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Krishna Bhajan

झूला झूल रहे भगवान नंद जी के अंगना में लिरिक्स (Jhula Jhul Rahe Bhagwan Nand Ji Ke Angana Me Lyrics) - Krishna Bhajan - Bhaktilok

89 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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भगवान नंद जी की भक्ति में झूला झूलना

भगवान नंद जी के प्रेम और आशीर्वाद का अनुभव करें इस भजन के माध्यम से।

झूला झूल रहे भगवान नंद जी के अंगना में, श्यामल रंग गोपाल बजाते बांसुरी मधुर गाना में। खुशियों की झूली सजाते नंदकुमार खड़े हैं, खुशियाँ बाँधते सभी संग संग में। झूला झूल रहे भगवान नंद जी के अंगना में, श्यामल रंग गोपाल बजाते बांसुरी मधुर गाना में। ताल पर ताल देते बृज के ग्वाल ग्वालिन, नंदनंदन की मस्ती में झूमते सभी आस-पास के। सुरों में सुर मिलाते, गा रहे हैं सगाई में, नंदनी नंद बने भगवान, उदित होते सब माँ गोकुल। झूला झूल रहे भगवान नंद जी के अंगना में, श्यामल रंग गोपाल बजाते बांसुरी मधुर गाना में। हर्षित होकर गोपियाँ झूमती होंगी संग में, यशोदा ने भी गोपाल को उलझा रखा मस्ती में। गोपियाँ गाते गीत भक्ति के, सभी मिलकर लड़ने जाते, नंद का यह अनोखा झूला, आनंद का है एहसास हमारा। झूला झूल रहे भगवान नंद जी के अंगना में, श्यामल रंग गोपाल बजाते बांसुरी मधुर गाना में।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन में भगवान नंद जी के अंगना में झूला झूलने की स्थिति का वर्णन किया गया है, जो भक्ति, आनंद और श्रद्धा का प्रतीक है। भक्त अपनी भक्ति को नंदकुमार के रूप में दर्शाते हैं, जो श्यामल रंग में हैं और बांसुरी का मधुर गान गा रहे हैं। यहाँ 'झूला' मात्र एक भौतिक वस्तु नहीं, बल्कि भक्ति का प्रतीक है, जो चारों ओर प्रेम और आनंद की लहर फैलाता है। यह भजन नंद जी की दिव्यता और उनके प्रति अनन्य प्रेम को जताता है। भक्तों की खुशी और उल्लास में वे स्वयं को भावनात्मक रूप से जोड़ते हैं।

भजन में गोपियों और अन्य भक्तों का उत्साह स्पष्ट है, जो भगवान नंद जी के संग गाकर अपनी भक्ति को प्रकट करते हैं। उनका झूमना और गाना सभी की खुशी को बयां करता है। यह भजन नंद जी की मस्ती और भोलेपन का प्रतीक है, जिसमें भक्त अपनी सारी चिंताओं को भूलकर केवल उनके आनंद में लीन हो जाते हैं। यह भावार्थ हमें सिखाता है कि भक्ति में लीन होने से जीवन की विपत्तियों का मुकाबला किया जा सकता है।

इस भजन के माध्यम से भक्ति मार्ग की सुंदरता प्रकट होती है। यह बताता है कि भक्ति केवल विधि-विधान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भावनाओं, प्रेम और संघ का भी समावेश है। यह व्यक्त करता है कि जब भक्त अपनी भावनाओं को भगवान के प्रति प्रकट करते हैं, तब सृष्टि में आनंद और प्रेम का संचार होता है। ऐसे भक्तों के लिए यह भजन मार्गदर्शक है, जो जीवन में नंद जी की कृपा को अनुभव करते हैं।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

भगवान नंद जी का बोलबाला भारतीय संस्कृति में बहुत महत्वपूर्ण है। उन्हें भगवान कृष्ण के पालक के रूप में पूजा जाता है। पुराणों में वर्णित है कि नंद जी ने भगवान श्री कृष्ण को प्रेम और आशीर्वाद दिया। ब्रज क्षेत्र की कथा में नंद जी का स्थान आदर्श पिता का है, जो अपने पुत्र की भक्तों के बीच मस्ती भरे कार्यों को अपने गोकुल में बढ़ावा देते हैं। यह भजन नंद जी की कृपा के प्रति आभार व्यक्त करता है, जो भक्तों की आत्मा को आनंद से भर देता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन को गाने से मन में शांति और आनंद का अनुभव होता है। यह तनाव को कम करता है और मन को सकारात्मकता से भरता है। भक्त इसे गाने से दिव्य ऊर्जा प्राप्त करते हैं, जिससे उनकी भक्ति का स्तर उठता है। नियमित रूप से इस भजन का पाठ करने से मानसिक स्थिरता और आध्यात्मिक उन्नति में सहायता मिलती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

यह भजन गाते समय सुबह या शाम का समय सबसे उपयुक्त रहता है। पूजा स्थल पर एक दीया जलाएं और भगवान की तस्वीर के समक्ष पुष्प अर्पित करें। भावपूर्ण मन और समर्पण के साथ बैठकर भजन का पाठ करें, जिससे आपके हृदय में भक्ति की भावना जाग्रत हो सके।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

भगवान नंद जी कौन हैं?

भगवान नंद जी भगवान कृष्ण के पिता हैं, जिनका स्थान हिंदू धर्म में अत्यधिक महत्वपूर्ण है। उन्हें गोकुल में प्रेम और ममता का प्रतीक माना जाता है।

झूला झूलने का क्या महत्व है?

झूला झूलने का महत्व भक्ति, आनंद और प्रेम को दर्शाना है। यह दर्शाता है कि कैसे भक्त अपने भावों के साथ भगवान के करीब महसूस करते हैं।

इस भजन का पाठ कब करना चाहिए?

इस भजन का पाठ सुबह या शाम के समय करना उत्तम होता है, जब मन शांत हो और भक्ति की भावना प्रबल हो।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 21 Aug 2026

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