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Krishna Bhajan

जनम तेरा बातों ही बीत गयो लिरिक्स भजन ( Janam Tera Baaton Hi Beet Gayo Lyrics in Hindi ) - Krishna Bhajan Nirgun Bhajan - Bhaktilok

93 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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आध्यात्मिक जागरण की सुगम यात्रा

इस भजन का गायन जीवन में संतोष और शांति लाने का मार्ग प्रशस्त करता है।

जनम तेरा बातों ही बीत गयो तूने कबहू ना कृष्ण कहो पाँच बरस को भोलो बालो अब तो बीस भयो मकर पचीसी माया के कारन देश विदेश गयो तीस बरस की अब मति उपजी लोभ बढ़े नित नयो माया जोड़ी लाख करोड़ी अजहू न तृप्त भयो श्याम बाबा साथ है तो डरने की क्या बात है

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

भजन का मुख्य संदेश मानव जीवन के क्षणिकत्व और आत्मा की शाश्वतता को उजागर करता है। 'जनम तेरा बातों ही बीत गयो' पंक्ति से यह बोध होता है कि जीवन का अधिकांश समय बेतुकी बातें करते बीत जाता है। इसमें जीवन के अनित्य स्वरूप की चर्चा है, जबकि 'तूने कबहू ना कृष्ण कहो' से यह दर्शाता है कि व्यक्ति अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति लापरवाह हो जाता है। आत्मा की संपूर्णता के बजाय भौतिकताओं में उलझकर रह जाता है। इसका गहराई से अर्थ यह है कि भौतिक संपदाओं की दौड़ में व्यक्ति कभी-कभी अपने वास्तविक स्वरूप को भूल जाता है।

भावार्थ के अनुसार, 'मकर पचीसी माया के कारन' में माया का वर्णन किया गया है, जो भौतिकता और सांसारिक चीजों का प्रतीक है। माया के आकर्षण में व्यक्ति किस प्रकार फंस जाता है, यह दर्शाया गया है। यह भजन न केवल व्यक्तिगत आत्मा के संबंधित है, बल्कि सामाजिक दायित्वों के प्रति भी एक जागरूकता का संचार करता है। 'श्याम बाबा साथ है तो डरने की क्या बात है' के माध्यम से भक्ति की शक्ति और भगवान की कृपा पर भरोसे की आवश्यकता को स्पष्ट किया गया है। यह भक्ति मार्ग का एक अनिवार्य हिस्सा है।

इस भजन में भक्ति मार्ग का प्रमुख तत्व है जो व्यक्ति को अपने भीतर की शांति और प्रगति की ओर ले जाता है। 'बातों ही बीत गयो' कहकर इसकी चेतावनी दी गई है कि हम जीवन के महत्व को पहचानें और व्यर्थ की बातों में न फंसें। भगवान Krishna का स्मरण इस भजन की आत्मा है, जो मानवता को सच्ची भक्ति की ओर प्रेरित करता है। यह भजन न केवल साधना का माध्यम है, बल्कि एक जीवन दर्शन भी प्रदान करता है जिसमें सच्चाई और सहजता की आवश्यकता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन धार्मिकता और भक्ति को बड़े सुगम तरीके से दर्शाता है। हिन्दू धर्म में कृष्ण का महत्व अत्यधिक है, जहां उन्हें गोपाल, माँ के प्रिय पुत्र और भक्तों के कार्य के अनुसार मार्गदर्शन करते हुए देखा जाता है। पवित्र ग्रंथ गीता में भी भाग्य और कर्म के बीच का महत्व को दर्शाया गया है। इस भजन का संदर्भ विभिन्न पुराणों, जैसे भागवत पुराण में भगवान कृष्ण की लीलाओं से भी संबंधित है, जो जीवन को सरल और रसमय बनाने का संदेश देते हैं।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का नियमित गायन मानसिक स्थिरता और आंतरिक शांति प्रदान करता है। यह भक्तों को एकाग्रता और संतोष की भावना का अनुभव कराता है। आत्मिक जागृति से यह भजन जीवन में सकारात्मकता और उत्साह का संचार करता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जप सुबह या शाम के समय करना सर्वोत्तम है। अच्छे फल के लिए भक्ति के साथ दीये का प्रज्वलन करें और पारंपरिक मिठाई का भोग लगाएं। मानसिक शांति और एकाग्रता के लिए सीधे बैठे और संपूर्ण मन को भगवान की ओर लगाएं।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन में कृष्ण का महत्व कैसे दर्शाया गया है?

इस भजन में कृष्ण की परिकल्पना भावनात्मक और आध्यात्मिक सुरक्षा के प्रतीक के रूप में की गई है। यह भक्तों को कृष्ण के प्रति श्रद्धा और भक्ति के माध्यम से उनकी कृपा प्राप्त करने की प्रेरणा देता है।

भजन सुनने से क्या लाभ होता है?

भजन का नियमित श्रवण मानसिक और आत्मिक उद्दीपन में सहायक होता है। यह व्यक्ति को संतोष और आंतरिक शांति की स्थिति में पहुँचाता है, जिससे जीवन की चुनौतियों का सामना करने की शक्ति मिलती है।

क्या इस भजन का जप किसी विशेष समय पर करना चाहिए?

हां, भजन का जप सुबह या शाम को करना चाहिए। इस समय का प्रयोग मन की शांति और एकाग्रता के लिए किया जाता है, जिससे भक्ति का अनुभव अधिकतम हो सके।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 21 Aug 2026

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