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Punjabi Devi Bhajan

रख लाज मेरी महारानी (Rakh Laaj Mere Maharani) - Mata Bhajan Devi Geet - BHaktilok

66 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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माँ दुर्गा की कृपा कथा: रख लाज मेरी महारानी

इस भजन के माध्यम से माँ दुर्गा से आशीर्वाद की प्रार्थना करें, हर संकट से मुक्ति प्राप्त करें।

रख लाज मेरी महारानी, रहुँ मैं तेरी शरण। तू है दीन-दुखियों की, सबकी तुहार रानी। माँ, तिरछी नजर से देखो, तेरा दीदार करने को। तेरे दर पर आकर, करूँ मैं मस्तक झुकाने। तेरे चरणों की धूल लूँ, हर ग़म भूल जाऊँ। कितनों ने तुझको चाहा, सच्चा चैन पाए। तू है साक्षात् भाग्य की देवी, लाज मेरी रख लेना। हर मोड़ पर मुझे तू समो, हर बात में तेरा असर। तेरे बिन मैं तन्हा हूँ, तू बिन सारा ग़म। तेरा ही नाम लूँ मस्तक झुकाकर। मेरे हर दिल की तड़प, सजीव हो जाए। तेरे दर से घीरे मैं, मिट जाए हर दु:ख। कृपा की नजर तेरी हो, संकट भंजन हो। माँ, सुख-समृद्धि बरसाए, हर मुश्किल दूर हो। सोने सा मन तेरा, सुख की छाँव में समाए। आओ माँ, मेरे दुख को, तेरा रस भिगो दे। तेरे बिना मैं अधूरा, तू है सब कुछ महकते। दुख में तेरा साथ हो, सुख में तेरा साद हो। जय जय माँ भगवती, तेरा ही गुणगान।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन में माँ देवी से शरण की भावना प्रकट की गई है। 'रख लाज मेरी महारानी' शब्दों से लगता है कि भजन गायक माँ से अपनी लाज बचाने के लिए प्रार्थना कर रहा है। यह भावना विशेष रूप से तब होती है जब मनुष्य अपने जीवन में कठिनाइयों और विपत्तियों का सामना कर रहा होता है। माँ को 'दीन-दुखियों की रानी' कहा गया है, जो यह दर्शाता है कि हर भक्त की दुखों को समझने वाली और उनकी सहायता करने वाली देवी हैं। इस भजन में स्पष्ट रूप से भक्ति का उच्चतम रूप प्रकट हुआ है, जहाँ भक्त अपनी समस्त चिंताओं को माँ के चरणों में अर्पित करते हैं।

इस भजन में भक्त ने अपनी निर्बलता एवं मन की विकलता का उल्लेख किया है। 'तेरे दर पर आकर, करूँ मैं मस्तक झुकाने' के द्वारा भक्त यह बता रहा है कि माँ के चरणों में झुकना उसकी आत्मिक शांति और सुरक्षा का साधन है। वह अपने सभी दुखों को बिसरा कर माँ की शरण में समर्पित हो जाना चाहता है। यहाँ 'धूल लूँ, हर ग़म भूल जाऊँ' का भावार्थ यह है कि माँ की कृपा से सभी दुखों का नाश हो सकता है, इसीलिए वे माँ से कृपा की प्रार्थना कर रहे हैं। भक्त की करुणा और गहरी आस्था इस भजन में बखूबी झलकती है।

इस भजन के प्रति भक्ति मार्ग का अनुसरण करने वाले भक्त की निष्ठा और श्रद्धा प्रदर्शित होती है। देवी को 'भाग्य की देवी' कहकर भक्त उनसे अपने जीवन में सुख-समृद्धि की कामना कर रहा है। 'कृपा की नजर तेरी हो, संकट भंजन हो' का अर्थ है कि देवी का ध्यान भक्त पर होना चाहिए, ताकि सभी दुःख और संकट दूर हो सकें। क्रियाकलापों में देवी का नाम लेना और उनके प्रति श्रृद्धा व्यक्त करना भक्ति मार्ग का मुख्य उद्देश्य है। माँ दुर्गा का गुणगान करने से भक्त को मानसिक और आध्यात्मिक बल मिलता है, जिससे वह जीवन का सामना कर सकें।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन विशेषतः माँ दुर्गा की किंवदंतियों से संबंधित है, जिसमें उनके विभिन्न रूपों की आराधना होती है। माँ दुर्गा को शक्ति, साहस और विजय की देवी माना जाता है। उन्हें 'दुर्गा' नाम से भी पूजते हैं, जो 'कठिनाईयों' का नाशक रूप है। देवी भागवत और अन्य पुराणों में उनके महात्म्य का विस्तार से उल्लेख मिलती है। माँ दुर्गा की आराधना इस भजन के माध्यम से भक्तों को संकटों से मुक्ति और भक्ति मार्ग में आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।

मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें। इस भजन का जाप करने से मानसिक शांति, सकारात्मकता, और आध्यात्मिक अनुभव प्रकट होते हैं। निरंतर भजन करने वाले भक्त अपने जीवन में सुख-समृद्धि का अनुभव करते हैं। यह प्रार्थना संकटों से मुक्ति दिलाने और मानसिक मंथन को सरल बनाने में भी सहायक होती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का अनुभव करने का उत्तम समय प्रात: काल या संध्या काल है। भक्तों को चाहिए कि वे इस समय एक दिव्य दीप जलाएं और माँ दुर्गा की तस्वीर या मूर्ति के सामने बैठें। भजन गाते समय मन को शुद्ध और समर्पण में लगाएं। हाथों में पुष्प रखकर उन्हें माँ के चरणों में समर्पित करना चाहिए।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?

इस भजन का मुख्य संदेश माँ दुर्गा से शरण की भावना को व्यक्त करना है, जिसमें भक्त अपनी कठिनाइयों में माँ से सहायता की प्रार्थना करता है।

भजन गाने के लाभ क्या हैं?

भजन गाने से मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा, और दिव्य कृपा की अनुभूति होती है, जो भक्त की आस्था को मजबूत करती है।

भजन का सही समय कब है?

इस भजन का जाप प्रात: काल या शाम के समय करना श्रेष्ठ होता है, जब मन शांत होता है और ध्यान केंद्रित करने की स्थिति में होते हैं।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 01 Sep 2026

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