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गुरूजी तेरे भरोसे मेरा परिवार है लिरिक्स भजन ( Guruji Tere Bharose Mera Parivar Hai Lyrics in hindi ) Guru Ji Bhajan - BhaktiLok

57 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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गुरूजी: भरोसा और परिवार का संबल

इस भजन के माध्यम से गुरुजी के प्रति हमारी श्रद्धा और परिवार के सुरक्षा की भावना व्यक्त होती है।

गुरूजी तेरे भरोसे मेरा परिवार है गुरु जी तेरे भरोसे मेरा परिवार है तेरा नाम जपे ये संसार है तेरा नाम जपे ये संसार है गुरु जी तेरे भरोसे मेरा परिवार है तेरा नाम जपे ये संसार है तेरा नाम जपे ये संसार है गुरु जी तेरे भरोसे मेरा परिवार है

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मुख्य विषय गुरुजी के प्रति अपार श्रद्धा और विश्वास प्रकट करना है। 'गुरूजी तेरे भरोसे मेरा परिवार है' इस पंक्ति से पता चलता है कि भक्त अपने परिवार की सुरक्षा और कल्याण के लिए गुरुजी के आश्रय में है। यह भाव दर्शाता है कि जब व्यक्ति किसी सच्चे गुरु के मार्गदर्शन में होता है, तो उसके परिवार के सदस्यों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होती है। इस भजन में, भक्त भगवान से प्रार्थना कर रहा है कि हर प्रकार की कठिनाई में वे गुरुजी का नाम जपते हैं, जिससे उन्हें शक्ति और साहस प्राप्त होता है। गुरुजी का नाम जपने से भौतिक और आध्यात्मिक दोनों प्रकार की सहायता मिलने की आशा की जाती है।

भजन की भावनात्मक गहराई में देखा जाए तो यह दर्शाता है कि भक्त अपने गुरु में कितनी गहरी आस्था रखता है। 'तेरा नाम जपे ये संसार है' इस पंक्ति से यह जेनरेट होता है कि जब संसार के सभी लोग गुरु के नाम का जाप करते हैं, तो वे ना सिर्फ अपने लिए, बल्कि समाज और परिवार के लिए एक सुरक्षा कवच का निर्माण करते हैं। हर व्यक्ति के लिए यह अत्यंत आवश्यक है कि वह अपने जीवन में गुरु की कृपा को अनुभव करे, ताकि उसे अपने परिवार का सद्भाव और शांति मिल सके। यह भजन एक प्रकार की सामूहिक पूजा या भक्ति का संकेत है, जो एक परिवार को मजबूत बनाता है।

इस भजन में भक्ति मार्ग की मर्म को स्पष्ट किया गया है। गुरु का स्थान हिंदू धर्म में बहुत ऊँचा है। वे न केवल ज्ञान के दाता होते हैं, बल्कि जीवन में राह दिखाने वाले भी होते हैं। गुरु के प्रति भक्ति का यह भाव, व्यक्ति को आत्मा की गहराई तक ले जाने में सहायक होता है। ऐसे में जब भक्त कहता है कि 'गुरु जी तेरे भरोसे' है, तो यह एक आंतरिक सच्चाई भी है कि गुरु के बिना जीवन की कठिनाइयों का सामना करना मुश्किल हो जाता है। यह भक्ति, ज्ञान के रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित करती है और जीवन के हर क्षेत्र में सफलता दिलाने का मार्ग प्रशस्त करती है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का महत्व केवल आध्यात्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक भी है। यह भक्ति गीत हमें स्मरण कराता है कि हमारे परिवार का कल्याण गुरु की कृपा पर निर्भर करता है। हिंदू धर्म की प्राचीन ग्रंथों, जैसे पुराणों में गुरु का वर्णन विशेष महत्व के साथ किया गया है। गुरु गीता, महाभारत और उपनिषदों में भी गुरु के महत्व को बताया गया है। इसलिए, यह भजन न केवल व्यक्तिगत भक्ति का मार्ग है, बल्कि समाज के लिए भी एक प्रेरणा का स्रोत है। यह भजन एक सामूहिक अनुष्ठान के रूप में भी लिया जा सकता है, जहाँ एकत्रित लोग गुरु की कृपा से एक साथ मिलकर अपने परिवार के लिए प्रार्थना करते हैं।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का जाप मानसिक शांति और स्थिरता प्रदान करता है। यह ध्यान की गहराइयों में ले जाने में मदद करता है, जिससे तनाव और नकारात्मकता से मुक्ति मिलती है। नियमित रूप से इस भजन का जाप करने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जो परिवार members के बीच प्रेम और सद्भाव को और बढ़ाता है। यह भक्ति भाव के साथ किया गया जाप, व्यक्ति को आत्मिक संतोष भी प्रदान करता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जाप सुबह के समय या संध्या के समय अच्छा रहता है। भजन का जाप करते समय एक शांत स्थान पर बैठना चाहिए। दीपक जलाना और पुष्प अर्पण करना इस भजन की साधना का हिस्सा होना चाहिए। सही मानसिकता से, गुरु के प्रति आभार व्यक्त करते हुए ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन को कौन सा समय सुनना सबसे अच्छा है?

इस भजन का जाप सुबह या संध्या के समय करना सबसे शुभ माना जाता है, क्योंकि यह समय शांति और ध्यान के लिए उचित होता है।

क्या इस भजन का जाप करने से परिवार में सौहार्द बढ़ेगा?

हां, इस भजन का जाप करने से परिवार में प्रेम और समझ बढ़ती है। भक्त की भक्ति से परिवार का कल्याण भी होता है।

क्या इस भजन के साथ कोई विशेष पूजा विधि है?

इस भजन के साथ दीप जलाना और पुष्प अर्पण करना विशेष रूप से शुभ होता है। इसके साथ ध्यान और मनन भी करना चाहिए।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 03 Sep 2026

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