रहिमन चुप हो बैठिए (Rahiman Chup Ho Baithiye Lyrics in Hindi) - कबीर के दोहे Nitin Mukesh Kabir Amritwani - Bhaktilok
रहिमन चुप हो बैठिये
Rahiman Chup Ho Baithiye
देख दिनन के फेर
Dekh Dinan Ke Pher
रहिमन चुप हो बैठिये
Rahiman Chup Ho Baithiye
देख दिनन के फेर
Dekh Dinan Ke Pher
जब निके दिन आयेंगे
Jab Nike Din Aayenge
बनत न लागे देर
Banat Na Laage Der
बनत न लागे देर
Banat Na Laage Der
रहिमन चुप हो बैठिये
Rahiman Chup Ho Baithiye
देख दिनन के फेर
Dekh Dinan Ke Pher
कबीरा खड़ा बज़ार में
Kabira Khada Bazaar Mein
सबकी मांगै खैर
Sabki Mangai Khair
ना काहू से दोस्ती
Na Kaahu Se Dosti
ना काहू से बैर
Na Kaahu Se Bair
ना काहू से बैर
Na Kaahu Se Bair
रहिमन चुप हो बैठिये
Rahiman Chup Ho Baithiye
देख दिनन के फेर
Dekh Dinan Ke Pher
चलती चाकी देखि के
Chalti Chaki Dekhi Ke
दिया कबीरा रोय
Diya Kabira Roy
दिया कबीरा रोय
Diya Kabira Roy
दो पाटन के बीच में
Do Paatan Ke Beech Mein
साबित बचा ना कोय
Saabit Bacha Na Koy
साबित बचा ना कोय
Saabit Bacha Na Koy
रहिमन चुप हो बैठिये
Rahiman Chup Ho Baithiye
देख दिनन के फेर
Dekh Dinan Ke Pher
गुरु गोबिंद दोनों खड़े
Guru Gobind Dono Khade
काके लागू पाय
Kake Laagu Pay
गुरु गोबिंद दोनों खड़े
Guru Gobind Dono Khade
काके लागू पाय
Kake Laagu Pay
बलिहारी गुरु आपने
Balihari Guru Aapne
गोबिंद दियो दिखाय
Gobind Diyo Dikhay
गोबिंद दियो दिखाय
Gobind Diyo Dikhay
रहिमन चुप हो बैठिये
Rahiman Chup Ho Baithiye
देख दिनन के फेर
Dekh Dinan Ke Pher
🙏 भजन का विस्तृत अर्थ और भावार्थ (Lyrics Meaning)
यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "रहिमन चुप हो बैठिए (Rahiman Chup Ho Baithiye Lyrics in Hindi) - कबीर के दोहे Nitin Mukesh Kabir Amritwani - Bhaktilok" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।
भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।
🔍 भजन का विशेष महत्त्व और आध्यात्मिक लाभ (Significance)
श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।
सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।
🕒 साधना एवं गायन विधि (Chanting Rules)
भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।
भजनों को गाने की सही विधि क्या है?
भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।
क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?
हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।
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