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Punjabi Devi Bhajan

ओम जय अम्बे गौरी (Om Jai Ambe Gauri Lyrics in Hindi) - Maa Ambe ji Ki Aarti - Bhaktilok

85 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें



ओम जय अम्बे गौरी (Om Jai Ambe Gauri Lyrics in Hindi) - Ambe ji Ki Aarti Devi Aarti - 


( ॐ जय अम्बे गौरी मैया जय श्यामा गौरी लिरिक्स ) :-

ॐ जय अम्बे गौरी मैया जय श्यामा गौरी

तुमको निशदिन ध्यावत हरि ब्रह्मा शिवरी।


मांग सिंदूर विराजत टीको मृगमद को

उज्ज्वल से दोउ नैना चंद्रवदन नीको॥

॥ॐ जय अम्बे गौरी…॥


कनक समान कलेवर रक्ताम्बर राजै

रक्तपुष्प गल माला कंठन पर साजै॥

॥ॐ जय अम्बे गौरी…॥


1. सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते।।

2. ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते।।


केहरि वाहन राजत खड्ग खप्पर धारी

सुर-नर-मुनिजन सेवत तिनके दुखहारी॥

॥ॐ जय अम्बे गौरी…॥


कानन कुण्डल शोभित नासाग्रे मोती

कोटिक चंद्र दिवाकर सम राजत ज्योती॥

॥ॐ जय अम्बे गौरी…॥


शुंभ-निशुंभ बिदारे महिषासुर घाती

धूम्र विलोचन नैना निशदिन मदमाती॥

॥ॐ जय अम्बे गौरी…॥


चण्ड-मुण्ड संहारे शोणित बीज हरे

मधु-कैटभ दोउ मारे सुर भयहीन करे॥

॥ॐ जय अम्बे गौरी…॥


ब्रह्माणी रूद्राणी तुम कमला रानी

आगम निगम बखानी तुम शिव पटरानी॥

॥ॐ जय अम्बे गौरी…॥


चौंसठ योगिनी मंगल गावत नृत्य करत भैरों

बाजत ताल मृदंगा अरू बाजत डमरू॥

॥ॐ जय अम्बे गौरी…॥


तुम ही जग की माता तुम ही हो भरता

भक्तन की दुख हरता सुख संपति करता॥

॥ॐ जय अम्बे गौरी…॥


भुजा चार अति शोभित खडग खप्पर धारी

मनवांछित फल पावत सेवत नर नारी॥

॥ॐ जय अम्बे गौरी…॥


कंचन थाल विराजत अगर कपूर बाती

श्रीमालकेतु में राजत कोटि रतन ज्योती॥

॥ॐ जय अम्बे गौरी…॥


श्री अंबेजी की आरति जो कोइ नर गावे

कहत शिवानंद स्वामी सुख-संपति पावे॥

॥ॐ जय अम्बे गौरी…॥


जय अम्बे गौरी मैया जय श्यामा गौरी

तुमको निशदिन ध्यावत हरि ब्रह्मा शिवरी।



(Jai Ambe Gauri Maiya Jai Shyama Gauri in English) :-

Jai Ambe Gauri Maiya Jaa Shyama Gauri

Nishdin Tumko Dhyaavat Hari Brahma Shivji ॥


Mang Sinduur Biraajat Tiko Mrigmadko

Ujjvalse Dou Naina Chandravadan Niko ॥

॥Jai Ambe Gauri...॥


Kanak Saman Kalevar Raktambar Raje

Raktapushp Galmala Kanthhar Saje ॥

॥Jai Ambe Gauri...॥


Kehari Vahan Rajat Khadg Khappar Dhari

Sur Nar Munijan Sevat Tinke Dukhahari ॥

॥Jai Ambe Gauri...॥


Kanan Kundal Shobhit Nasagre Moti

Kotik Chandra Divakar Samrajat Jyoti ॥

॥Jai Ambe Gauri...॥


Shumbh- Nishumbh Vidare Mahishasur Ghatia

Dhumra-Vilochan Naina Nishdin Madmati ॥

॥Jai Ambe Gauri...॥


Chanda-Munda Sanhera Shonit Beed Hare

Madhu-Katitabha Mare Sur Bhayahin Kare ॥

॥Jai Ambe Gauri...॥


Brahmani Rudrani Tum Kamala Rani

Agam-Nigam Bakhani Turn Shiv Patrani ॥

॥Jai Ambe Gauri...॥


Chaunsath Yogini Gavat Nritya Karat Bhairon

Bajat Tab Mridanga Aur Bajat Damru ॥

॥Jai Ambe Gauri...॥


Tum Ho Jag Ki Mata Tum Hi Ho Bharta

Bhaktan Ki Dukh Harta Sukh Sampati Karta ॥

॥Jai Ambe Gauri...॥


Bhuja Char Ati Shobhit Var Mudra Dhari

Manvanchhit Phal Pavat Sevat Nar Nari॥

॥Jai Ambe Gauri...॥


Kanchan Thal Virajat Agaru Kapur Bati

Malketu Men Rajat Kotiratan Jyoti ॥

॥Jai Ambe Gauri...॥


Jai Ambe Gauri Maiya Jaa Shyama Gauri

Nishdin Tumko Dhyaavat Hari Brahma Shivji ॥


1.ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चित् दुःख भाग्भवेत् ||

2. दुर्गा मंत्र हिनस्ति दैत्येजंसि स्वनेनापूर्य या जगत् सा घण्टा पातु नो देवि पापेभ्यो नः सुतानिव ॥


मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

आदिशक्ति माता दुर्गा, महालक्ष्मी और महासरस्वती को समर्पित यह भजन "ओम जय अम्बे गौरी (Om Jai Ambe Gauri Lyrics in Hindi) - Maa Ambe ji Ki Aarti - Bhaktilok" जगत जननी की कृपा और महिमा का गान करता है। सनातन परंपरा में स्त्री शक्ति को सृष्टि का आदि कारण माना गया है। इस भजन की एक-एक पंक्ति माता के ममतामयी और दुष्टनाशिनी रूप का वर्णन करती है।

भजन का मूल स्वर माता के प्रति समर्पण का है। जब भक्त माता के चरणों में प्रणाम कर अपनी प्रार्थना रखता है, तो देवी मां उसके समस्त कष्टों को हर लेती हैं। यह भजन साधक के भीतर शक्ति, करुणा, तेज और पवित्रता का संचार करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

देवीभागवत पुराण के अनुसार, माता की उपासना से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चारों पुरुषार्थों की सिद्धि होती है। विशेषकर नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के भजनों का संकीर्तन करने से घर में रिद्धि-सिद्धि और सुख-समृद्धि का वास होता है।

मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें। देवी भजनों के संकीर्तन से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है, दरिद्रता का नाश होता है और व्यापार तथा नौकरी में उन्नति के द्वार खुलते हैं। यह जीवन में सुख, शांति और सुरक्षा का अनुभव कराता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

माता की पूजा के लिए शुक्रवार, अष्टमी तिथि और नवरात्रि का काल सर्वोत्तम है। पूजा स्थान पर लाल फूल, धूप-दीप अर्पित कर मां के सामने घी का अखण्ड ज्योत जलाएं और भक्तिभाव से संकीर्तन करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

मां दुर्गा के भजनों का संकीर्तन विशेष रूप से कब करना चाहिए?

यद्यपि नियमित संकीर्तन उत्तम है, किन्तु शुक्रवार के दिन और शारदीय व चैत्र नवरात्रि के पावन दिनों में मां दुर्गा के भजन असीम सुख-समृद्धि प्रदान करते हैं।

देवी पूजा में किस रंग के वस्त्रों का उपयोग करना शुभ माना जाता है?

माता दुर्गा और शक्ति स्वरूपा देवी पूजा में लाल, पीले अथवा नारंगी (भगवा) रंग के वस्त्र धारण करना अत्यंत शुभ माना गया है।

क्या देवी उपासना से व्यापारिक बाधाएं दूर होती हैं?

हाँ, मां लक्ष्मी और मां दुर्गा की कृपा से व्यापार में आ रही रुकावटें दूर होती हैं और आर्थिक तंगी से मुक्ति मिलती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 18 Aug 2026

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