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Punjabi Devi Bhajan

पर्वत के ऊपर मईया का द्वारा (Parvat Ke Upar Maiya Ka Dwar) - Mata Rani Bhajan Devi Geet - Bhaktilok

65 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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मईया का अद्भुत दवारा: भक्ति का मार्ग

इस भजन में देवी मईया के प्रति असीम श्रद्धा और प्रेम का अनुभव करें।

पर्वत के ऊपर मईया का द्वार। पर्वत के ऊपर मईया का द्वार। जो कोई दरस करे, बस जाए ओ सासु, बेटा मेरा आजा रे। पर्वत के ऊपर मईया का द्वार॥ कंगना घुंघरू की पायल गूंजे। कहियो तो दूं न जुदा अटके ख्वाबों में मैं। उनसे बिना तेरा, मैं बिछड़ भी जाऊं। पर्वत के ऊपर मईया का द्वार॥ सिंह पर सवारी करे, जो धरती पर जद में,ऽ हम तो दान कर देंगे, सारा जीवन तेरा। मुझे प्यार तेरे बिना, ना आजा मायां। पर्वत के ऊपर मईया का द्वार॥ हमरे हर दर्द का तू ही मीत। मोह हैं दीवाने तेरा। बहुत दी जातला भेंट। पर्वत के ऊपर मईया का द्वार॥ सगरे सुख अपनो, हर ग़म है तेरा। हाथ में तेरा नारा लेकर मुझे। जस का तीरा, तू ही ने चहल कदमी। पर्वत के ऊपर मईया का द्वार॥ साझा छाया चारों ओर सागर है छोटा। दान बोला, तो बोला, अपना कर मुझे। हर दर्द मेरा मां, तू ले मत जाना। पर्वत के ऊपर मईया का द्वार॥

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन 'पर्वत के ऊपर मईया का द्वार' में माता रानी का संदेश अपने भक्तों के प्रति असीम प्रेम और कृपा का उद्घाटन करता है। पर्वत, जो समस्त कठिनाइयों का प्रतीक है, उसके ऊपर माता का द्वार उपस्थित है, इससे यह सूचित होता है कि माता रानी हर भक्त की कठिनाईयों को पार करने में सहायक हैं। इस भजन में वर्णित 'जो कोई दरस करे, बस जाए' का अर्थ है कि यदि कोई भक्त माता के दर्शन करता है, तो वह उनके प्रेम में समाहित हो जाता है। यहां माता रानी की पवित्रता और सुरक्षा का बोध भी कराते हैं, जो हर किसी को प्रेरित करती है कि वे माता के चरणों में अपनी समस्याएं लाएं। विभिन्न पंक्तियां जैसे 'कंगना घुंघरू की पायल गूंजे' प्रेम और एकता के प्रतीक हैं, और उन्हें एक रूपक के रूप में देखा जा सकता है - जैसे एक भक्त माता के प्रति अपनी भक्ति व्यक्त करता है।

इस भजन की गहराई में भावनात्मक स्तर पर माता रानी का भक्तों के प्रति अपार प्रेम निहित है। 'हमरे हर दर्द का तू ही मीत' पंक्ति से यह स्पष्ट है कि भक्त माता को अपने हर दुख का साथी मानता है। जीवन की कठिनाइयों के बीच, भक्त माता से अप्रतिम सरलता और प्रेम की खोज करता है। 'सिंह पर सवारी करे' पंक्ति में माता रानी की शक्ति को दर्शाते हुए, भक्त यह भी महसूस करता है कि माता का आशीर्वाद प्राप्त करने से वह हर चुनौती का सामना कर सकता है। इस प्रकार, भजन न केवल भक्त के हृदय में श्रद्धा जगाता है, बल्कि यह यह भी सिखाता है कि माता रानी हमें शक्ति और साहस देती हैं।

यह भजन भक्तिभाव (भक्ति मार्ग) का बेहतरीन उदाहरण है, जहां भक्त अपने हृदय में आस्था, प्रेम, और भक्ति का संचार करता है। हिंदू धर्म में माता के प्रति श्रद्धा स्वभाविक है, और यह भजन उसी पवित्र भावना को समर्पित है। भक्त की नैतिकता और समर्पण का यह सफर माता की ओर दिशा दिखाता है, जो उसके लिए मार्गदर्शिका का काम करता है। 'साझा छाया चारों ओर' का भाव सिखाता है कि माता रानी हर जगह हैं और हर परिस्थिति में अपनापन प्रदान करती हैं। इस तरह, भक्ति का मार्ग न केवल एक आध्यात्मिक यात्रा है, बल्कि यह प्रेम, विश्वास और सबको एक सूत्र में बांधने का अनुभव भी देता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन की मान्यता भारतीय पौराणिक कथाओं में निहित है, जहां देवी दुर्गा या माँ पार्वती को समस्त जीवों की सृष्टि और सुरक्षा के लिए पूजा जाता है। उनके प्रति भक्ति प्रदर्शन का यह मार्ग 'महानवमी' और 'दुर्गापूजा' के अवसर पर विशेष रूप से प्रचलित है। देवी भागवत और अन्य पुराणों में माता रानी की महिमा का वर्णन किया गया है, जहां उन्हें 'शक्ती' और 'करुणा' की अवतार मानी गई है। इस भजन का पाठ करते समय भक्त स्वयं को माता की अनुकंपा से भाग्यशाली मानते हैं। भक्तों का विश्वास है कि देवी मईया के प्रति सच्ची भक्ति रखने वाले भक्तों के सभी दुःख-दर्द समाप्त हो जाते हैं।

मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें। इस भजन का पाठ करने से मानसिक शांति, आंतरिक साक्षात्कार और दिव्य ऊर्जा की प्राप्ति होती है। यह भक्ति भाव को प्रबल बनाता है, और श्रद्धालुओं में संतोष की अनुभूति कराता है। नियमित रूप से इस भजन का जाप करने से भक्त का आत्मिक विकास और मानसिक तनाव में कमी आती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जाप सुबह सूर्योदय के समय या शाम को संध्या में अत्यंत लाभकारी होता है। भक्त को चाहिए कि वे एक दीया जलाएं और माता रानी के चित्र के सामने बैठकर ध्यानपूर्वक भजन का पाठ करें। सही मानसिकता में परिपूर्ण होकर और श्रद्धा से इस भजन का उच्चारण करने से अत्यधिक फल प्राप्त होता है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का महत्व क्या है?

इस भजन का महत्व यह है कि यह माता रानी के प्रति श्रद्धा व्यक्त करता है और भक्तों को उनकी सुरक्षा और कृपा का अनुभव कराता है।

मैं इस भजन का पाठ कब करूं?

इस भजन का पाठ भक्ति और ध्यान के साथ सुबह या शाम को किया जा सकता है, जिससे मानसिक शांति मिलती है।

क्या इस भजन का कोई विशेष प्रभाव है?

यह भजन देवी मईया के प्रति भक्ति को प्रबल बनाता है और भक्त के जीवन में सुख और शांति लाने में सहायक होता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 24 Aug 2026

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