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मेरी लगी श्याम संग प्रीत भजन लिरिक्स (Meri Lagi Shyam Sang Preet Lyrics in Hindi) - Shyam Bhajan - Bhaktilok

73 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें


मेरी लगी श्याम संग प्रीत भजन लिरिक्स (Meri Lagi Shyam Sang Preet Lyrics in Hindi) - Shyam Bhajan - Bhaktilok

 मेरी लगी श्याम संग प्रीत भजन लिरिक्स (Meri Lagi Shyam Sang Preet Lyrics in Hindi) - 

मेरी लगी श्याम संग प्रीत ये दुनिया क्या जाने 

मुझे मिल गया मन का मीत ये दुनिया क्या जाने 

क्या जाने कोई क्या जाने 

मेरी लगी श्याम संग प्रीत ये दुनिया क्या जाने 

मुझे मिल गया मन का मीत ये दुनिया क्या जाने 

छवि लगी मन श्याम की जब से 

भई बावरी मैं तो तब से 

बाँधी प्रेम की डोर मोहन से

नाता तोड़ा मैंने जग से

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ये कैसी पागल प्रीत ये दुनिया क्या जाने

ये कैसी निगोड़ी प्रीत ये दुनिया क्या जाने

क्या जाने कोई क्या जाने या क्या जाने 

मुझे मिल गया मन का मीत ये दुनिया क्या जाने 

मोहन की सुन्दर सूरतिया 

मन में बस गयी मोहनी मूरतिया 

जब से ओढ़ी शाम चुनरिया 

लोग कहे मैं भई बावरिया 

मैंने छोड़ी जग की रीत ये दुनिया क्या जाने 

क्या जाने कोई क्या जाने 

मेरी लगी श्याम संग प्रीत ये दुनिया क्या जाने

मुझे मिल गया मन का मीत ये दुनिया क्या जाने

हर दम अब तो रहूँ मस्तानी 

लोक लाज दीनी बिसरानी 

रूप राशि अंग अंग समानी

हे रत हे रत रहूँ दीवानी 

मई तो गाऊँ ख़ुशी के गीत ये दुनिया क्या जाने

क्या जाने कोई क्या जाने 

मेरी लगी श्याम संग प्रीत ये दुनिया क्या जाने 

मुझे मिल गया मन का मीत ये दुनिया क्या जाने 

मोहन ने ऐसी बंसी बजायी 

सब ने अपनी सुध बिसरायी -

गोप गोपिया भागी आई 

लोक लाज कुछ काम न आई 

फिर बाज उठा संगीत ये दुनिया क्या जाने 

क्या जाने कोई क्या जाने 

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मेरी लगी श्याम संग प्रीत ये दुनिया क्या जाने

मुझे मिल गया मन का मीत ये दुनिया क्या जाने 

भूल गयी कही आना जाना 

जग सारा लागे बेगाना 

अब तो केवल शाम सुहाना 

रूठ जाये तो उन्हें मनाना

अब होगी प्यार की जीत ये दुनिया क्या जाने

क्या जाने कोई क्या जाने 

मेरी लगी श्याम संग प्रीत ये दुनिया क्या जाने 

मुझे मिल गया मन का मीत ये दुनिया क्या जाने

हम प्रेम नगर की बंजारन 

जप तप और साधन क्या जाने

हम शाम के नाम की दीवानी 

नित नेम के बंधन क्या जाने

ब्रह्म ज्ञान की उलझन क्या जाने

ये प्रेम की बाते है उद्धव 

कोई क्या समझे कोई क्या जाने 

मेरे और मोहन की बातें

या मै जानू या वो जाने 

क्या जाने कोई क्या जाने

मेरी लगी श्याम संग प्रीत ये दुनिया क्या जाने

मुझे मिल गया मन का मीत ये दुनिया क्या जाने

शाम तन शाम मन शाम हैं हमारो धन 

आठो याम पूछो हमें शाम ही सो काम हैं 

शाम हिये शाम पिए शाम बिन नाही जिए

आंधें की सी लाकडी आधार शाम नाम है 

शाम गति शाम मति शाम ही हैं प्राणपति 

शाम सुख दायी सो भलाई आठो याम हैं

उद्धव तुम भये बवरे पाथी ले के आये दोड़े 

हम योग कहा राखे यहाँ रोम रोम शाम है 

क्या जाने कोई क्या जाने 

मेरी लगी श्याम संग प्रीत ये दुनिया क्या जाने

मुझे मिल गया मन का मीत ये दुनिया क्या जाने 

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सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "मेरी लगी श्याम संग प्रीत भजन लिरिक्स (Meri Lagi Shyam Sang Preet Lyrics in Hindi) - Shyam Bhajan - Bhaktilok" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।

भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।

भजनों को गाने की सही विधि क्या है?

भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।

क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?

हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 25 Aug 2026

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