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Chhath Puja Geet

पूजन के बेरिया (Pujan Ke Beriya) - Pawan Singh Chhath Geet - Bhaktilok

83 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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चैत्य पर्व का अद्भुत गीत: पूजन के बेरिया

इस भक्ति गीत में देवताओं की आह्वान और आभार व्यक्त किया गया है, जिससे आंतरिक सच्चाई का अनुभव होता है।

पूजन के बेरिया (उगी ना आदित देव भोर) उगी ना आदित देव भोर, आयी चन्दा मं चलि जायीं, आयी चन्दा मं चलि जायीं, पुरी के सरे बेत्रा भोर, उगी ना आदित देव भोर। है भाग्य से, भाग्य से, सुनके आना है भाग्य से, भाग्य से, सुनके आना। (दिन में त्यौहार मनायें) (दिन में त्यौहार मनायें)। उगी ना आदित देव भोर। (दिया जलावे शुरू जनता) उगी ना आदित देव भोर, आयी चन्दा मं चलि जायीं, पुरी के सरे बेत्रा भोर, उगी ना आदित देव भोर। है भाग्य से, भाग्य से, सुनके आना, (दिन में त्यौहार मनायें) है भाग्य से, भाग्य से, सुनके आना। (दिन में त्यौहार मनायें)

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

भजन 'पूजन के बेरिया' का मुख्य विषय पूजा और भक्ति का भाव है। इसकी पंक्तियाँ 'उगी ना आदित देव भोर' और 'आयी चन्दा मं चलि जायीं' इस बात को दर्शाती हैं कि भक्त जब पूजा करते हैं, वे सूरज और चाँद की रोशनी में अपने हृदय की पवित्रता और उनकी उपस्थिति का अनुभव करते हैं। यह एक प्रतीक है कि जब दिन की नई सुबह होती है, तब हर नई संभावनाएँ सामने आती हैं। इसलिए, इस भक्ति गीत में उठने वाली दिल से श्रद्धा और भक्तियोग की स्थिति को दर्शाया गया है। यहां भक्त सच्चे मन से प्रार्थना करते हैं और दिव्य आशीर्वाद की अपेक्षा करते हैं।

इस गीत में भावनात्मक गहराई का एक अलग स्तर देखने को मिलता है, जब भक्त अपनी दैनिक पूजा में चाँद और सूर्य को न केवल देखता है, बल्कि उनकी दिव्यता से भरा ऊर्जा भी ग्रहण करता है। इन आकाशीय वस्तुओं को केवल एक सामान्य दृष्टि से नहीं, बल्कि एक अध्यात्मिक दृष्टि से देखना आवश्यक है। भक्त का आस्था से भरा हृदय, जब इन तत्वों के साथ संयोजित होता है, तो एक अतुलनीय शांति और संतोष की भावना को जन्म देता है। इस प्रकार, गीत के श्रोताओं को प्रोत्साहित किया जाता है कि वे पूजा के इस वास्तविक जगत में धारा प्रवाहित करें।

इस भजन का शास्त्रीय दृष्टिकोण से गहरा रहस्य है। भक्ति मार्ग में व्यक्ति अपने ईश्वर की ओर धीरे-धीरे बढ़ता है। 'पूजन के बेरिया' भक्ति की उस भावना का प्रतीक है जिसमें हम अपने जीवन की विपत्तियों को चुपचाप स्वीकार करते हैं और उन्हें ईश्वर के चरणों में डालकर अपने हृदय को हल्का महसूस करते हैं। जब हम sincerely प्रार्थना करते हैं, तब वह हमारे भीतर एक ऊर्जा उत्पन्न करता है, जिससे न केवल हमारी आत्मा को शक्ति मिलती है, बल्कि मानसिक और शारीरिक रूप से भी हमें ऊर्जान्वित किया जाता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

भगवती उपासना के अनुष्ठान में, ये भजन एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। इसे पौराणिक काल में सृष्टि के आरंभ से जोड़ा जाता है, जहाँ नवरात्रि के दिनों में देवी पूजा का महत्व है। भारत में, खासकर बिहार और पूर्वोत्तर भागों में छठ पूजा को अत्यधिक श्रद्धा से मनाया जाता है। छठ देवी सूर्य को भगवान मानते हैं और इस अवसर पर सूर्योदय और सूर्यास्त का पूजा का महत्वपूर्ण महत्व होता है। यह गीत सूर्योदय की महत्ता की भावना को व्यक्त करता है और बताता है कि कैसे सूर्य की रोशनी जीवन में नई आशा लाती है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का जप करने से मानसिक तनाव को कम करने में मदद मिलती है। नियमित रूप से गाने या सुनने से आत्मिक संतुलन और शांति की अनुभूति होती है, जो व्यक्ति को भक्ति के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। साथ ही, इसे एक साधना के रूप में अपनाना कई प्रकार की चिंता और तनाव को दूर करने में लाभकारी सिद्ध होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जप प्रातःकाल सूर्योदय के समय करना श्रेष्ठ माना जाता है। पूजा के दौरान स्वच्छता का ध्यान रखें और एक दीया जलाएं। अपने मन को शुद्ध करें और ध्यान लगाएं ताकि आप भगवान के प्रति समर्पित हो सकें। इस समय का धार्मिक महत्व अधिक होता है, जिससे भक्ति और समर्पण की भावना अच्छे से प्रकट होती है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

छठ पूजा में इस भजन का क्या महत्व है?

इस भजन का छठ पूजा में विशेष महत्व है क्योंकि यह सूर्य की उपासना का अभिव्यक्तिकरण है, जो भक्तों को प्रकाश और ऊर्जा प्रदान करता है।

इस भजन का पाठ कैसे करना चाहिए?

इस भजन का पाठ सुबह सूर्योदय के समय करना चाहिए, जब वातावरण शांत और सुखद हो और मन में पूर्ण श्रद्धा हो।

क्या इस भजन से शारीरिक स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ता है?

हाँ, इस भजन का नियमित पाठ करने से मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार आता है, जिससे बहुत सी बीमारियों से दूर रहने में मदद मिलती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 21 Aug 2026

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