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कीर्तन कराऊँ ऐसा इतिहास बना दूंगा लिरिक्स भजन ( TU KRIPA KR BABA Lyrics in Hindi) - KANHIYA MITTAL Shree Bhajan - Bhaktilok

49 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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ईश्वर की कृपा से भक्ति का इतिहास

इस भजन के माध्यम से भक्ति और ईश्वर श्री कृष्ण की कृपा को स्मरण करें, जो जीवन को संजीवनी प्रदान करती है।

कीर्तन कराऊँ ऐसा इतिहास बना दूंगा लिरिक्स भजन ( TU KRIPA KR BABA Lyrics in Hindi) -किरपा कर बाबातू किरपा कर बाबाकीर्तन कराऊँगाकीर्तन कराऊँ ऐसाइतिहास बना दूँँगा।मैं भाई भतीजो केकुरते सिलवाउंगाऔर बहन बेटियों केगहने बनवाऊंगाइत्तर की खुशबु सेये घर महकाऊँगाकीर्तन कराऊँ ऐसाइतिहास बना दूँगा।मैं फूलों से बाबाश्रृंगार कराऊंगातेरे खातिर साँवरियाछप्पन भोग बनाऊंगामैं एक एक करकेहाथों से खिलाऊंगाकीर्तन कराऊँ ऐसाइतिहास बना दूँगा।मैंने जो पाया हैसब तुझसे पाया हैमैं जहाँ खड़ा हूँ आजप्रभु तेरी माया हैजग खुद पे लुटाता हैमैं तेरे खातिर लुटा दूंगाकीर्तन कराऊँ ऐसाइतिहास बना दूँगा।ऐसी किरपा करनातेरा कीर्तन कराता रहूँतेरे भजनो से बाबातुझको मैं रिझाता रहूंकन्हैया मित्तल कोकीर्तन में बुलाऊंगासब भजन प्रवाहकों कोकीर्तन में बुलाऊंगाकीर्तन कराऊँ ऐसाइतिहास बना दूँगा।।किरपा कर बाबातू किरपा कर बाबाकीर्तन कराऊँगाकीर्तन कराऊँ ऐसाइतिहास बना दूँगा।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मुख्य थीम ईश्वर की कृपा और उनके प्रति भक्ति का विस्तार करना है। गायक ने प्रार्थना में कहा है कि 'कीर्तन कराऊँ ऐसा इतिहास बना दूँगा', जिसका अर्थ है कि भक्ति के माध्यम से वे न केवल अपने जीवन का इतिहास बदलेंगे, बल्कि एक ऐसा वातावरण तैयार करेंगे जिसमें सभी के जीवन में सुख और समृद्धि का संचार होगा। 'मैं भाई भतीजों के लिए कपड़े सिलवाऊंगा और बहन बेटियों के गहने बनवाऊंगा', ये पंक्तियाँ मानवता के प्रति एक सत्कर्म का संकेत देती हैं, जहाँ भक्ति और दान का समर्पण भाव व्यक्त किया गया है। गायक खुद को साक्षी मानता है कि उन्होंने जो कुछ भी पाया है वह केवल प्रभु की कृपा से ही पाया है, और उन्होंने अपने समर्पण से जीने की प्रेरणा दी है।

भावार्थ में हम पाते हैं कि भजन के शब्द न केवल व्यक्तिगत भक्ति का उद्घाटन करते हैं, बल्कि सामूहिक भक्ति के महत्व को भी रेखांकित करते हैं। गायक का उद्देश्यों में परिवार के सभी सदस्यों को खुशहाल बनाने की भावनाएँ हैं, जो भक्ति के माध्यम से साकार होती हैं। 'उत्तर की खुशबू से ये घर महकाऊंगा' का अर्थ है कि भक्ति के साथ जुडी सकारात्मकता पूरे परिवार में फैलेगी, और यही भक्ति का असली अर्थ है। ईश्वर की आराधना और भक्ति का यह स्वरूप दर्शाता है कि पूजन केवल व्यक्तिगत उन्नति के लिए नहीं, बल्कि समस्त सृष्टि की भलाई के लिए किया जाना चाहिए।

इस भजन में भक्ति मार्ग के अनेक पहलुओं पर प्रकाश डाला गया है। एक भक्त का यह चयन कि 'जग खुद पे लुटाता है', दर्शाता है कि भगवान की भक्ति का फल केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि समाज के लिए शुभकारी है। गायक आशा करता है कि 'ऐसी कृपा कर,' ईश्वर उसे निरंतर भक्ति में संलग्न रखने का आशीर्वाद दें। भक्ति मार्ग केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानवता, करुणा, और सभी जीवों के प्रति जिम्मेदारी को दर्शाता है। अत: इस भजन के माध्यम से हम यह समझ सकते हैं कि भक्ति की शक्ति स्वयं में निहित है, और यह अनंत है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

भजन का महत्त्व भारतीय धार्मिक दृष्टिकोण में अत्यंत गहरा है। यह भक्ति की परंपरा का ही एक अभिन्न हिस्सा है, जो आदिकाल से चला आ रहा है। पुराणों में, विशेष रूप से भागवत पुराण में, भक्ति का यही स्वरूप प्रदर्शित होता है, जहाँ भक्तजन अपने प्रेम से ईश्वर के पास पहुँचते हैं। रामायण एवं महाभारत में भी ऐसे उदाहरण मिलते हैं, जहाँ भक्ति और पूजा के माध्यम से जीवों के लिए благदायक दिशाएँ उत्पन्न की गई हैं। यह भजन हमें सिखाता है कि यदि हम श्रद्धा से ईश्वर की आराधना करें, तो किसी भी संकट से उबर सकते हैं।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का जाप करने से मानसिक शांति प्राप्त होती है और आत्मा को संतोष मिलता है। भक्ति के द्वारा हम अपने जीवन को सकारात्मक दिशा में ले जा सकते हैं। नियमित रूप से इस भजन का कीर्तन करने से, भक्ति का अहसास बढ़ता है, जो मानसिक स्वास्थ्य को सुधारने में मदद करता है। इसे सुनना या गुनगुनाना हमारी आत्मिक उन्नति के लिए अत्यंत लाभदायक है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जप सुबह के समय, विशेषकर सूर्योदय के आस-पास करना अति शुभ माना जाता है। जब आप इसे गा रहे हों, तो एक साफ स्थान पर आसन लगाएं, और एक दीपक जलाएं, ताकि वातावरण में पवित्रता बनी रहे। ध्यान को केंद्रित करते हुए, मन में भक्ति और समर्पण का भाव लें। यह महत्वपूर्ण है कि आप अपने हृदय को पूरी तरह से ईश्वर की भक्ति में डुबो दें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का उद्देश्य क्या है?

इस भजन का उद्देश्य ईश्वर की कृपा को स्मरण करते हुए भक्ति का प्रसार करना और समाज के लिए सकारात्मक परिवर्तन लाना है।

कौन इस भजन को गाता है?

यह भजन प्रसिद्ध भजन गायक कन्हैया मित्तल द्वारा प्रस्तुत किया गया है, जो भक्ति संगीत के लिए जाने जाते हैं।

क्या इस भजन का कोई विशेष महत्व है?

इस भजन का महत्व तब और बढ़ जाता है जब हम इसे परिवार तथा समाज के कल्याण के लिए गाते हैं, जिससे सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 31 Aug 2026

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