मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन
शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें
( मेरे मोहन तेरा मुस्कुराना लिरिक्स हिंदी ) -
मेरे मोहन तेरा मुस्कुराना
भूल जाने के क़ाबिल नहीं है
मेरे मोहन तेरा मुस्कुराना
भुल जाने के काबिल नहीं हैं
चोट खाई है जो दिल पे मैंने
वो दिखाने के काबिल नहीं है
मेरे मोहन तेरा मुस्कुराना
भूल जाने के क़ाबिल नहीं है।
जबसे देखा है जलवा तुम्हारा
कोई आँखों को जँचता नहीं है
यूँ तो देखे बहुत नूर वाले
सारे आलम में तुझसा नहीं है
मेरे मोहन तेरा मुस्कुराना
भूल जाने के क़ाबिल नहीं है।
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मोहब्बत का तकाजा यही है
ना तुम बदलो हमसे
ना हम बदले तुमसे
तुम तो ऐसे बदलने लगे हो
आज तक कोई बदला नहीं है
मेरे मोहन तेरा मुस्कुराना
भूल जाने के क़ाबिल नहीं है।
तेरी सूरत पे कुर्बान जाऊँ
तेरी आँखे है या मय के प्याले
जिनको नजरो से तुमने पिलाई
होश आने के काबिल नहीं है
मेरे मोहन तेरा मुस्कुराना
भूल जाने के क़ाबिल नहीं है।
मैंने पूछा की अब कब मिलोगे
पहले मुस्काए फिर तन के बोलै
सबके दिल में समाए हुए हैं
आने जाने के जरुरत नहीं है
मेरे मोहन तेरा मुस्कुराना
भूल जाने के क़ाबिल नहीं है।
जबसे देखा है जलवा तुम्हारा
कोई आँखों को जचता नहीं है
यूँ तो देखे बहुत नूर वाले
सारे आलम में तुझसा नहीं है
मेरे मोहन तेरा मुस्कुराना
भूल जाने के क़ाबिल नहीं है।
मेरे मोहन तेरा मुस्कुराना
भूल जाने के क़ाबिल नहीं है
मेरे मोहन तेरा मुस्कुराना
भुल जाने के काबिल नहीं हैं
चोट खाई है जो दिल पे मैंने
वो दिखाने के काबिल नहीं है
मेरे मोहन तेरा मुस्कुराना
भूल जाने के क़ाबिल नहीं है।
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सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।
🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ
यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन " मेरे मोहन तेरा मुस्कुराना लिरिक्स ( Mere Mohan Tera Muskurana Lyrics in Hindi ) - Krishna Bhajan Vinod Ji Agrawal - Bhaktilok" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।
भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।
🔍 विशेष महत्त्व और लाभ
श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।
सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।
🕒 साधना एवं गायन विधि
भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।
भजनों को गाने की सही विधि क्या है?
भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।
क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?
हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।
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