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सांवली सूरत पे मोहन दिल दीवाना हो गया भजन (Sanwali Surat Pe Mohan Lyrics in Hindi ) - Agam Radha Krishna Bhajan Krishna Bhajan - Bhaktilok

73 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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कृष्ण की सांवली सूरत: भक्ति का अद्वितीय उत्सव

इस भजन में श्री कृष्ण की मोहक लीलाओं का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन है, जो भक्तों के मन को भक्ति में लिपटा देता है।

सांवली सूरत पे मोहन दिल दीवाना हो गया भजन (Sanwali Surat Pe Mohan  Lyrics in Hindi ) -सांवली सूरत पे मोहन दिल दीवाना हो गया ।दिल दीवाना हो गया दिल दीवाना हो गया ॥एक तो तेरे नैन तिरछे दूसरा काजल लगा ।तीसरा नज़रें मिलाना दिल दीवाना हो गया ॥सांवली सूरत पे मोहन दिल दीवाना हो गया....एक तो तेरे होंठ पतले दूसरा लाली लगी ।तीसरा तेरा मुस्कुराना दिल दीवाना हो गया ॥सांवली सूरत पे मोहन दिल दीवाना हो गया....कैसे भूलु सांवरे मै तेरा उपकार लिरिक्स (Kaise Bhoolu Sanware Mai Tera Upkar Lyrics in Hindi ) - Saurabh-Madhukar New Shyam Bhajan -  मुझे चरणों से लगाले मेरे श्याम लिरिक्स हिंदी ( Mujhe Charno Se Lagale Mere Shyam Lyrics in Hindi ) - New Shyam Bhajan - Bhaktilokएक तो तेरे हाथ कोमल दूसरा मेहँदी लगी ।तीसरा मुरली बजाना दिल दीवाना हो गया ॥सांवली सूरत पे मोहन दिल दीवाना हो गया....एक तो तेरे पाँव नाज़ुक दूसरा पायल बंधी ।तीसरा घुंगरू बजाना दिल दीवाना हो गया ॥सांवली सूरत पे मोहन दिल दीवाना हो गया....एक तो तेरे भोग छप्पन दूसरा माखन धरा ।तीसरा खिचडे का खाना दिल दीवाना हो गया ॥सांवली सूरत पे मोहन दिल दीवाना हो गया....एक तो तेरे साथ राधा दूसरा रुक्मण खड़ी ।तीसरा मीरा का आना दिल दीवाना हो गया ॥सांवली सूरत पे मोहन दिल दीवाना हो गया....एक तो तुम देवता हो दूसरा प्रियतम मेरे ।तीसरा सपनों में आना दिल दीवाना हो गया ॥सांवली सूरत पे मोहन दिल दीवाना हो गया....सांवली सूरत पे मोहन दिल दीवाना हो गया ।दिल दीवाना हो गया दिल दीवाना हो गया ॥जबसे तेरी चौखट पे लिरिक्स भजन ( Jabse Teri Chaukhat Pe Lyrics in Hindi ) - Shyam Bhajan Kishori Dass Kanishk - Bhaktilok श्याम आन बसों वृन्दावन में लिरिक्स भजन ( Shyama Ana Baso Vrindavan main Lyrics in Hindi ) - Krishna Bhajan - Bhaktilok

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

भजन की पंक्तियाँ श्री कृष्ण की सांवली स्वरूप और उनके आकर्षण पर आधारित हैं। पहले श्लोक में कहा गया है कि कैसे श्री कृष्ण के तिरछे नैन, काजल वाली आँखें और नज़रों का मिलना दिल को दीवाना बना देते हैं। यहाँ 'दिल दीवाना हो गया' एक भावनात्मक अभिव्यक्ति है, जो उनकी ओर आकृष्ट करता है। यह भजन न केवल प्रेम का उल्लास है, बल्कि श्री कृष्ण की दिव्यता और उनके साथियों से जुड़े उपकारी गुणों का भी वर्णन करता है। सांवली रूप में मोहकता और लालित्य का समन्वय भक्तों को अपनी ओर खींचता है, जो भक्ति के प्रति गहरा आकर्षण उत्पन्न करता है। हर पंक्ति में श्री कृष्ण के सौंदर्य का बखान किया गया है, जो उनकी भक्ती का मूल तत्व है।

भावार्थ में, यह भजन भक्त की संवेदनाओं को अभिव्यक्त करता है। इसमें श्री कृष्ण के होंठों की पतलापन और मुस्कान को दर्शाते हुए कहा गया है कि ये सब उनकी अलौकिक छवि के सहभागी हैं। भक्त कहता है कि कैसे श्री कृष्ण की मुरली की आवाज़, और उनके द्वारा प्रदान किए गए प्रेम और सहयोग सभी को अज्ञात प्रेम में डुबो देते हैं। सांवली सूरत का अतिव सौन्दर्य भक्त को वह प्रेम और स्नेह की अनुभूति कराता है, जो केवल भगवान में ही संभव है। इस भजन में राधा, रुक्मिणी, और मीरा जैसे नामों का उल्लेख भक्त के दिल में कृष्ण की महिमा को बढ़ाता है, जिससे यह ज्ञात होता है कि श्री कृष्ण केवल एक देवता नहीं, बल्कि सच्चे प्रेम के साकार रूप हैं।

इस भजन में भक्ति मार्ग की ओर संकेत किया गया है। भक्त की नज़र श्री कृष्ण की ओर है और यह दर्शाता है कि भक्ति में न्यूनतम भोग, जैसे कि भोग लगाना और अन्य भोग वस्तुएं केवल माध्यम हैं, जो श्री कृष्ण को प्रसन्न करने के लिए हैं। एक भक्त का यह कर्त्तव्य होता है कि वह श्री कृष्ण की प्राप्ति के लिए समर्पण करे और अपनी सभी इच्छाओं को उनके ऊपर न्योछावर कर दे। यह भजन अनायास ही भक्ति के सर्वश्रेष्ठ स्वरूप को उजागर करता है जहाँ केवल कृष्ण की अनुकंपा और प्रेम की बात होती है। भक्त की ये भावनाएँ उसे मोहन श्री कृष्ण की ओर और भी अधिक आकर्षित करती हैं।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का संदर्भ अनेक पुराणों और महाकाव्यों में मिलता है। श्री कृष्ण का सांवली सूरत में होना महत्वपूर्ण है, जैसा कि भगवत पुराण में वर्णित है। विभिन्न धर्म ग्रंथों में श्री कृष्ण की लीलाओं और उनके सौंदर्य का बखान किया गया है। उदाहरण के लिए, गीता में यह भी कहा गया है कि भगवान अपने भक्तों के प्रति सच्चे प्रेम का दान देते हैं। सांवली रूप में उनका दर्शन असाधारण और मधुर है। इस रूप में भक्तों का आस्था और समर्पण बढ़ता है। इस भजन में सांवली कृष्ण के प्रेम को दर्शाते हुए भक्तों को उनके प्रति प्रेम की भावना का अनुभव कराने का प्रयास किया गया है।

श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें। इस भजन का संगीतमय उच्चारण मानसिक शांति और शांति प्रदान करता है। यह भक्तों की आत्मा को ऊर्जा प्रदान करता है और उनकी आस्था को गहराई देता है। जब भक्त इसे गाते हैं, तो उनका हृदय कृष्ण के प्रति प्रेम और भक्ति से लबरेज हो जाता है, जिससे जीवन में सकारात्मकता आती है। यह भजन तनाव को कम करता है और आंतरिक संतोष की अनुभूति कराता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन को सुबह के समय गाना अत्यंत लाभकारी होता है। भक्त को चाहिए कि वह एक स्वच्छ स्थान पर बैठें, एक दीपक जलाएं और भगवान कृष्ण के चित्र के सामने बैठकर ध्यान लगाएं। मन को एकाग्र कर इस भजन का मनोरंजन करें। इस भजन के साथ भावनाएँ जोड़कर उसकी प्रार्थना करें, जिससे प्रभु के प्रति भक्ति और प्रेम का अनुभव हो सके।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?

इस भजन का मुख्य संदेश श्री कृष्ण की सांवली सुंदरता और उनके प्रति भक्त की अनन्य भक्ति को दर्शाना है। इसमें श्री कृष्ण की लीलाओं का मनमोहक वर्णन है।

क्या इस भजन का अभिषेक विशेष अवसर पर करना चाहिए?

इस भजन का अभिषेक विशेष अवसरों जैसे जन्माष्टमी या राधाष्टमी पर करना अत्यंत पुण्यदायिनी होता है। यह अवसर भक्तों के लिए बहुत विशेष होते हैं।

क्या यह भजन केवल भक्तों के लिए है?

यह भजन सभी के लिए है, चाहे वे भक्त हों या सामान्य लोग। इसका उद्देश्य भगवान श्री कृष्ण के प्रेम और भक्ति को प्रसारित करना है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Aug 2026

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