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Chhath Puja Geet

रोवेले बांझिनिया (Rowele Banjhiniya) - Pooja Nayak Chhath Song Chhath Puja Geet - Bhaktilok

57 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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छठ पूजा में माँ गंगा की आराधना

इस भजन में माँ गंगा और छठ माता की आरती गाई जाती है, जो भक्ति में लिपटी है।

रोवेले बांझिनिया, रोवेले बांझिनिया, रोवेले बांझिनिया, रोवेले बांझिनिया, रोवेले बांझिनिया। मुरारी मुरारी हमको जोड़ा। हंसता फंसता, स्वर्गित सुहाता। को छोड़ कर जोती। हंसता फंसता, स्वर्गित सुहाता। रोवेले बांझिनिया, रोवेले बांझिनिया। कहां है जोड़ी, कहां है जोड़ी। क्षण भर को जोड़ी आज। कहां है जोड़ी, कहां है जोड़ी। क्षण भर जोड़ी। रोवेले बांझिनिया, रोवेले बांझिनिया। देख मोहिनी, देख मोहिनी। देख मोहिनी का जोड़ा। खोले बुरा जोड़ी। खोले बुरा जोड़ी। रोवेले बांझिनिया, रोवेले बांझिनिया।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन 'रोवेले बांझिनिया' में नारी की भावनाओं को प्रकट किया गया है, जो संतानोत्पत्ति की लालसा रखती हैं। जब एक बांझिन का दिल रोता है, तो वह संतान के आनंद की कामना करती है। यह भजन मानव जीवन के गहनतम भावनाओं को बयां करता है, जैसे मातृत्व की चाहत। मुरारी का उल्लेख इसलिए किया जाता है कि वह उन सभी का उद्धार करने वाला है, जो दुखी हैं। भजन में कहा गया है कि जिनके पास संतान नहीं है, उनकी भावनाओं का ख्याल रखा जाए। इसे सुनकर एक पवित्र वातावरण का निर्माण होता है, जिससे भक्ति और श्रद्धा की अनुभूति होती है।

भावार्थ के लिहाज से, यह भजन न केवल मातृत्व की अभिलाषा को दर्शाता है, बल्कि समाज में महिलाओं की स्थिति पर भी प्रकाश डालता है। जब नारी करुणा से रोती है, तो उसका आर्त स्वर समाज की संवेदना को जागृत करता है। वह न केवल अपनी बर्बादी के दर्द को, बल्कि समाज के अनुपयुक्तता को भी महसूस करती है। यह भजन एक प्रकार से विपत्ति में धैर्य और समर्थन हेतु प्रार्थना करता है। मातृशक्ति की आराधना करते समय, यह हमारे भीतर की संवेदनशीलता को भी उजागर करता है।

इस भजन में भक्ति मार्ग का जो निहितार्थ है, वह प्रार्थना और समर्पण है। भक्ति मार्ग में प्रेम और भक्ति के साथ भगवान की स्तुति की जाती है। भजन में देवी का उल्लेख हमें यह याद दिलाता है कि शुद्ध मन और भावनाएँ भक्ति में कितनी महत्वपूर्ण होती हैं। इस भजन के माध्यम से, भक्त अपनी अंतरात्मा की गहराई में जाकर अपने दुःख-दर्द को भगवान के सामने रखते हैं। इससे न केवल व्यक्तिगत मुक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है, बल्कि समाज में सहानुभूति और एकता का भी विकास होता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का शास्त्रीय और पौराणिक महत्व है। छठ पूजा का संबंध सूर्य देवता और माँ गंगा की पूजा से है। कथा के अनुसार, सूर्य देवता ने अपने भक्तों को संतान की प्राप्ति की इच्छा पूरी की है। इस भजन में संतान प्राप्ति की भावना को विविध तत्वों के माध्यम से दर्शाया गया है, जिसमें मानस पूजा और नारी का भावनात्मक पहलू शामिल है। यह भक्ति पद्धति हमें सीख देती है कि हमेशा सकारात्मक होकर अपने दुःखों का सामना करना चाहिए। पीढ़ियों से यह भजन माताओं द्वारा गाया जाता है जिसमें संतान सुख की कामना की जाती है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का उच्चारण मानसिक शांति, आत्मिक बल और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने में सहायक होता है। जो लोग इसे श्रद्धा पूर्वक गाते हैं, उन्हें संतान सुख की प्राप्ति, जीवन में सुख-शांति, और आत्मिक बल मिलता है। यह भजन व्यक्ति को मानसिक रूप से सशक्त बनाता है, जिससे वह अपने दुख-दर्द को सहन कर सकें।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का गायन सुबह या शाम के समय करना उत्तम होता है। गायन करते समय एक दीया जलाना चाहिए और माता-पिता या गुरु का स्मरण करना चाहिए। भक्त को तत्परता, शांति और समर्पण के भाव में होना चाहिए। इसी समर्पण के द्वारा भक्ति का सार्थक अनुभव प्राप्त होता है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

क्या इस भजन का विशेष महत्व है?

इस भजन का विशेष महत्व छठ पूजा के दौरान होता है, जहां भक्त संतान सुख की कामना करते हैं। यह भावना मातृत्व की गहराई और समाज के लिए नारी की स्थिति को दर्शाती है।

इस भजन का उच्चारण किस समय करना चाहिए?

इस भजन का उच्चारण सुबह और शाम के समय करना उचित माना जाता है। खास करके छठ पूजा के अवसर पर, इसका महत्व विशेष हो जाता है।

क्या यह भजन केवल महिलाओं के लिए है?

हालांकि यह भजन महिलाओं के भावनात्मक परिपेक्ष्य से संबंधित है, लेकिन इसे सभी भक्त गा सकते हैं। पुरुष भी इसे भक्ति भाव से गाकर संतान सुख की कामना कर सकते हैं।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 30 Aug 2026

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