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झुला झुलेली भवानी मईया (Jhula Jhuleli Bhawani Maiya ) - Priti Lata Bhakti Mata Bhajan - BhaktiLok

52 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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भवानी मईया की झूला झुलेली आरती

भक्तों के ह्रदय में बसे भवानी मईया के प्रति अटूट प्रेम को व्यक्त करने वाला यह भजन गाएं।

झुला झुलेली भवानी मईया, झुला झुलेली भवानी मईया। साज सजाया है द्वारे तेरे, साज सजाया है द्वारे तेरे। भवानी, भवानी, भवानी। अंचल में तेरा सुख रखा है, अंचल में तेरा सुख रखा है। माँ तू सबकी रखे प्यारी, माँ तू सबकी रखे प्यारी। हर दुख भंजने वाली, हर दुख भंजने वाली। झुला झुलेली भवानी मईया, झुला झुलेली भवानी मईया। खुशियों की धारा, भक्ति का उजियारा। संग ले आती तू ममता, संग ले आती तू ममता। झूला झुलेली भवानी मईया, झुला झुलेली भवानी मईया। तेरा नाम लूंगी मैं सदा, तेरा नाम लूंगी मैं सदा। सच्ची सच्ची सेवा, सच्ची सच्ची सेवा। झुला झुलेली भवानी मईया, झुला झुलेली भवानी मईया।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

भजन 'झुला झुलेली भवानी मईया' में माता भवानी की महिमा का बखान किया गया है। भजन के पहले चरण में माँ के प्रति भक्त का स्नेह प्रकट होता है जब वह कहता है, 'झुलेली भवानी मईya', इससे भक्त की माँ के प्रति श्रद्धा और प्रेम प्रकट होता है। माता का झूला झुलाना, उन्हें हर दुखों से दूर करने वाली देवी के रूप में प्रस्तुत करता है। भक्त अपनी माँ की गोद में सुख और शांति का अनुभव करता है। यहाँ 'अंचल में तेरा सुख रखा है' पंक्ति से स्पष्ट होता है कि माँ भवानी की ममता में किस प्रकार सभी सुख समाहित हैं। यह भजन उन भक्तों के लिए अटूट विश्वास का प्रतीक है, जो माता को हर संकट में याद करते हैं।

भावार्थ की दृष्टि से यह भजन भक्त के ह्रदय की गहराईयों में छिपे प्रेम और भक्ति को उजागर करता है। 'खुशियों की धारा, भक्ति का उजियारा' पंक्ति में भक्त माँ के प्रति अपनी भक्ति को उजागर कर रहा है। माँ का नाम लेने से ही भक्त के सभी दुख और परेशानियाँ दूर हो जाती हैं। संतों का मानना है कि ऐसे भजन सुनने से मन को शांति और स्थिरता प्राप्त होती है। यहाँ भक्त न केवल अपनी प्राथना व्यक्त करता है बल्कि माँ से सच्चे श्रवण एवं सेवा की भी कामना करता है। यह भजन जीवन के हर पहलू में माता की ममता और प्रेम का अनुभव कराने का प्रयास करता है।

इस भजन में भक्ति मार्ग का एक गहरा संदेश छिपा है। भक्त का अपने भगवान के साथ जुड़ने का प्रयास और उनकी कृपा प्राप्त करने की आकांक्षा इस भजन के माध्यम से स्पष्ट होती है। 'सच्ची सच्ची सेवा' की बात करते हुए भक्त यह जताता है कि भक्ति केवल पूजा तक सीमित नहीं, बल्कि यह जीवन के सभी पहलुओं में अपनी माँ की कृपा को अनुभव करने का एक साधन है। यहाँ भक्ति केवल क्रिया नहीं, बल्कि एक भावना है, जो भक्त की आत्मा को शुद्ध करती है। यह भजन हमें उन गुणों के बारे में सोचने की प्रेरणा देता है, जो हमें माता भवानी के प्रति समर्पित और प्रेममय बनाते हैं।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन मातृत्व की अद्वितीय भावना का प्रतीक है। हिंदू धर्म में माता भवानी को साक्षात शक्ति, करुणा और सुरक्षा का स्वरूप माना जाता है। भारतीय पौराणिक कथाओं के अनुसार, देवी दुर्गा ने असुरों का संहार कर धर्म की स्थापना की। यह भजन 'झुला झुलेली भवानी मईया' तब और भी महत्वपूर्ण हो जाता है जब हम यह समझते हैं कि मां अपने भक्तों को संकट से निकालने के लिए सदैव तत्पर रहती हैं। देवी भवानी की उपासना से भक्त को न केवल आध्यात्मिक शांति मिलती है, बल्कि उसके जीवन में सुख-दुख के गुणात्मक असंतुलन को भी संतुलित करने की शक्ति मिलती है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का नियमित जाप करने से मानसिक शांति, आंतरिक संतुलन और सकारात्मकता का संचार होता है। भक्त को मनोकामनाएँ पूर्ण करने की भावना और भक्ति में गहराई का अनुभव होता है। यह भजन केवल मनोरंजन तक सीमित रहकर, भक्त के आत्मिक जीवन में परिवर्तन लाने में सक्षम है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

झुला झुलेली भवानी मईया का जाप सुबह के समय या संध्या समय करना श्रेष्ठ रहता है। इस दौरान पूजा स्थल को स्वच्छ रखें, दीपक जलाएं और प्रति कृतज्ञता से भरे मन के साथ माँ की तस्वीर के सामने बैठें। ध्यान और भक्ति से भरी मानसिकता से इस भजन का स्वरों में गान करें। यह निश्चित रूप से आपको शांति एवं सुख का अनुभव कराएगा।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

यह भजन किस देवी को समर्पित है?

यह भजन माता भवानी को समर्पित है, जो शक्ति और ममता का प्रतीक हैं। भक्त अपनी अराधना में उन्हें झूला झुलाने के लिए कहते हैं, जो उनके प्रति श्रद्धा दर्शाता है।

झुला झुलेली भवानी मईया का भावार्थ क्या है?

इस भजन में माता भवानी की ममता और करुणा का वर्णन है। भक्त अपने जीवन के दुखों को दूर करने हेतु माँ की गोद में सुख का अनुभव करना चाहता है।

इस भजन का पाठ करने का सही समय क्या है?

भजन का पाठ सुबह या संध्या के समय करना सर्वोत्तम माना जाता है। इस समय मस्तिष्क शांत होता है और मानसिक शांति का अनुभव किया जा सकता है।

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"झुला झुलेली भवानी मईया का भजन भक्तों को माँ की कृपा एवं सुरक्षा का अनुभव कराता है। इसे गाने से मिलती है मानसिक शांति।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 03 Sep 2026

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