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Krishna Bhajan

मुरली बजा के मोहना क्यों कर लिया किनारा भजन लिरिक्स (Murli Bajake Mohana Kyo Kar Liya Kinara Lyrics in Hindi) - Shyam Ghan Kab Barsoge Vinod Agarwal Krishna Bhajan - Bhaktilok

70 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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मुरली के स्वर से मोहन का आह्वान

कृष्ण भक्ति में डूबकर, इस भजन के माध्यम से भगवान श्री कृष्ण के प्रति अपनी गहिन भक्ति और प्रेम व्यक्त करें।

मुरली बजा के मोहना क्यों कर लिया किनारा।अपनों से हाय कैसा व्यवहार है तुम्हारा॥ढूंढा गली गली में खोजा डगर डगर में।मन में यही लगन है दर्शन मिले दुबारा॥मुरली बजा के मोहना...एक बार तो कन्हैया हम जैसों से मिलो।जिया नहीं लागे कही तेरे बिन सँवारे॥मधुबन तुम्ही बताओ मोहन कहाँ गया है।कैसे झुलस गया है कोमल बदन तुम्हारा॥मुरली बजा के मोहना...यमुना तुम्हीं बताओ छलिया कहाँ गया है।तूँ भी छलि गयी है कहती है नील धारा॥मुरली बजा के मोहना...दुनियां कहे दीवानी मुझे पागल कहे जमाना।पर तुमको भूल जाना हमको नहीं गवांरा॥मुरली बजा के मोहना...वो नज़र हमें मिल जाए तेरे दर्शन पा जाएँ।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन के माध्यम से भक्त भगवान श्री कृष्ण के प्रति अपने प्रेम और लगन का इजहार करते हैं। 'मुरली बजा के मोहना क्यों कर लिया किनारा' का अर्थ है कि भक्त श्री कृष्ण से दूर होने का दुःख वे बयान कर रहे हैं। जब उन्होंने अपनी मुरली (बांसुरी) बजाई, तब भक्तों ने उसका जादू अनुभव किया, परंतु अब वह दूर हैं, जिसके कारण भक्त उदास हैं। 'अपनों से हाय कैसा व्यवहार है तुम्हारा' से यह स्पष्ट होता है कि भक्त अपने प्रियतम से एक कुटिलता का अनुभव कर रहे हैं। यहाँ पर भक्त की व्यथा है कि वे जीवन के हर मोड़ पर कृष्ण के दर्शन की आशा में भटकते हैं। उनके इस भाव में एक विशेष लगाव है; इससे प्रतीत होता है कि भक्ति के मार्ग में एक साधक को अपने प्रियतम के प्रति कितना प्रेम और समर्पण होना चाहिए।

इस भजन में भक्त की मनोदशा का गहन चित्रण किया गया है। 'जिया नहीं लागे कही तेरे बिन सँवारे' से प्रदर्शित होता है कि मात्र भगवान के दर्शन न करने पर भक्त का मन और प्राण अधूरे महसूस करते हैं। कृष्ण सन्देश देते हैं कि भक्ति का रास्ता अद्वितीय और शक्तिशाली है, लेकिन इस रास्ते में भावनाओं का आहत होना स्वाभाविक है। विशेषकर जब भक्त निरंतर श्री कृष्ण के प्रेम में आकंठ डूबा रहता है, तो उसे हर पल का बेताबी इंतज़ार रहता है। यह भजन भक्त के कष्ट और प्रेम को प्रकट करता है, जिसने भक्त को अपने प्रियतम को खोजने के लिए गली-गली भटकने को मजबूर किया।

भक्ति मार्ग का एक प्रमुख तत्व है प्रेम, जो न केवल आत्मा को शुद्ध करता है, बल्कि इसे शक्ति से भर देता है। इस भजन में भक्त का कृष्ण के प्रति अनुपम प्रेम दर्शाया गया है। 'मधुबन तुम्ही बताओ मोहन कहाँ गया है' के माध्यम से भक्त की यह चाह है कि वे श्री कृष्ण के स्थान का ज्ञान पाएं, जो भक्ति का वास्तविक स्वर्णिम मार्ग है। भक्त की खोज और कृष्ण का अदृश्य रहना यह दर्शाता है कि दीदार हासिल करने के लिए दृढ़ संकल्प और अटूट प्रेम की आवश्यकता होती है। इसका संदेश है कि प्रेम की कमी, मानवता के संघर्ष के केंद्र में है, और इसीलिए भक्त को अपनी आस्था को अभूतपूर्व रखना होगा।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का महत्व पौराणिक संदर्भों में भी देखा जा सकता है, जहाँ भगवान श्री कृष्ण ने अपनी मुरली के माध्यम से भक्तों को मोहित किया था। श्री कृष्ण का जीवन गीता में वर्णित है, जो भक्ति मार्ग की महानता और महत्व को दर्शाने वाला है। महाभारत और भागवत पुराण में श्री कृष्ण की लीलाएँ इस भजन के भाव को और अधिक गहनता से प्रस्तुत करते हैं। यह भजन भक्तों को उनके गहरे आस्था के सफर में प्रेरित करने के साथ-साथ श्री कृष्ण की दिव्यता को अनुभव करने का माध्यम भी प्रदान करता है। भक्तों की यह भावना उन्हें उनके जीवन के संघर्षों से उभरने में मदद करती है और उन्हें भगवान के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा देती है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का नियमित पाठ करने से मानसिक शांति प्राप्त होती है। यह न केवल भक्त के मन को सजग रखता है, बल्कि उसकी आध्यात्मिक प्रगति को भी सुनिश्चित करता है। भजन सुनने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जिससे भक्त के मन में प्रेम और उत्साह की भावना के साथ-साथ संतुलन भी बना रहता है। इसके अतिरिक्त, मन की शांति और भगवान के प्रति आस्था को स्थिर करने में भी यह भजन अत्यंत लाभकारी सिद्ध होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जप प्रात: या संध्या काल में करना सर्वोत्तम रहता है। इस दौरान एक दीप जलाना, फूलों का आर्पण करना और मृदु स्वर में भजन गाना विधिपूर्वक किया जा सकता है। भक्त को ध्यान केंद्रित करने के लिए एक शांत स्थान चुनना चाहिए और ध्यान लगाते हुए भगवान श्री कृष्ण की छवि में रम जाने का प्रयास करना चाहिए। सही मानसिकता में रहकर भजन का पाठ करने से इसके लाभ और अधिक गहन होते हैं।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

क्या यह भजन विशेष अवसरों पर गाने के लिए है?

यह भजन श्री कृष्ण की भक्ति को व्यक्त करने के लिए है और इसे प्रतिदिन गाया जा सकता है, विशेष अवसरों और त्योहारों पर इसकी महत्ता और बढ़ जाती है।

क्या इस भजन के विशेष लाभ हैं?

इस भजन का नियमित पाठ भक्तों को मानसिक शांति, प्रेम और आत्मिक बल प्रदान करता है, जिससे जीवन की चुनौतियों का सामना करने में सहायता मिलती है।

इस भजन का इतिहास क्या है?

यह भजन भक्तों की उस गहन भावनाओं को दर्शाता है जो श्री कृष्ण के प्रति लगन एवं प्रेम को उजागर करता है, जो भारतीय भक्ति साहित्य का अनमोल हिस्सा है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 27 Aug 2026

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