ये प्रार्थना दिल की बेकार नही होगी लिरिक्स भजन ( Ye Prarthana Dil Ki Bekar Nahi Hogi Lyrics in Hindi ) -
ये प्रार्थना दिल की बेकार नहीं होगी
पूरा है भरोसा मेरी हार नहीं होगी
सांवरे जब तूं मेरे साथ है
साँवरे मेरे सर पे तेरा हाथ है
विश्वाश नानी और द्रोपदी का रंग लाया
बहना का भाई बन खुद साँवरा आया
इज़्ज़त ज़माने में शर्मशार नहीं होगी
पूरा है भरोसा मेरी हार नहीं होगी
सांवरे जब तूं मेरे साथ है
सांवरे मेरे सर पे तेरा हाथ है
मेरा आपकी कृपा से सब काम हो रहा है लिरिक्स भजन (Mera Aapki Kripa Se Sab Kaam Ho Raha Hai Lyrics in Hindi ) - Tara Devi New Krishna Bhajan -
हमारे दो ही रिश्तेदार एक हमारी राधा रानी दूजे बांके बिहारी सरकार भजन ( Humare Do Hi Rishtedaar Lyrics in Hindi ) - Bageshwar Dham Sarkar Radha Krishna Bhajan - Bhaktilok
मैं हार जाऊं ये कभी हो नहीं सकता
बेटा अगर दुःख में पिता सो नहीं सकता
बेटे की हार तुम्हें स्वीकार नहीं होगी
पूरा है भरोसा मेरी हार नहीं होगी
साँवरे जब तूं मेरे साथ है
सांवरे मेरे सर पे तेरा हाथ है
जो हार जाते हैं उनको जिताता है
राजू कहे बाबा किस्मत जगाता है
दुनियां में ऐसी तो सरकार नहीं होगी
पूरा है भरोसा मेरी हार नहीं होगी
सांवरे जब तूं मेरे साथ है
सांवरे मेरे सर पे तेरा हाथ है
🙏 भजन का विस्तृत अर्थ और भावार्थ (Lyrics Meaning)
यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन " ये प्रार्थना दिल की बेकार नही होगी लिरिक्स भजन ( Ye Prarthana Dil Ki Bekar Nahi Hogi Lyrics in Hindi ) - New Krishna Bhajan - Bhaktilok" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।
भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।
🔍 भजन का विशेष महत्त्व और आध्यात्मिक लाभ (Significance)
श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।
सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।
🕒 साधना एवं गायन विधि (Chanting Rules)
भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।
भजनों को गाने की सही विधि क्या है?
भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।
क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?
हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।
पाठकों के विचार (0)
भक्ति रस चर्चा में भाग लें