आज का पंचांग (Columbus) | सूर्योदय: ०४:३१ PM | सूर्यास्त: ०५:३० AM
Krishna Bhajan

सांवली सूरत पे मोहन भजन लिरिक्स (Sanwali Surat pe dil Mohan Lyrics in Hindi ) - New Shyam Bhajan - Bhaktilok

61 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
आकार:
कंट्रास्ट:

कृष्ण भक्ति का अद्भुत गीत: सांवली सूरत मोहन

कृष्ण की लीलाओं और स्वरूप का भक्ति भाव से गायन करें इस भजन के माध्यम से।

सांवली सूरत पे मोहन दिल दीवाना हो गया ।दिल दीवाना हो गया दिल दीवाना हो गया ॥एक तो तेरे नैन तिरछे दूसरा काजल लगा ।तीसरा नज़रें मिलाना दिल दीवाना हो गया ॥एक तो तेरे होंठ पतले दूसरा लाली लगी ।तीसरा तेरा मुस्कुराना दिल दीवाना हो गया ॥एक तो तेरे हाथ कोमल दूसरा मेहँदी लगी ।तीसरा मुरली बजाना दिल दीवाना हो गया ॥एक तो तेरे पाँव नाज़ुक दूसरा पायल बंधी ।तीसरा घुंगरू बजाना दिल दीवाना हो गया ॥एक तो तेरे भोग छप्पन दूसरा माखन धरा ।तीसरा खिचडे का खाना दिल दीवाना हो गया ॥एक तो तेरे साथ राधा दूसरा रुक्मण खड़ी ।तीसरा मीरा का आना दिल दीवाना हो गया ॥एक तो तुम देवता हो दूसरा प्रियतम मेरे ।तीसरा सपनों में आना दिल दीवाना हो गया ॥

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस गीत का मुख्य विषय श्री कृष्ण की संपूर्णता और उनके सौम्य स्वरूप की भक्ति है। 'सांवली सूरत पे मोहन' की पंक्ति में श्री कृष्ण के गहरे और मोहक रूप का वर्णन है, जिसमें भक्ति भाव से बंधा मन अपने प्रियतम को देखकर दीवाना हो जाता है। इसकी पहली पंक्ति से प्रतीत होता है कि कृष्ण के आंसू भरे नैनों का तिरछा दृष्टि और काजल उनका सौंदर्य बढ़ाता है। यहाँ भक्त की संवेदनाएँ उनके प्रति प्रेम और समर्पण को दर्शाती हैं। इस भावना को आगे बढ़ाते हुए, अगली पंक्तियों में भगवान के होंठों, मुस्कान और भोग का जिक्र है, जो भक्त के मन में उत्साह और आनंद को उत्पन्न करता है।

गीत का भावार्थ भक्ति और प्रेम को प्रमुखता देता है। जैसे ही भक्त भगवान के नाज़ुक पांवों और उनकी कीर्तन धुन का वर्णन करता है, यह दर्शाता है कि भक्ति का मार्ग नाजुकता और सच्चाई से भरा है। कृष्ण का जन्म, उनके खेल और उनके प्रियगणों का संग यह सब भक्त की अंतर्दृष्टि में गहराई से बसे हुए हैं। यहाँ भक्त अपने मन के गहरे भावों को व्यक्त करता है, जो उनकी प्रेमभावना को दर्शाते हैं। यह गीत भक्ति के अत्यंत कोमल अंशों को उजागर करता है, जहां भक्त को सहजता और आनंद महसूस होता है।

इस भजन में भक्तिभाव का गहरा संदेश निहित है। कृष्ण की लीला और उनके नाम का जाप भक्त की आत्मा को शांति और संतोष से भर देते हैं। 'एक तो तुम देवता हो' की पंक्ति में भक्त की आध्यात्मिक ऊँचाई अबोध अवस्था को दर्शाती है, जहाँ वह खुद को कृष्ण के समर्पित भक्त के रूप में देखता है। भक्ति मार्ग पर चलने वाले सभी साधक इस गीत को गाकर आत्मिक अनुभूति के स्तर को बढ़ा सकते हैं। यह भक्ति का अत्यंत सुगम और संगीत से भरा रास्ता है, जो सीधे हृदय में उतरता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस प्रार्थना का उल्लेख हिंदू पौराणिक साहित्य में विशेष रूप से कृष्ण अवतार की कहानियों में होता है, जहाँ श्री कृष्ण के सौंदर्य, लीलाओं और उनके साथियों के माध्यम से भक्ति का महत्व स्पष्ट होता है। भागवत पुराण जैसे ग्रंथों में माँ राधा और सखियों के साथ श्री कृष्ण का चित्रण किया गया है, जो भक्ति के गूढ अर्थ को समझाने में सहायक होते हैं। यह भजन उनके (कृष्ण) प्रति असीम प्रेम को व्यक्त करने का माध्यम है। इस प्रकार, भजन का पाठ सुनने से भक्ति की शुद्धता और प्रेम का भाव जागृत होता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। सांवली सूरत पे मोहन भजन का जाप करने से मानसिक शांति, प्रसन्नता और आध्यात्मिक उन्नति होती है। यह भजन विशेष रूप से भक्तों को तनाव और मानसिक चिंता से मुक्ति दिलाता है। नियमित रूप से इसका जाप करने से आत्मा को संतोष और आनंद की प्राप्ति होती है, जो जीवन में संतुलन लाने में सहायक होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जाप सुबह सूरज उगने के समय या रात्रि को पूजा के समय किया जा सकता है। भक्त को उचित मानसिकता के साथ इस भजन का गान करना चाहिए। दीप जलाकर, फूल-फल अर्पित करके और भगवान की मूर्ति के सामने सच्चे भाव से श्रद्धा पूर्वक भजन गाने से भक्ति का अहसास होता है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

यह भजन भगवान कृष्ण के किस रूप को दर्शाता है?

यह भजन भगवान कृष्ण के सांवले स्वरूप और उनके सौंदर्य को दर्शाता है, जो भक्तों के दिल में असीम प्रेम और भक्ति का संचार करता है।

भजन का अर्थ और संदर्भ क्या है?

भजन में भक्त का मन श्री कृष्ण के सौंदर्य, उनकी लीलाओं और समर्पित प्रेम को विस्तार से प्रदर्शित करता है, जो भक्ति के गहरे भावों को प्रकट करता है।

इस भजन का सही समय और विधि क्या है?

इस भजन का पाठ सुबह या शाम की पूजा में किया जाता है, जहां दीप जलाना, फूल अर्पित करना और मन में शुद्ध भाव होना आवश्यक है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 03 Sep 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!