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Krishna Bhajan

साँवरिया क्यों हमे इतना सताकर मुस्कुराते हो भजन लिरिक्स (Sanwariya Kyu Hame Itna Sata Kar Muskurate Ho Lyrics in Hindi) - Shyam Bhajan - Bhaktilok

76 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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कृष्ण की लीलाएँ: प्रेम भक्ति का अद्भुत गीत

भक्तों का हृदय छू लेने वाली इस भक्ति भजन का गान करें और श्री कृष्ण की अनंत प्रेम लीलाओं का अनुभव करें।

साँवरिया क्यों हमे इतना सताकर मुस्कुराते होहमारी जान जाती हैमुरलियाँ तुम बजाते हो।।उड़ा दी नींद रातों कीहमारा दिल चुराकर केबता दो राज ए दिल अपनाथके हम तो मनाकर केसजा देकर के भी हमकोहमसे आँखे चुराते हो।।तुम्हारा प्यार पाने कोअपना सबकुछ लुटा बैठेदिए जो गम जमाने नेउन्हें भी हम भुला बैठेधरोहर लूट गई सारीप्यार क्यों ना जताते हो।।अपने रुतबे का ऐ मोहनगरुर इतना नहीं अच्छामनाकर तुमको मानेंगेइरादा है नहीं कच्चासुना है प्रेम की خاطرप्रभु तुम दौड़े आते हो।।साँवरिया क्यों हमे इतनासताकर मुस्कुराते होहमारी जान जाती हैमुरलियाँ तुम बजाते हो।।साँवरिया क्यों हमे इतनासताकर मुस्कुराते होहमारी जान जाती हैमुरलियाँ तुम बजाते हो।।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन के माध्यम से भक्त भावुकता से श्री कृष्ण से अपनी अनकही प्रेम कथा को बयां कर रहे हैं। 'साँवरिया क्यों हमे इतना सताकर मुस्कुराते हो' वाक्य में भक्त श्री कृष्ण की माया की ओर इंगित कर रहे हैं। यहाँ प्रेम में विरह की गहरी भावना व्यक्त की गई है, जहाँ भक्त ये महसूस कर रहा है कि भगवान उनसे दूर हो रहे हैं, उनके द्वारा उन्हें सताने के बावजूद वे मुस्कुराते हैं। यह भजन इस मनोदशा को दर्शाता है जब भक्त कृष्ण के द्वारा दी जाने वाली प्रेम की लहरों में आरोपित होते हैं, हालाँकि दुःख और कठिनाईयों से परिपूर्ण। भक्त का दिल चुराकर, मुंह मोड़ लेने के वाक्य से यह संकेत मिलता है कि कृष्ण के प्रति लगाव भले ही कष्टकारी हो, फिर भी उसका आनंद भक्त गण लेते हैं।

भावार्थ की दृष्टि से, यह भजन एक आत्मीय संवेदनशीलता को प्रस्तुत करता है। भक्त कहता है कि, 'तुम्हारा प्यार पाने को अपना सबकुछ लुटा बैठे' यह दिखाता है कि कृष्ण की भक्ति के लिए भक्त तैयार हैं अपने सम्पूर्ण अस्तित्व को त्यागने के लिए। यह एक गहरी समझ का प्रतीक है कि भक्ति में सच्चा प्रेम क्या होता है। भक्त के अनुभव को 'धरोहर लूट गई सारी' वाक्य से समझा जा सकता है। यह दर्शाता है कि भक्ति के मार्ग में कई बार व्यक्ति को अपने प्रियजनों या सांसारिक वस्तुओं का त्याग करना पड़ सकता है। यहाँ प्रेम की एक और विशेषता रेखांकित की गई है - उसका व्यवहारिक स्वरूप।

इस भजन में भक्ति मार्ग की गहराई को दर्शाया गया है। भक्त की श्रद्धा और भक्ति के ये अभिव्यक्तिकरण 'प्रभु तुम दौड़े आते हो' से परिलक्षित होते हैं। यहाँ भक्त का विश्वास है कि यदि प्रेम शुद्ध है, तो श्री कृष्ण स्वयं ही अपने प्रेमियों के पास आएंगे। यह विश्वास भक्ति का सर्वोच्च पायदान है। भक्ति में समर्पण, प्रेम, और श्रद्धा के मूल्य को समझा जाता है। यह भजन दर्शाता है कि भक्ति केवल सुख के पल को नहीं, बल्कि कष्ट के क्षणों को भी अपनाने का एक साधन है। भक्त की रुदन की भाषा केवल उसके दुःख का प्रतीक नहीं है, बल्कि उसकी अपरिभाषित प्रेम की गहराई को भी प्रदर्शित करती है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

कृष्ण की लीलाएँ भारतीय संस्कृति में विशेष स्थान रखती हैं। 'साँवरिया क्यों हमे इतना सताकर मुस्कुराते हो' भजन का महत्व तब और बढ़ जाता है जब हम इसे भागवत पुराण, महाभारत और गीता से जोड़कर देखते हैं। ये ग्रंथ कृष्ण के प्रेम, अनेक लीलाओं और उनके प्रति भक्ति के महत्व को उजागर करते हैं। श्री कृष्ण की लीलाएँ सम्पूर्ण विश्व के लिए शिक्षाप्रद रहस्य और जीवन जीने की शैली हैं। भक्त का प्रेम और समर्पण इस भजन के द्वारा ऐसा अनुभव कराया जाता है, जिससे व्यक्ति आत्मिक शांति और संतोष की प्राप्ति कर सकता है।

श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें। इस भजन का श्रवण और गायन मन को शांति, सुकून तथा आध्यात्मिक उत्कर्ष प्रदान करता है। मानसिक तनाव और अनिद्रा की समस्याओं से मुक्ति पाने में यह भजन सहायक हो सकता है। साथ ही, प्रेम के भाव बढ़ाने और जीवन में सकारात्मकता लाने के लिए इसे गाया जा सकता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का पाठ सुबह या संध्या के समय करना अत्यंत लाभकारी होता है। पूजा स्थल पर दीप जलाएं, पुष्प अर्पित करें और कृष्ण की मूर्ति के समक्ष बैठकर भक्ति भावना से भजन गायन करें। मन को एकाग्र करते हुए भावनाओं के साथ गाना चाहिए, ताकि भक्ति का अनुभव अधिक गहरा हो सके।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का उद्देश्य क्या है?

इस भजन का मुख्य उद्देश्य श्री कृष्ण के प्रति अपनी भावनाओं को व्यक्त करना और भक्त की भक्ति का प्रदर्शन करना है। यह भक्ति में प्रेम और समर्पण की गहराई को दिखाता है।

भजन में 'साँवरिया' किसे संदर्भित किया गया है?

'साँवरिया' शब्द से श्री कृष्ण का सन्देश है, जो भक्तों के लिए एक आकर्षण और प्रेम का प्रतीक है। यह दर्शाता है कि वे भक्त के हृदय में बसे हुए हैं।

भजन का मानसिक स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव है?

इस भजन का गायन करने से मानसिक शांति, सकारात्मकता, और मानसिक थकान का निवारण होता है। भक्त को आत्मिक संतोष और सुख की अनुभूति होती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 25 Aug 2026

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