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क्यों भूल गए श्यामा मुझे पागल समझ कर लिरिक्स (Kyu Bhul Gaye Shama Lyrics in Hindi ) - krishan Bhajan Sanjay Mittal - Bhaktilok

66 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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श्याम की भक्ति में पागल आत्मा का गान

श्याम के प्रति अनन्य प्रेम को व्यक्त करता एक अद्भुत भजन, जो भक्तों के मन को भक्ति में रंग देता है।

क्यों भूल गए श्यामा मुझे पागल समझ कर लिरिक्स (Kyu Bhul Gaye Shama Lyrics in Hindi ) -पागल समझ कर भूल गए श्याम पागल समझ कर भूल गएमुझे पागल समझ कर भूल गएक्यों भूल गए श्यामा मुझे पागल समझ कर भूल गएमेरे मन में उठी उमंगें जप लू नाम तुम्हारांतुम श्यामा अब दर्शन दे दोहोगा भला हमाराहम है बालक नादान क्यों कर हमको भूल गएक्यूँ भूल गए श्यामामुझे पागल समझ कर भूल गएतुम आओ या ना आओ मैं लूंगा नाम तुम्हाराजहाँ कहीं भी तुम जाओगे पीछा करूँ तुम्हारामैं छोड़ नहीं सकता तुम बेशक मुझको छोड़ गएक्यूँ भूल गए श्यामामुझे पागल समझ कर भूल गएदुनियाँ में तुम भक्ति की माला जल्दी फेरो भगवननहीं तो इस दुनियाँ में श्यामा धरम होयेगा भंगक्यों तोड़ रहे श्यामा मेरा भक्ति भरा दिल तोड़ रहेक्यूँ भूल गए श्यामामुझे पागल समझ कर भूल गएमेरे मन में आस उठी तब आया पास तुम्हारेमातृदत्त (लेखक ) तुम्हारा तुम बिन व्याकुल नंद दुलारेमैं भूल नहीं सकता तुम बेशक हमको भूल चलेक्यूँ भूल गए श्यामामुझे पागल समझ कर भूल गएक्यों भूल गए श्यामा मुझे पागल समझ कर भूल गएपागल समझ कर भूल गए श्याम पागल समझ कर भूल गएक्यूँ भूल गए श्यामामुझे पागल समझ कर भूल गए

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन में भक्त अपने प्यार, श्रद्दा और कृपालु श्याम के प्रति भक्ति को दर्शा रहे हैं। मुख्यतः, भक्त का यह कहना है कि श्याम ने उन्हें भुला दिया है और वह अपने पागलपन में इसकी पीड़ा व्यक्त करते हैं। वह श्याम से पुनः दर्शन की प्रार्थना करते हैं और यह समझाते हैं कि यदि तुम अपने भक्त को भुला सकते हो, तो यह उनकी भक्ति का क्या होगा। भक्त यह बताना चाहता है कि उनके मन में तुम्हारा नाम जपने की आस सदा जीवित है। इस लाइन में साधक की प्रारंभिक अवस्था का संकेत मिलता है, जहाँ वे पूर्ण विश्वास के साथ श्याम को अपने जीवन में देखना चाहते हैं।

इस भजन में भावनाओं की गहराई स्पष्ट होती है। भक्त की नादानियत और निष्कलंक प्रेम का भाव इस बात को इंगित करता है कि श्याम के प्रति उनकी भक्ति कभी कम नहीं होते। भक्ति का भाव, श्यामा के प्रति अद्वितीय प्रेम में निवातित है। 'मैं भूल नहीं सकता' का कथन भक्त की उस गहरी मानसिकता को प्रकट करता है कि श्याम के बिना, वे अस्वस्थ हैं। यह दिखाता है कि भक्ति एक सूक्ष्म और गहन संबंध है, जिसमें भक्त का जीवन व्यतीत होता है। श्याम की उपस्थिति के बिना, भक्त का जीवन अधूरा लगता है।

इस भजन में भक्त की भक्ति मार्ग का समर्पण दर्शाया गया है। भक्त का विश्वास है कि भगवान उनके हृदय में निवास करते हैं और उनकी भक्ति को ध्यान में रखकर ही उनकी यात्रा में आगे बढ़ते हैं। भक्ति मार्ग केवल भगवान की पूजा नहीं, बल्कि उस व्यक्तिगत संबंध को भी दर्शाता है जो भक्त अपने इष्ट के साथ स्थापित करता है। इस नाते, भक्त की यह व्यथा भगवान और भक्त के बीच संबंध की गहराई को बताती है। यह बताता है कि जब हम अपने इष्ट को पूर्ण समर्पण करते हैं, तब हमारी भक्ति सार्थक हो जाती है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन भगवान श्रीकृष्ण की अनन्य भक्ति का प्रतीक है। भारतीय पौराणिक कथाओं में कृष्ण की लीला भक्ति विषयक शिक्षाएँ प्रदान करती है, जिसमें उनके प्रति आत्मीयता, प्रेम और समर्पण की बातें व्याप्त हैं। भावार्थ में भक्ति के महत्व को समझाया गया है। भक्त जना श्याम की उपासना में संलग्न रहते हैं, जिससे कृष्ण का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस प्रकार का भजन गीता के शिक्षाओं की पुष्टि करता है, जहाँ भगवान का ध्यान लगाने से भक्त को आनंद की प्राप्ति होती है।

श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें। इस भजन का जाप मानसिक शांति, आध्यात्मिक उद्धार, और शरीर में ऊर्जा वृद्धि का कारण बनता है। नियमित रूप से इस भजन का जाप करने से मनोबल ऊँचा होता है और भक्त को नकारात्मकता से मुक्ति मिलती है। यह भक्ति भक्त की आत्मा को शुद्ध करती है और उसे भगवान के करीब ले जाती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

भजन का जाप सूर्योदय से पूर्व या संध्या समय किया जाना उचित होता है। इस समय वातावरण में चिर शांतता होती है, जिससे भक्त का मन भगवान की ध्यान में लीन हो जाता है। इस समय एक दिया जलाना और भक्ति का वाद्य यंत्र, जैसे तबला, का प्रयोग किया जा सकता है। बैठकर सुखपूर्वक ध्यान की मुद्रा में भजन का जाप करना चाहिए।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?

इस भजन का मुख्य संदेश भक्त की भगवान के प्रति अटूट प्रेम और श्रद्धा को व्यक्त करना है। भजन में व्यक्त किया गया है कि भक्त की भक्ति में भगवान ने उन्हें भुला दिया है, और वह पुनः उनके दर्शन के लिए वाक्य कर रहे हैं।

कृष्ण की भक्ति का महत्व क्यों है?

कृष्ण की भक्ति का महत्व इसलिए है क्योंकि यह सच्चे प्रेम, समर्पण और आस्था को दर्शाता है। भक्त जब कृष्ण में अपने पूर्ण हृदय से डूबता है, तब सुख, शांति और आशा की प्राप्ति होती है।

भजन के नियमित जाप से क्या लाभ हो सकते हैं?

भजन के नियमित जाप से मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और भक्त की आध्यात्मिक उन्नति होती है। यह तनाव को कम करने और संतुलित जीवन जीने में सहायक होता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 21 Aug 2026

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