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गह गह करेला माई के अंगनवा ( Gah Gah Kare Lagal Mai Ke Mandiriya ) - Devigeet Birbal lal Yadav - Bhaktilok

45 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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माँ की आराधना: गह गह करेला माई के अंगनवा

माँ का भक्ति गीत, जो भक्तों के मन में आस्था और प्रेम का संचार करता है।

गह गह करेला माई के अंगनवा, गह गह करेला माई के अंगनवा। गोदी में ले लो माई, गोदी में ले लो माई। भैरव के दर पर जाके, सब दुख दूर हो जाएं। गह गह करेला माई के अंगनवा। आंसू बहा के कहे भैया, माई लाए कब औ माई लाए कब। माई के अंगनवा में, सब कुछ है माई के अंगनवा में। गह गह करेला माई के अंगनवा।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन 'गह गह करेला माई के अंगनवा' में भक्तिपूर्ण निवेदन किया गया है कि माई के दर पर जाकर सभी दुखों का निवारण होता है। इसके बोल ये दर्शाते हैं कि माँ के दर पर पहुंचते ही भक्तों के समस्त संकट समाप्त हो जाते हैं। 'गोदी में ले लो माई' की पुकार में, एक अद्भुत स्नेह और विश्वास का अनुभव होता है, जो भक्तों को माँ के प्रति उनकी अनंत भक्ति की ओर प्रेरित करता है। यहाँ माँ को केवल एक देवी के रूप में नहीं, बल्कि एक संरक्षक और प्रेमिका के रूप में भी दर्शाया गया है। यह भजन न केवल भक्ति को उजागर करता है, बल्कि भक्तों के मन की गहराई में बसे अनुराग को भी व्यक्त करता है।

भजन के बोलों में, 'आंसू बहा के कहे भैया' का भाव यह दर्शाता है कि भक्त अपने दुःख और समस्याओं को माई के सामने रखता है। यह एक भावनात्मक निर्बाधता में प्रवेश करने का संकेत है, जहाँ भक्त अपनी पीड़ा को माँ के चरणों में समर्पित करता है। यह भावना वास्तव में भक्त की शुद्धता को दर्शाती है, जो पूरी श्रद्धा से माँ की गोद में विश्राम पाना चाहता है। यह भजन उन सभी भक्तों के लिए प्रेरणा है, जो कठिनाइयों में हैं और जिनकी माँ पर अनुपम आस्था है।

भक्ति मार्ग का यह भावार्थ दर्शाता है कि माँ की कृपा प्राप्त करने के लिए निरंतर साधना व्यावारिक है। यह भजन हमें यह सिखाता है कि भक्ति केवल माँ की पूजा करने का एक व्यवहार नहीं है, बल्कि यह एक व्यक्तिगत संबंध है जो प्रेम और विश्वास पर आधारित है। भक्त का माँ के प्रति यह अनुपम तथा निर्दोष प्रेम, पारिवारिक भावनाओं एवं सांस्कृतिक जड़ों को पुनर्जीवित करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का उल्लेख भक्तिपूर्ण परंपराओं में विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। देवी पूजा में, माँ को सृष्टि का स्रोत और पालनहार माना जाता है। उपनिषद और पुराणों में देवी की अनुकंपा को माँ के रूप में चित्रित किया गया है, जो भक्तों को संकट से उद्धारित करती हैं। विशेष रूप से माता दुर्गा, काली और सरस्वती की उपासना में, इस भजन का महत्व एक नए संजीवनी रूप में देखा जाता है।

मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें। इस भजन का नियमित श्रवण मन को शांति और संतुलन प्रदान करता है। यह ना सिर्फ मानसिक तनाव को कम करता है, बल्कि आत्मिक जागरूकता को भी बढ़ाता है। भक्ति में लयबद्धता से प्रार्थना करते समय, व्यक्ति के समस्त संदेह और असुरक्षा समाप्त हो जाते हैं।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का पाठ प्रात:काल या संध्या के समय करना उत्तम होता है। एक दीपक जलाना और माँ को फूल या मिठाई का भोग अर्पित करना चाहिए। सुखद और शांत वातावरण में, ध्यानस्थ होकर गहरे मनोबल से भजन का गायन करना चाहिए।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

गह गह करेला माई के अंगनवा भजन का क्या महत्व है?

यह भजन माँ के प्रति अपार प्रेम और भक्ति को दर्शाता है, जो भक्तों के जीवन में सुख एवं शांति लाने में सहायक होता है।

इस भजन को गाने का सही समय क्या है?

भजन का पाठ प्रात: या संध्या के समय करना लाभदायक होता है, जब भक्त मन और आत्मा को शुद्ध करता है।

किस देवी की पूजा में इस भजन का उपयोग होता है?

यह भजन देवी और माँ के विभिन्न स्वरूपों की आराधना में गया जाता है, विशेषकर माता दुर्गा और काली की।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 31 Aug 2026

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