उन्हें शक्ति मिली। यह व्रत विशेषकर बिहार, उत्तर प्रदेश और नेपाल में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष में यह छ: दिन तक मनाया जाता है और पहले दिन घर की सफाई से शुरू होता है। छठी माता को संतान और परिवार की सुरक्षा की देवी माना जाता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का नियमित गायन और श्रवण मन को शांति और सकारात्मकता प्रदान करता है। छठी माता की पूजा और इस गीत के माध्यम से मानसिक स्थिरता प्राप्त होती है। परिवार में एकता और भक्ति की भावना जागृत होती है। नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा मिलती है। आध्यात्मिक विकास की प्रक्रिया तीव्र होती है। शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार होता है और मानसिक तनाव में कमी आती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

छठ पूजा के समय प्रातःकाल सूर्योदय से पहले इस भजन को नदी के घाट पर गाना सर्वोत्तम माना जाता है। व्रत रखते समय शुद्ध वस्त्र धारण करें और पूर्व की ओर मुँह करके बैठें। घी का दीपक जलाएँ और गेहूँ, जौ, तिल और गुड़ का भोग तैयार करें। भजन गाते समय एकाग्रता बनाए रखें और हृदय में छठी माता की छवि रखें। सायंकाल और भोर दोनों समय इस भजन का गायन विशेष फल देता है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

छठ पूजा में छठी माता को कौन माना जाता है और उनका महत्व क्या है?

छठी माता को सूर्य देव की शक्ति माना जाता है। वे संतान, परिवार और पारिवारिक सुख की देवी हैं। महाभारत में द्रौपदी ने इन्हीं की पूजा की थी। इन्हें लक्ष्मी, सरस्वती और दुर्गा का एक रूप माना जाता है जो रोग, शोक और दुर्भाग्य को दूर करती हैं।

छठ व्रत को छः दिन तक क्यों मनाया जाता है और इसकी पारंपरिक प्रक्रिया क्या है?

छठ व्रत की छः दिन की अवधि संख्या छः के महत्व को दर्शाती है। पहले दिन घर की सफाई, दूसरे दिन खिचड़ी भोग, तीसरे दिन लूलू दही भात, चौथे दिन घाट पर अर्ध्य, पाँचवें दिन सूर्यास्त को अर्ध्य और छठे दिन सूर्योदय को अर्ध्य दिया जाता है।

इस भजन के द्वारा छठी माता से किस प्रकार का आशीर्वाद माँगा जाता है?

इस भजन में छठी माता से संतान, दीर्घायु, पारिवारिक सुख, रोग-मुक्ति, समृद्धि और कल्याण का आशीर्वाद माँगा जाता है। यह गीत परिवार की सभी आवश्यकताओं के लिए माता की कृपा की याचना करता है और भक्त के जीवन में सकारात्मकता लाता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 02 Sep 2026

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