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Krishna Bhajan

मैया तेरा कान्हा है बड़ा है नटखट लिरिक्स ( Maiya Tera Kanha Bada Natakhat Lyrics in Hindi ) - Krishna Bhajan - Bhaktilok

52 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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कन्हैया की लीलाओं में माखन के रस

कन्हैया के नटखटपन और माखन लीलाओं का पूजन करें, भक्ति और प्रेम के साथ गाएं।

मैया तेरा कन्हईया है बड़ा है नटखट बड़ा है नटखटये जाने जा तुतो न करता फिरे करतब करता फिरे करतब रुक जाओ मैया तेरा कान्हा है बड़ा है नटखट बड़ा है नटखटये जाने जा तुतो न करता फिरे करतब करता फिरे करतब मेरी माखन के मटकी को चट करे झटपट अरे जारे जारे गोवालन जुठ क्यों बोले मेरा कन्हईया छोटासा आंगन में हे डोले कैसे खाये माखन कैसे करे करतब छोटासा कान्हा तेरा बरहा नटखट ना खेले तेरे आंगन घूमता फिरे घर घर मेरी माखन के मटकी को चट करे झटपट अरे मन माखन भावे कान्हा को मेरे पर मेरा कान्हा न जाये तेरे घर तू कुछ भी केह लेदे सबुत तो में मनु करता होगा करतब घर आकर देखो मैया फूटे मटके झटपट हर मटके का माखन खाये वही नटखट अरे तू भी खा गई है धोखा मेरी तरह औ ग्वालनव्रज के वानर तोरे मटकी को ग्वालन अरे तू भी खा गई है धोखा मेरी तरह औ ग्वालन अब न कहना के कान्हा करता होगा करतब

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

यह भजन 'मैया तेरा कान्हा है बड़ा है नटखट' भगवान श्रीकृष्ण की निर्दोष चुलबुली लीलाओं को व्यक्त करता है। इस गीत में माता यशोदा की भक्ति एवं उनके प्यारे पुत्र कान्हा की चंचलता का वर्णन किया गया है। यह दर्शाता है कि कैसे कान्हा अपनी नटखटता के कारण सभी को मोहित कर देता है। 'कन्हईया छोटासा आंगन में हे डोले' इस पंक्ति में कान्हा की मासूमियत और उनकी शरारतों का बखान किया गया है, जिससे माता यशोदा को चिंता होती है कि कैसे उनका प्रिय पुत्र नंद के माखन की मटकी को चट कर रहा है। भजन के माध्यम से यह संदेश भी मिलता है कि भगवान की लीलाएँ असीमित और अद्भुत होती हैं।

कान्हा के नटखट स्वभाव का वर्णन करते हुए यह भजन भक्तों के हृदय में अनुराग और भक्ति की भावना को जगाता है। माताओं की चिंता और प्रेम के साथ कान्हा की शरारतें, इस गीत में सुनाई देती हैं। 'मेरी माखन के मटकी को चट करे झटपट' जैसे शब्द इस स्थिति को दिखाते हैं जब कान्हा माखन चुराते हैं, और इससे माता यशोदा का हृदय प्रेम और चिंता दोनों से भर जाता है। इस प्रकार के भाव भक्तों के लिए भक्ति का माध्यम बनते हैं, जिससे वे अपने हृदय में भगवान की अद्भुत लीलाओं को अनुभव कर सकें।

इस भजन की विशेषता यह है कि यह भक्ति मार्ग का साक्षात्कार कराता है, जहाँ भक्त अपने हृदय में नंदलाल की शरारतों को महसूस करने के लिए तैयार होते हैं। यह गीत कृष्ण भावनामृत से भरा हुआ है, जहाँ भक्त अपनी समस्याओं को भूलकर केवल कान्हा की लीलाओं में खो जाते हैं। कान्हा की नटखटता केवल खेलने-कूदने का आनन्द नहीं है, अपितु यह भक्तों को उनके प्रति प्रेम की भावना और सच्चे समर्पण की प्रेरणा देती है। इस प्रकार, यह भजन भक्तों के लिए एक अद्वितीय मार्ग प्रशस्त करता है, जिससे लोग भगवान कृष्ण के दिव्य प्रेम और भक्ति का अनुभव कर सकें।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन न केवल प्रेम और भक्ति का प्रतीक है, बल्कि यह भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का भी वरण करता है। स्कंदपुराण एवं भागवत पुराण में श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का बहुत महत्व है। इन लीलाओं के माध्यम से भक्त समझ सकते हैं कि किस प्रकार छोटे से भगवान ने अपने जीवन में खेल-खिलौनों के माध्यम से सबको भक्ति का ज्ञान दिया। इस भजन में उनकी नटखटता के जरिए यह दिखाया गया है कि भगवान अपने भक्तों को कैसे अपनी शरारतों से मोहित करते हैं। इस प्रकार, यह गीत भक्तों को मोहित करता है और उनके मन में कृष्ण के प्रति प्रेम और भक्ति की भावना को जागृत करता है।

श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें। इस भजन का पाठ करने से मानसिक शांति, आत्मिक संतोष और आध्यात्मिक ज्ञान की प्राप्ति होती है। श्रद्धालु जब इसे भक्ति भाव से गाते हैं, तो उनके मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इसके माध्यम से मानसिक दबाव को कम किया जा सकता है और भक्तों को जीवन की कठिनाइयों का सामना करने की शक्ति मिलती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का पाठ सुबह या शाम के समय किया जा सकता है। पूजा करते समय एक दीपक जलाना चाहिए और माखन या दूध का नैवेद्य अर्पित करना चाहिए। सही मुद्रा में बैठकर, ध्यान में भगवान कान्हा की छवि लाना चाहिए और मन में प्रेम से भरे भावों के साथ इस भजन का उच्चारण करना चाहिए।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?

इस भजन का मुख्य संदेश भगवान श्रीकृष्ण के बालपन की लीलाओं और उनके नटखट स्वभाव को दर्शाना है, जो भक्तों के मन को मोह लेता है।

भजन को गाने का सही समय क्या है?

इस भजन को सुबह या सांझ के समय गाना सबसे उत्तम होता है, जब वातावरण शांत और आध्यात्मिक होता है।

क्या इस भजन के पाठ से कोई विशेष लाभ होता है?

हाँ, इस भजन के पाठ से मानसिक शांति, आध्यात्मिक ऊर्जा, और भगवान की कृपा प्राप्त होती है, जिससे भक्तों का जीवन बेहतर होता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 17 Aug 2026

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