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Krishna Bhajan

पकड़ लो हाथ बनवारी नहीं तो डूब जाएंगे भजन लिरिक्स (Pakad Lo Hath Banwari Lyrics in Hindi) - New Krishna Bhajan - bhaktilok

53 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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भगवान श्री कृष्ण की कृपा का आह्वान

इस भजन के माध्यम से श्री कृष्ण की कृपा के लिए प्रार्थना करें और जीवन की कठिनाइयों को दूर करें।

पकड़ लो हाथ बनवारी नहीं तो डूब जाएंगे हमारा कुछ न बिगड़ेगा तुम्हारी लाज जायेगी तुम्हारे ही भरोसे पर जमाना छोड़ बैठे हैं जमाने की तरफ देखो हमे कैसे निभाओगे पकड़ लो हाथ बनवारी... पड़ी मझधार में नैया खिवैया कोई नहीं मेरा खिवैया आप बन जाओ नहीं तो डूब जाएंगे पकड़ लो हाथ बनवारी... सांवली सूरत पे मोहन मेरा कस के पकड़ लो हाथ लदी है पाप की गठरी वजन पापों का भारी है यह गठरी आप संभालो तो बेड़ा पर हो जाए पकड़ लो हाथ बनवारी... लड़कपन की मोहब्बत है हमारी छूट जाएगी लगी ना नग जड़ी चूड़ी जो इक दिन टूट जायगी पकड़ लो हाथ बनवारी... पकड़ लो हाथ बनवारी नहीं तो डूब जाएंगे हमारा कुछ न बिगड़ेगा तुम्हारी लाज जायेगी नाम है तेरा तारण हारा कब तेरा दर्शन होगा

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मुख्य विषय यह है कि भक्त भगवान श्री कृष्ण के प्रति अपनी पूर्ण आस्था और विश्वास व्यक्त कर रहा है। 'पकड़ लो हाथ बनवारी नहीं तो डूब जाएंगे' में भक्त अपनी लाचारी और निर्भरता को प्रकट कर रहा है। यह संदेश है कि जब जीवन की समस्याएं बढ़ जाती हैं और कोई सहारा नहीं होता, तब केवल कृष्ण का हाथ पकड़ने से ही हमें इस संसार की कठिनाइयों से पार पा सकते हैं। यह स्थिति मनुष्य की कमजोरी को दर्शाती है। भजन में 'हमारा कुछ न बिगड़ेगा तुम्हारी लाज जायेगी' इस बात को बताता है कि भक्त ने भगवान पर इतना विश्वास किया है कि वह अपनी असुरक्षा को छोड़कर केवल कृष्ण की लाज को प्राथमिकता दे रहा है।

भावार्थ के अनुसार, इस भजन का उद्देश्य भक्त को आत्म–समर्पण की ओर प्रेरित करना है। 'पड़ी मझधार में नैया खिवैया कोई नहीं मेरा' इस पंक्ति में भक्त अपनी नीरसता को व्यक्त कर रहा है, जहाँ उसे कोई सहारा नहीं मिल रहा है। यह स्थिति सभी मानवों के जीवन में आती है जब वे अकेलेपन का अनुभव करते हैं। तब भगवान कृष्ण ही एकमात्र सहारा होते हैं। 'सांवली सूरत पे मोहन' इस पंक्ति के माध्यम से भक्त कृष्ण के प्रेममय रूप का वर्णन कर रहा है, जो भक्ति के द्वारा भक्त को ऊर्जा और आशा प्रदान करता है। यह भजन भक्ति और प्रेम का भी प्रतीक है।

इस भजन से जुड़े धार्मिक और दार्शनिक पहलू भी महत्वपूर्ण हैं। भक्ति मार्ग में, व्यक्ति अपने अहंकार और सामर्थ्य को छोड़कर भगवान के प्रति नतमस्तक होता है। 'पाप की गठरी' का संदर्भ हमें यह समझाता है कि मानव के जीवन में पाप भी एक वास्तविकता है। जब भक्त भगवान से प्रार्थना करता है, तब वह अपने पापों के बोझ को भी भगवान पर डालने का प्रयास करता है। इसलिए, यह भजन उन सभी भक्तों के लिए एक साधन है, जो अपनी आत्मा के पापों से मुक्ति पाना चाहते हैं।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन केवल कृष्ण भक्ति का एक साधन नहीं बल्कि एक गहन धार्मिक दार्शनिकता का भी प्रतीक है। पुराणों में भी ऐसे अनेक प्रसंग मिलते हैं जहाँ भक्तों ने कृष्ण का हाथ थामकर अपार संकटों से मुक्ति पाई। भगवद गीता में भी भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को संकट की घड़ी में अपने ज्ञान और साहस से संभाला। यह भजन उसी सिद्धांत को आगे बढ़ाता है, जहाँ भक्त पूरी श्रद्धा के साथ भगवान से सहायता मांगता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का नियमित गान करने से व्यक्ति में मानसिक शांति, आत्मिक बल और भक्ति की भावना का विकास होता है। यह भजन व्यक्ति को बुरे विचारों और नकारात्मकताओं से मुक्त कर ज्ञान और आत्मविश्वास का संचार करता है। जब भक्त इस भजन को गाता है, तब उसे अपने दुखों और दुखों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण प्राप्त होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का पाठ सुबह सूर्योदय के समय या शाम को संध्या के समय करना उपयुक्त है। इस दौरान, एक स्वच्छ स्थान पर बैठकर दीया जलाना और फूलों का अर्पण करना अच्छा रहता है। ध्यान रखें कि आप शांत मन और श्रद्धा के साथ भगवान श्री कृष्ण का ध्यान करें। मन में केवल प्रेम और भक्ति की भावना होनी चाहिए।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

क्या इस भजन का गान विशेष समय पर करना चाहिए?

हां, इस भजन का गान सुबह या शाम को करना लाभकारी होता है। इस समय मन शुद्ध होकर भक्ति में लीन हो जाता है।

क्या यह भजन जीवन की कठिनाइयों को दूर कर सकता है?

बिल्कुल, इस भजन में भगवान श्री कृष्ण की शरण में जाने का आह्वान किया गया है, जो जीवन की कठिनाइयों को दूर करने में मदद कर सकता है।

इस भजन में भगवान श्री कृष्ण का कौन-सा स्वरूप दर्शाया गया है?

इस भजन में कृष्ण के 'सांवली सूरत' रूप का उल्लेख है, जो उनके प्रेम और भक्ति का प्रतीक है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 20 Aug 2026

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