आज का पंचांग (Columbus) | सूर्योदय: ०४:२३ PM | सूर्यास्त: ०५:४४ AM
Krishna Bhajan

कृष्णा कन्हैया छोड़ो मेरी बईया अब घर जाने दो (KRISHNA KANHAIYA CHODO MERI BAIYA AB GHAR JANE DO Lyrics in Hindi) - Krishna Bhajan - Bhaktilok

74 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
आकार:
कंट्रास्ट:

कृष्ण का प्रेम: भक्ति समर्पित भजन

कृष्णा कन्हैया की मधुर लीलाओं का अनुभव करें और भक्ति के रंग में रंग जाएं।

कृष्णा कन्हैया छोड़ो मेरी बईया अब घर जाने दो कृष्णा कन्हैया छोड़ो मेरी बईया अब घर जाने दो कृष्णा कन्हैया छोड़ो मेरी बईया अब घर जाने दो कृष्णा कन्हैया छोड़ो मेरी बईया अब घर जाने दो मुरली की मीठी तान पे, मेरा दिल है दीवाना कृष्णा कन्हैया छोड़ो मेरी बईया अब घर जाने दो कान्हा के संग चमकते, नन्द के जंगल में खेलते गोपियाँ राधा संग तेरा, मुस्काते मौज में बहते कृष्णा कन्हैया छोड़ो मेरी बईया अब घर जाने दो कृष्णा कन्हैया छोड़ो मेरी बईया अब घर जाने दो कृष्णा कन्हैया छोड़ो मेरी बईया अब घर जाने दो राधा के संग चले तेरा, प्यार का रंग भरे तेरा मूर्तियों की सजावट से, दीवे जलाने वाले तेरा कृष्णा कन्हैया छोड़ो मेरी बईया अब घर जाने दो कृष्णा कन्हैया छोड़ो मेरी बईया अब घर जाने दो कृष्णा कन्हैया छोड़ो मेरी बईया अब घर जाने दो नंदन के बाग में खेलते, सबको खुश कर देते तेरा नाम जपते जपते, हम यहाँ पर आकर पुरे दिन जाते कृष्णा कन्हैया छोड़ो मेरी बईया अब घर जाने दो कृष्णा कन्हैया छोड़ो मेरी बईया अब घर जाने दो कृष्णा कन्हैया छोड़ो मेरी बईया अब घर जाने दो

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन में भक्त की कन्हैया के प्रति अद्वितीय भक्ति का भाव दर्शाया गया है। इसमें 'कृष्णा कन्हैया छोड़ो मेरी बईया अब घर जाने दो' का अर्थ भक्त का अपने प्रिय भगवान से बिछड़ने का दुख है। यहाँ कन्हैया की मुरली के स्वर की मीठास का उल्लेख किया गया है, जो भक्त के दिल को दीवाना बना देती है। भक्त कन्हैया के साथ नंद के बाग़ में उनकी लीलाओं का एहसास करना चाहता है। यह भजन केवल प्रसन्नता नहीं, बल्कि प्रेम, समर्पण और आत्मा की गहराइयों से जुड़े भावों को भी व्यक्त करता है। भक्त का वात्सल्यपूर्ण निवेदन यह दर्शाता है कि कृष्णा का साथ उसे सुख और शांति प्रदान करता है, जिस कारण वह अब घर लौट जाना चाहता है।

भजन में भक्त का मन कन्हैया के साथ खेलने और राधा की संगति का अनुभव करना चाहता है। भावार्थ में यह देखा जा सकता है कि कृष्ण की लीलाएं, जैसे कि गोपियों के साथ खेलना, सबको आनंदित करती हैं। यहाँ भक्त अपने चिंतन में खोकर सूक्ष्मदर्शी रूप से कृष्ण के अद्भुत प्रेम को अनुभव करता है। भक्त की इच्छा केवल सांसारिक सुख का नहीं, बल्कि आध्यात्मिक उन्नति का भी है। यह भजन भक्त को भावनात्मक रूप से यथार्थता के परे ले जाकर भक्ति के मधुर रस में डुबो देता है, जिसके द्वारा वह कन्हैया की कृपा का अनुभव कर सकता है।

कृष्ण का यह भजन भक्ति मार्ग का एक उत्तम उदाहरण प्रस्तुत करता है। यहाँ भक्त ने भक्ति को ध्यान में रखते हुए भक्ति की गहराई से भगवान के प्रति अद्वितीय प्रेम का संचार किया है। उनकी लीलाएं हमें सत्य, प्रेम और आनंद का परिचय देती हैं। कृष्ण की कथाओं और उनके संग में बिताए लम्हे आत्मा को शांति देते हैं, और भक्त को भक्ति मार्ग पर चलने की प्रेरणा प्रदान करते हैं। इस भजन से भक्त को न केवल आत्म-साक्षात्कार मिलता है, बल्कि आत्मा की गहराइयों में भी एक नई रोशनी का एहसास होता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

कृष्ण की लीलाएं भारतीय धार्मिक साहित्य में एक केंद्रीय स्थान रखती हैं। यह भजन कृष्ण के बाल्यकाल के प्रेम और राधा के प्रति उनके आकर्षण को दर्शाता है, जो भागवत पुराण और महाभारत के अध्यायों में व्यक्त किया गया है। इस भजन का महत्व केवल एक भक्ति गीत के रूप में नहीं है, बल्कि यह भक्तों के लिए कृष्ण के सहज प्रेम को जानने का साधन भी है। भारतीय पौराणिक कथाओं में कृष्ण के जीवन के विभिन्न प्रसंगों का वर्णन किया जाता है, जो भक्तों को प्रेरित करने के लिए हमेशा उपस्थित रहते हैं।

श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें। इस भजन का जाप करने से मानसिक शांति, तनाव में कमी और आत्मिक ऊर्जा में वृत्ति होती है। यह भक्त को सकारात्मकता की ओर प्रेरित करता है और जीवन में सुख एवं संतोष का अनुभव कराने में सहायक होता है। नियमित रूप से इस भजन को गाने से मन और बुद्धि में संतुलन बना रहता है, जिससे आध्यात्मिक विकास में मदद मिलती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जाप सुबह या संध्या समय विशेष लाभकारी माना जाता है। पूजा के लिए दीया जलाना, फूल अर्पित करना और भक्ति भाव से कन्हैया के प्रति मन में प्रेम जगाना आवश्यक है। जाप करते समय एक शांत स्थान पर बैठना चाहिए और ध्यान केंद्रित करना चाहिए, ताकि मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो सके।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

कृष्णा कन्हैया छोड़ो मेरी बईया का क्या अर्थ है?

यह भजन कृष्ण के प्रति भक्त की गहरी भक्ति और प्रेम को दर्शाता है। भक्त भगवान से निवेदन कर रहा है कि वह उसे बिछड़ने का दुख न दे और उसके साथ घर लौटने की अनुमति दे।

कृष्णा कन्हैया कौन हैं?

कृष्ण को सभी प्रकार के प्रेम और भक्ति का अवतार माना जाता है। वे नंद के पुत्र हैं और भारतीय पौराणिक कथाओं में एक प्रमुख देवता हैं, जिनकी लीलाएँ अनंत हैं।

इस भजन का गायन कब करना चाहिए?

इस भजन का गायन सुबह या संध्या के समय करना सर्वोत्तम माना जाता है, जब मन शांत और चिंतन की ओर अग्रसर हो।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 25 Aug 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!