भला किसी का कर ना सको तो बुरा किसी का मत करना ( bhala kisi ka kar na sako to bura kisi ka na karna Lyrics in Hindi ) -
भला किसी का कर ना सको तो बुरा किसी का ना करना ।
पुष्प नहीं बन सकते तो तुम कांटे बन कर मत रहना ॥
बन ना सको भगवान् अगर कम से कम इंसान बनो ।
नहीं कभी शैतान बनो नहीं कभी हैवान बनो ॥
सदाचार अपना न सको तो पापों में पग ना धरना ।
पुष्प नहीं बन सकते तो तुम कांटे बन कर मत रहना ॥
सत्य वचन ना बोल सको तो झूठ कभी भी मत बोलो ।
मौन रहो तो ही अच्छा कम से कम विष ना घोलो ॥
बोलो यदि पहले तुम तोलो फिर मुंह को खोला करना ।
पुष्प नहीं बन सकते तो तुम कांटे बन कर मत रहना ॥
घर ना किसी का बसा सको तो झोपड़ियां ना जला देना ।
मरहम पट्टी कर ना सको तो खार नमक ना लगा देना ॥
दीपक बन कर जल ना सको तो अंधियारा ना फैला देना ।
पुष्प नहीं बन सकते तो तुम कांटे बन कर मत रहना ॥
अमृत पिला ना सके किसी को ज़हर पिलाते भी डरना
धीरज बंधा नहीं सको तो घाव किसी के मत करना ॥
राम नाम की माला ले कर सुबह श्याम भजन करना ।
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🙏 भजन का विस्तृत अर्थ और भावार्थ (Lyrics Meaning)
देवादिदेव महादेव को समर्पित यह भजन "भला किसी का कर ना सको तो बुरा किसी का मत करना ( bhala kisi ka kar na sako to bura kisi ka na karna Lyrics in Hindi ) - SHIV NIGAM - Bhaktilok" भगवान शिव के कल्याणकारी और वैराग्यपूर्ण रूप का सजीव चित्रण करता है। शिव का अर्थ ही कल्याण है। इस भजन के शब्दों के माध्यम से साधक शिव की अनंत चेतना, भस्म आरती, डमरू की ध्वनि और ध्यानमग्न मुद्रा का ध्यान करता है।
शिव भक्ति का मूल सिद्धांत यही है कि जगत की प्रत्येक नश्वर वस्तु का अंत शिव में ही होना है। यह भजन भक्त को सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठकर आत्मा के वास्तविक स्वरूप को पहचानने की प्रेरणा देता है। शिव का नाम पंचमहाभूतों को नियंत्रित करने वाली परम शक्ति का प्रतीक है।
🔍 भजन का विशेष महत्त्व और आध्यात्मिक लाभ (Significance)
शिव पुराण के अनुसार, भगवान शिव अत्यंत भोले हैं और साधारण जल तथा बेलपत्र अर्पण करने मात्र से भी प्रसन्न हो जाते हैं। इस शिव भजन का संकीर्तन करने से अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है और कुंडली के ग्रहों के दोष शांत होते हैं।
भगवान शिव की महिमा, लिंगोत्पत्ति और पवित्र तीर्थों के विवरण के लिए शिव पुराण का संपूर्ण अध्ययन करें। नियमित शिव भजन और पंचाक्षरी मंत्र (ॐ नमः शिवाय) के जप से तनाव का नाश होता, अवसाद दूर होता है और अंतर्मन में अपूर्व शांति का उदय होता है। यह आरोग्य और दीर्घायु प्रदान करने में भी सहायक है।
🕒 साधना एवं गायन विधि (Chanting Rules)
शिव संकीर्तन के लिए प्रदोष काल (संध्या समय) अथवा सोमवार का दिन सर्वोत्तम माना जाता है। उत्तर दिशा की ओर मुख करके कुशासन पर बैठकर शिवजी का ध्यान करते हुए भजन गाएं।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
भगवान शिव को शीघ्र प्रसन्न करने की सरल विधि क्या है?
शुद्ध जल, बेलपत्र, धतूरा अर्पित करते हुए श्रद्धापूर्वक शिव मंत्र अथवा भजनों का संकीर्तन करने से महादेव शीघ्र प्रसन्न होते हैं।
शिव भजनों के लिए कौन सा दिन विशेष है?
सोमवार, प्रदोष व्रत की तिथि और महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव की उपासना और भजन संकीर्तन के लिए विशेष रूप से फलदायी माना जाता है।
क्या शिव जी की उपासना से कुंडली के दोष दूर होते हैं?
हाँ, भगवान शिव (महाकाल) की आराधना से कालसर्प दोष, राहु-केतु दोष और शनि जनित कष्टों का निवारण होता है।
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