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हारे का साथी श्याम लिरिक्स ( Haare Ka Saathi Shyam Lyrics in Hindi ) - Upasana Mehta Shyam Bhajan - Bhaktilok

82 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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श्याम: भक्तों का अनुग्रहदाता

इस भजन में श्याम से हार चुके भक्तों की पुकार है, जो अनंत प्रेम और सहारा मांगते हैं।

 हारे का साथी श्याम लिरिक्स ( Haare Ka Saathi Shyam Lyrics in Hindi )-हारे का साथी तो, तू श्याम कहाता है,हार गया हूँ मैं भी बाबा क्यूँ ना आता है।भूल गया तू कृपा करनाभक्तो का अपने ख्याल तू रखनामुझपे आई है अब ये मुसीबतमुझको है तेरी बड़ी ही जरूरतआजा ना अब तो तू क्यूं देर लगाता हैहार गया हूँ......लाज बचाना दस्तूर तेरादेखो है मजबूर  दास ये तेरामेरा नहीं है अब कोई सहाराभटक रहा हुँ मैं मारा माराआजा ना अब  तो  तू क्यूँ खेल रचाता हैहार गया हूँ.......बहुत हो गया है बाबा अब सम्भालोनाम की अपने लाज बचालोसूझता नहीं है अब कोई चाराआज विपिन ने तुझको पुकाराआजा ना अब तो क्यूँ तू चैन चुराता हैहार गया हूँ.......

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन 'हारे का साथी श्याम' में श्री कृष्ण की अनुकंपा और भक्त की पीड़ा को दर्शाया गया है। पहले दो पंक्तियों में, भक्त श्याम से अपनी हार की बात कर रहा है और कहता है 'हार गया हूँ मैं', जिससे उसकी निराशा और संकट का स्पष्ट संकेत मिलता है। यहाँ श्याम का नाम एक साथी के रूप में संदर्भित किया गया है, जो भक्त की संकट में सहायता करता है। भक्त की यह भावना होती है कि कृष्ण की कृपा के बिना वह असहाय हैं, और अपनी भावना प्रकट करते हुए वह 'क्यूँ ना आता है' कहकर श्याम से मदद मांगते हैं। पूरी भावनात्मक गहराई से भरे इस भजन में, भक्त कृपा के लिए बार-बार पुकारते हैं और अंत में अपनी लाज बचाने का अनुरोध करते हैं। यह भजन मानवता के संकटों को समझने और उन पर विजय पाने के लिए भक्ति मार्ग का एक उत्तम उदाहरण है।

इस भजन की भावार्थ में भक्त का आह्वान है, जिसमें वह अपने कष्टों और मुसीबतों को स्वरूप देता है। भक्त कहता है कि 'भूल गया तू कृपा करना', इस पंक्ति में भक्त श्याम की कृपा के बिना अपने जीवन को अधूरा मानता है। उसकी भावनाएँ ऐसी हैं कि वह अपनी लाज की रक्षा के लिए श्याम से याचना कर रहा है, जिससे यह दर्शाता है कि उसने सच्चे हृदय से श्याम को अपने संकट का साथी माना है। साथ ही, वह उल्लेख करता है कि 'अब कोई सहारा नहीं', जो व्यक्ति की अकेलेपन और मन की भयभीत स्थिति को उजागर करता है। भक्त में श्याम की शक्ति के प्रति गहरी श्रध्दा है, जो उसे अनंत प्रेम और करुणा के साथ जोड़ता है।

इस भजन का एक कोर धार्मिक तत्व भक्ति का मार्ग है, जो प्रेम, अर्पण तथा समर्पण का प्रदर्शन करता है। भक्ति में निष्ठा और विश्वास होना आवश्यक होता है, जो इस भजन में स्पष्ट दिखाई देता है। भक्त अपने जीवन की हर उलझन, संकट और कठिनाई को श्याम पर छोड़ने की बात कर रहा है, जिसमें 'आजा ना अब तो तू क्यूं देर लगाता है' पंक्ति संदेह और आशा के मिश्रण को दर्शाती है। भगवति का साक्षात्कार करने के लिए भक्त का अंदरूनी संघर्ष इस भजन के माध्यम से स्पष्ट होता है। यह भजन दर्शाता है कि भक्ति एक साधना है, जहाँ भक्त अपने जीवन के हर पहलू को भक्ति के माध्यम से जीवन में समाहित करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का धार्मिक संदर्भ बताता है कि भक्तों के प्रार्थना में असीम शक्ति होती है। यह कृष्णजी को 'गोपाला' या 'श्याम' के नाम से पुकारता है, जो कि भक्तों के संकट के समय में सहायक होते हैं। महाभारत और पुराणों में, कृष्ण का निवास जीवन में सच्चे भक्तों के साथ होता है, और ऐसे भजनों में भक्त समाज के बीच कृष्ण की दिव्यता को पुनः अनुभव करते हैं। इसके माध्यम से भक्त को आश्वासन मिलता है कि संकट और पीड़ा के समय में भगवान हमेशा साथ हैं।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का श्रवण या गान करने से मानसिक शांति, आंतरिक स्फूर्ति, और आध्यात्मिक संतोष की प्राप्ति होती है। यह भक्ति साधना करने वालों को नकारात्मक विचारों से दूर रखती है और उन्हें सकारात्मकता की ओर अग्रसर करती है। इसके अलावा, यह भक्ति भावनाओं में गहराई लाने का कार्य करती है और भक्त को श्री कृष्ण की निकटता का अनुभव कराती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का उचित समय सुबह या शाम का होता है, जब शांति और ध्यान की स्थिति में सामान्यतः वातावरण होता है। भजन की साधना के समय एक दीपक जलाना, फूलों का भोग अर्पित करना और शांत मन का होना आवश्यक है। भक्त को ध्यान लगाकर, श्याम के श्री चरणों में अपने समस्त दुखों और मुसीबतों को अर्पित करना चाहिए।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

क्या इस भजन का विशेष मंत्र है?

इस भजन में श्याम, जो कि भगवान कृष्ण के एक स्वरूप हैं, की अनुकंपा से संबंधित अनेक मंत्र हैं, जो भक्ति भावना को जागृत करते हैं।

क्या यह भजन कष्ट के समय गाना चाहिए?

हाँ, जब भक्त किसी कठिनाई में होते हैं, तो इस भजन का गान करने से मन की शांति और सुख की प्राप्ति होती है।

क्या इस भजन को सामूहिक रूप से गाना चाहिए?

जी हाँ, इस भजन को सामूहिक रूप से गाने से सामूहिक भक्ति का अनुभव होता है और सामूहिक ऊर्जा का संचार होता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 02 Sep 2026

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