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Krishna Bhajan

अरज मेरी सुन लो लिरिक्स भजन ( Araj Meri Sun Lo Lyrics in Hindi ) - Krishna Bhajan BRAJ SHARWARI - Bhaktilok

66 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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कृष्ण भक्ति का अनूठा भजन: अरज मेरी सुन लो

इस भजन के माध्यम से भगवान कृष्ण से प्रेम और स्नेह की अपील की गई है। श्रद्धा से गुनगुनाएँ।

अरज मेरी सुन लो, मेरा दिल है बेचैन। तुम्हारी प्रेम में, मैं हूँ व्याकुल और अशांत। आओ कृपा करके, मेरा दुःख मिटाओ। मेरे प्यारे कन्हैया, तुम मन को भाओ। तेरे चरणों में अर्पण, मेरा हर एक सांस। तेरा हो आशीर्वाद, मिले मुझे सुख और शांति। निर्मल मन के साथ, मैं प्रणाम करूँ। तेरी भक्ति में, हर दिन जियूँ। चले जब बादल घेर के, मैं देखूं तेरा रूप। जब भक्ति से गूँजता, मेरा हर एक स्वर। मेरी किलकारियों में, तेरा नाम हो अविराम। फुलों की तरह खिलता, प्रेम मेरा सच्चा बयाम। कभी ना छोडूँगी मैं, तेरा हाथ जो थामे। आओ सखा मेरे, मेरी अर्जी सुन लो। तेरे बिना सब अधूरा, मेरा मन तुमसे ही मिले। आकाश तक मेरा नाम हो, मेरी अरज सुन लो। पल पल तेरा स्मरण, करता रहूँ मैं सदा। आओ कृपा करके, मेरी रूठी मनसा।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मुख्य विषय भगवान कृशन से असीम प्रेम और भक्ति की अपील है। भजन की आरंभिक पंक्तियों में भक्त अपनी बेचैनी का तात्पर्य व्यक्त करते हैं और विनम्रता के साथ भगवान से प्रार्थना करते हैं। 'अरज मेरी सुन लो' पूरे गीत की धुरी है, जिसमें भक्त भावुकता से भगवान से उनकी दयालुता की अपील करता है। कृष्ण के प्रति प्रेम ने भक्त को इतना गहराई तक पहुंचाया है कि उसे हर पल भगवान की याद में डूबे रहने की दिशा में प्रेरणा मिलती है। भगवान कन्हैया से इस प्रार्थना में भक्त अपनी विद्यारंभिक से लेकर समाप्ति तक की जीवन यात्रा में साथ देने का अनुरोध करते हैं।

भजन की भावार्थ में भक्त का हृदय स्पष्ट रूप से झलकता है, जहां वह भगवान कृष्ण से यह निवेदन करता है कि उनके चरणों में अर्पण करता है और उनके आशीर्वाद की कामना करता है। 'तेरे चरणों में अर्पण, मेरा हर एक सांस' यह पंक्ति भक्त के श्रद्धा और समर्पण को दर्शाती है। भावनात्मक रूप से, यह गाना एक साधक के मन की गहराई में उतरता है, जिसमें संदेह, प्रेम, और भक्ति का एक अद्भुत मिश्रण देखने को मिलता है। निश्चित रूप से, यह शक्तिशाली भजन भक्तों को मानसिक शांति और आत्मिक संतोष का अनुभव कराता है।

कृष्ण भक्ति मार्ग के इस भजन में, भक्त अपनी अंतरात्मा की गहराई को व्यक्त करता है। 'तेरे बिना सब अधूरा' यह पंक्ति भक्ति मार्ग की सच्चाई को प्रतिध्वनित करती है, जिसमें भगवान कृष्ण को सर्वस्व मानते हुए भक्ति को सर्वोत्तम उपलब्धि माना जाता है। भक्त की भक्ति की गति और गहराई यह दर्शाती है कि जो व्यक्ति सच्ची भक्ति से दिक्कतों को पार करना चाहता है, उसे अपना सम्पूर्ण समर्पण भगवान के चरणों में अर्पित करना आवश्यक है। यह भजन भक्ति के ऐसे ट्रैक पर ले जाता है जहां साधक को केवल भगवान के प्रेम का अनुभव होता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का सांस्कृतिक और धार्मिक संदर्भ भारतीय पुराणों में गहरा है। कृष्ण का नाम अनेक पवित्र ग्रंथों, जैसे भागवत पुराण और महाभारत में विशेष रूप से लिया गया है। भक्तों का विश्वास है कि जब वे श्रद्धा से कृष्ण के नाम का जाप करते हैं, तो उनकी संस्कार और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं। इस प्रकार, यह भजन कृष्ण के प्रति भक्ति का वैभव भी प्रस्तुत करता है तथा मानता है कि उनके नाम में अत्यधिक शक्ति है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का जप करने से मानसिक तनाव में राहत मिलती है, और आत्मिक शांति का अनुभव होता है। नियमित रूप से इसे गाने से व्यक्ति के मन में प्रेम और भक्ति का संचार होता है, जो उसे नकारात्मकता से बचाते हुए सकारात्मकता की ओर अग्रसर करता है। इसके अतिरिक्त, यह भक्त को भगवान की कृपा की अनुभूति भी कराता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

अर्ज मेरी सुन लो भजन को प्रातः या संध्या के समय गाना उत्तम है। पूजा स्थल पर दीप जलाकर और तुलसी या फूल चढ़ाकर इस भजन का गायन करें। उचित विधि अनुसार, प्रेम और श्रद्धा के साथ इस भजन का पाठ करें, जिससे आत्मा में शांति और समर्पण का भाव जागृत हो सके।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?

इस भजन में मुख्य संदेश भगवान कृष्ण से प्रेम और भक्ति का अपील है, जिससे जीवन में शांति और संतोष की प्राप्ति होती है।

भजन का अर्थ क्या है?

भजन का अर्थ है 'मेरि अर्जी सुनना', जिसमें भक्त भगवान से विनम्रता से अपनी दुखों को खत्म करने की प्रार्थना करता है।

कब इस भजन का गायन करना चाहिए?

इस भजन का गायन प्रातः काल या संध्या समय करना लाभकारी होता है, जिससे दिनभर की चिंता और तनाव से मुक्ति मिलती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 22 Aug 2026

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