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Krishna Bhajan

मेरे बाँके बिहारी सांवरिया तेरा जलवा कहाँ पर नहीं है भजन लिरिक्स (Mere Banke BIhari Sanwariya Tera Jalva Kaha Par Nahi Hai Lyrics in Hindi) - Shyam Bhajan Deepa Didi - Bhaktilok

94 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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कन्हैया का अनुपम जलवा: भक्ति का गीत

इस भजन का पाठ करें और कन्हैया की भक्ति में लीन होकर उनके दिव्य जलवे का अनुभव करें।

मेरे बाँके बिहारी सांवरिया तेरा जलवा कहाँ पर नहीं है आँख वालों ने तुमको है देखा कान वालों ने तुमको सुना है तेरी दर्शन उसी को हुआ है जिसकी आँखों पे पर्दा नहीं है मेरे बाँके बिहारी सांवरिया तेरा जलवा कहाँ पर नहीं है.. लोग पीते है पी पी के गिरते एक बार तो कन्हैया हम जैसों से मिलो भजन लिरिक्स (Ek Baar Toh Kanhaiya Hum Jaiso Se Milo Lyrics in Hindi) - Raju Maharaj Krishna Bhajan - Bhaktilok जिया नहीं लागे कही तेरे बिन सँवारे भजन लिरिक्स (Jiya Nahi Lage Tere Bin Sanware Lyrics in Hindi) - Krishna Bhakti Uma Lahri Krishna Bhajan - Bhaktilok हम भी पीते है गिरते नहीं है हम भी पीते है भगती का प्याला यह अंगूरी पानी नहीं है मेरे बाँके बिहारी सांवरिया तेरा जलवा कहाँ पर नहीं है... लोग मंदिर है मश्जिद है जाते वहा राधे और कृष्ण है गाते राधे कृष्ण तो मन में वसे है ये किसको पता ही नहीं है मेरे बाँके बिहारी सांवरिया तेरा जलवा कहाँ पर नहीं है... सुबह शाम है तुम को पुकारा तेरे नाम का लेके सहारा तेरे भक्तो ने जब भी पुकारा तेरे आने में देर नहीं है मेरे बाँके बिहारी सांवरिया तेरा जलवा कहाँ पर नहीं है... मेरे बाँके बिहारी सांवरिया तेरा जलवा कहाँ पर नहीं है वो नज़र हमें मिल जाए तेरे दर्शन पा जाएँ भजन लिरिक्स (Vo Nazar Hame Mil Jaaye Tere Darshan Paa Jaaye Lyrics in Hindi) - Anjali Sagar Shyam Bhajan - Bhaktilok नैनन में श्याम समाए गयो लिरिक्स भजन (Nainan Me Shyam Samay Gayo Lyrics in Hindi) - Shri Krishna Bhajan THAKUR JI MAHARAJ - Bhaktilok साँवरे सरकार को प्रणाम भजन लिरिक्स (Saanware Sarkar Ko Pranam Lyrics in Hindi) - Raj Pareek Shyam Bhajan - BhaktiLok

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मुख्य विषय भगवान श्री कृष्ण के अनंत रूप और उनके जलवे का बखान करना है। पहली पंक्ति में कहा गया है, 'मेरे बाँके बिहारी सांवरिया, तेरा जलवा कहाँ पर नहीं है', जो ये दर्शाता है कि भगवान कृष्ण का आकर्षण हर जगह व्याप्त है। भजन में ये विचार प्रस्तुत किया गया है कि केवल आँख वालों ने ही उन्हें देखा है, इसी तरह कान वालों ने उन्हें सुना है। यहाँ यह संकेत है कि भगवान के दर्शन केवल आँखों से नहीं, बल्कि आंतरिक दृष्टि से भी हो सकते हैं। दर्शन का अनुभव उसी को होता है, जिसकी आँखों पर कोई पर्दा नहीं है। यह दर्शाता है कि भक्ति में जो सच्ची आस्था रखता है, वही भगवान के वास्तविक रूप को देख सकता है।

इस भजन में भक्तों की तड़प और कृष्ण के प्रति प्रेम को भी व्यक्त किया गया है। भजन के अंत में, 'सुबह शाम है तुम को पुकारा, तेरे नाम का लेके सहारा' पंक्ति बताती है कि भक्त भगवान का नाम लेकर हर समय उनका स्मरण करते हैं। यह बात भक्तों के लिए प्रेरणा का स्रोत है कि कैसे हर परिस्थिति में हम भगवान का आश्रय ले सकते हैं। जब हम भगवान को बुलाते हैं, तो वे तुरंत अपने भक्तों के पास पहुँच जाते हैं। और भगवान श्री कृष्ण की उपस्थिति भक्‍तों के लिए सुख और शांति का कारण बनती है।

यह भजन भक्ति मार्ग का एक अद्भुत उदाहरण है, जो हमें कन्हैया की शरण में आने के लिए प्रेरित करता है। कृष्ण भक्ति का अर्थ है सच्चे मन से उनके नाम का जप करना और उनके प्रति समर्पण रखना। यह भजन हमें याद दिलाता है कि भगवान कृष्ण का जादू केवल बाह्य अनुभव नहीं है, बल्कि यह आंतरिक भावना से जुड़ा हुआ है। भक्त अगर सच्चे दिल से भक्ति करते हैं, तो किसी भी स्थिति में उन्हें परमानंद का अनुभव होगा।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का संबंध भगवान श्री कृष्ण की अनंत लीलाओं और उनके भक्तों के प्रति स्नेहBindings से है। पुराणों में भगवान कृष्ण की कथा में उनके अवतार और उनके प्रति भक्ति के महत्व को बखाना गया है। भागवत पुराण में कृष्ण का प्रेम और उनकी लीलाओं का वर्णन हमें बताता है कि वे अपने भक्तों की पुकार का तुरंत उत्तर देते हैं। यह भजन भी इसी संदर्भ में है, जहाँ भक्त अपने आराध्य से प्रार्थना करते हैं और अपने दिल की हार्दिक भावनाओं का आदान-प्रदान करते हैं।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का उच्चारण करने से मानसिक शांति, आध्यात्मिक जागृति एवं प्रेम की गहराइयों में प्रवेश मिलता है। भक्ति में जब हम भगवान के नाम का जप करते हैं, तो इसका सकारात्मक प्रभाव हमारे जीवन में स्पष्टता और उत्साह लाता है। इसमें प्रदर्शन की उत्कृष्टता हमें जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए शक्ति प्रदान करती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का पठन सुबह और शाम दोनों समय किया जा सकता है। दीप जलाकर और अगरबत्ती लगाकर मंदिर में या किसी शुद्ध स्थान पर बैठकर भजन का जाप करें। ध्यान रखें कि मन में केवल भगवान के प्रति भक्ति और प्रेम हो, ताकि सच्चे मन से भजन का अनुभव किया जा सके।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का क्या महत्व है?

यह भजन भगवान श्री कृष्ण के प्रति अटूट प्रेम और भक्ति का प्रतीक है, जिससे भक्त असीम आनंद का अनुभव करते हैं।

कौन से भाव इस भजन में उलिखित हैं?

भजन में प्रेम, समर्पण और आंतरिक दृष्टि के माध्यम से कृष्ण के दर्शन की भावनाएँ व्यक्त की गई हैं।

कृष्ण की भक्ति का कितना महत्व है?

कृष्ण की भक्ति जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाती है और भक्त को आंतरिक शांति प्रदान करती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 18 Aug 2026

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