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झुलनवा झुलेली मईया ( Jhulanwa Jhuleli Maiya ) - Rani Thakur Priti Lata devigeet Bhakti Gana Mata Bhajan - BhaktiLok

91 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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आध्यात्मिक आनंद का बिंदु: झुलनवा झुलेली मईया

झुलनवा झुलेली मईया भजन में भक्त की आत्मा को शांति और प्रेम की अनुभूति होती है।

झुलनवा झुलेली मईया, झुलनवा झुला झुला के जिया। कन्हैया संग झूलती मईया, मन में बसे सदा सुरीला। का सुनु सुख जो से लया, सेवक सही मायका तन्हा। आयी नंदनी धरनी मन के, छवि छवि से महका छाया। झुलनवा झुलेली मईया, झुलनवा झुला झुला के जिया। गोपियाँ गा गा कहे कन्हैया, गोपियाँ गीत गाए। बजाओ बधाई सब् या में, झुलनवा झुला झुला के जिया। खूबसूरत नंदन कन्हैया, तेरा प्यार मोहक नाँव। गोपियाँ संग झूलती मईया, मन में बसे सदा सुरीला। आयी नंदनी धरनी मन के, छवि छवि से महका छाया। झुलनवा झुलेली मईया, झुलनवा झुला झुला के जिया।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

भजन 'झुलनवा झुलेली मईया' देवी माँ के प्रति श्रद्धा और भक्तिभाव प्रकट करता है। इस भजन में मां की झूलनी, मिठास और प्रेम को दर्शाया गया है। झूलना एक खेल की प्रक्रिया है, जो जीवन में आनंद और उल्लास का प्रतीक है। यह प्रेम, भक्ति, और समय की स्थिरता का भी संकेत देता है। यहाँ माँ का वर्णन नंदनी के रूप में किया गया है, जो अपने भक्तों के लिए सदा संग होती हैं। इस भजन की सुंदरता उसका भाव है, जिसमें भक्त अपनी सुरक्षा और प्रेम के लिए माँ को पुकारता है।

इस भजन में देवियों के प्रति असीम प्रेम और भक्ति प्रकट की गई है। 'जिया' का उल्लेख यह दर्शाता है कि भक्त का हृदय माँ की छवि से भरा हुआ है। भक्त गोपियों की तरह नृत्य करता और गाता है, जिससे यह दिखाया जाता है कि देवी की कृपा में कितनी सजीवता और आनंद है। भजन के अंतिम भाग में गोपियों द्वारा कन्हैया का नाम लेना, प्रेम के प्रतीक के रूप में दर्शाया गया है। भक्त द्वारा माँ को अपनी भावनाओं में शामिल करना, उनके प्रति समर्पण का परिचायक है।

इस भजन के माध्यम से भक्ति मार्ग के सिद्धांत को समझाया गया है, जहाँ भक्त और देवी का संबंध परस्पर आदान-प्रदान पर आधारित है। भक्त अपनी भावनाओं को बिना किसी बंधन के व्यक्त करता है, जो कि भक्ति का मूल तत्व है। यह भजन के सामूहिकता और समर्पण को दर्शाता है, जिसमें सभी भक्त एकत्रित होकर स्तुति करते हैं। यह दर्शाता है कि भावनाओं का सच्चा उत्थान कब होता है जब भक्त अपनी निस्वार्थ प्रेम की भावना से देवी की आराधना करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

झुलनवा झुलेली मईया भजन का महत्व पौराणिक कथाओं में व्याप्त है। यह भजन देवी माँ की उस सुगंधित छवि का निर्माण करता है, जो भक्तों के हृदय में सदैव बसी रहती है। भक्तों का भाव यह है कि माँ का आशीर्वाद उन्हें शक्ति, सुरक्षा और समृद्धि प्रदान करता है। भक्ति में यह दिखाया गया है कि जैसे देवियाँ अपने भक्तों का ध्यान रखती हैं, ठीक उसी तरह भक्तों को भी अपने प्रेम और समर्पण के द्वारा देवी माँ को प्रसन्न करने का प्रयास करना चाहिए।

मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें। इस भजन का जाप करने से मानसिक शांति, ध्यान और भावनाओं की स्थिरता प्राप्त होती है। इसके नियमित पाठ से भक्त को देवी माँ का संरक्षण और प्रेम मिलता है। यह भजन भक्ति का एक साधन है जो नकारात्मक भावनाओं को दूर करने में मदद करता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जाप सुबह की आरती से पूर्व या शाम को पूजा के समय करना उचित है। वातावरण को शुद्ध करने के लिए दीया जलाएँ और फल एवं फूलों का भोग अर्पित करें। जाप करते समय पूर्ण ध्यान और समर्पण के साथ बैठना चाहिए।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

झुलनवा झुलेली मईया भजन का क्या उद्देश्य है?

यह भजन भक्तों में देवी माँ की अनुकंपा प्राप्त करने की भावना पैदा करता है और उन्हें मानसिक शांति प्रदान करता है।

क्या इस भजन का कोई विशेष समय है गाने का?

भजन का पाठ सुबह और शाम के समय करना उचित होता है, जिससे भक्त को सर्वाधिक लाभ प्राप्त हो।

इस भजन को गाते समय क्या करना चाहिए?

भजन गाते समय शुद्धता का ध्यान रखें, सफेद वस्त्र पहनें और ध्यानपूर्वक देवी माँ का ध्यान करें।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 21 Aug 2026

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