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Krishna Bhajan

यशोमती मैया से बोले नंदलाला लिरिक्स (Yashomati Maiya Se Bole Nandlala Lyrics in Hindi) - Padmini Kolhapure Krishna Bhajan - Bhaktilok

65 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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कृष्ण की लीलाओं का अद्भुत वर्णन

यशोमती मैया से बोले नंदलाला भजन कन्हैया के बाल रूप की मधुर बातें सुनाता है।

यशोमती मैया से बोले नंदलाला लिरिक्स (Yashomati Maiya Se Bole Nandlala Lyrics in Hindi) - यशोमती मैया से बोले नंदलालाराधा क्यूँ गोरी मैं क्यूँ काला |बोली मुस्काती मैया ललन को बतायाकाली अँधेरी आधी रात को तू आया |लाडला कन्हीया मेरा काली कमली वाला इसी लिए काला ||बोली मुस्काती मैया सुन मेरे प्यारेगोरी गोरी राधिका के नैन कजरारे |काले नैनो वाली ने ऐसा जादू डाला इसी लिए काला ||इतने में राधा प्यारी आई बलखातीमैंने क्या जादू डाला बोली इख्लाती |मैया कन्हीया तेरा जग से निराला इसी लिए काला ||

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन में यशोमती मैया और नंदलाला (कृष्ण) के बीच की प्यारी संवाद को प्रस्तुत किया गया है। नंदलाल, जो कन्हैया के नाम से भी जाने जाते हैं, अपनी माँ से पूछते हैं कि वे काले क्यों हैं जबकि राधा गोरी हैं। यशोमती मैया हंसते हुए उन्हें समझाती हैं कि रात के अंधेरे में वे अवतरित हुए थे, जिससे उनका रंग सांवला हो गया। इस संवाद में माँ-बच्चे के स्नेह और कन्हैया की लीला का वर्णन है, जो भक्ति का एक अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करता है। राधा की गोरी रंगत और नंदलाल की सांवली रंगत का यह वार्तालाप भक्ति और प्रेम की सहजता को दर्शाता है।

कृष्ण की बाल लीला को दर्शाते हुए, यह भजन एक अद्भुत भावनात्मक गहराई लिए हुए है। यशोमती मैया का अपने पुत्र के प्रति प्रेम उनके जवाब में साफ झलकता है। जब नंदलाला पूछते हैं, 'क्यों मैं काला हूँ,' तो यह केवल रंग का प्रश्न नहीं, बल्कि उनके अस्तित्व और पहचान का भी एक प्रश्न है। माँ का उत्तर, 'काले नैनों वाली ने ऐसा जादू डाला,' इस बात को दर्शाता है कि प्रेम और भक्ति का जादू ही वस्तुनिष्ठ रंग-रूप से परे है। यह संवाद भक्ति मार्ग का प्रतीक है, जहाँ साधक अपनी अस्थित्व को शाश्वत प्रेम के साथ देखते हैं।

माता यशोदा और नंदलाल के बीच यह संवाद भक्ति मार्ग की गहरी शिक्षाओं को उजागर करता है। यह दर्शाता है कि भक्ति में रंग-रूप का कोई महत्व नहीं होता, बल्कि भक्ति का अहसास और बातें ही सर्वोच्च होती हैं। कृष्ण का काला रंग प्रतीकात्मक है, जो यह दर्शाता है कि भक्ति में सबका स्वागत है, चाहे वो काले हैं या गोरे। यह भजन सिखाता है कि प्रेम और भक्ति के माध्यम से भक्त अपने नकारात्मक अभिव्यक्तियों को भी सकारात्मकता में बदल सकते हैं।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन भारतीय किंवदंतियों और पुराणों से संबंधित है, विशेषकर श्रीमद्भागवत पुराण में वर्णित कृष्ण की बाल लीलाओं से। श्री कृष्ण को गोपाल, नंदलाल और यशोदा नंदन के नाम से पूजा जाता है। वे न केवल भक्तों के लिए एक आदर्श भगवान हैं, बल्कि प्रेम और भक्ति के प्रतीक भी हैं। यह भजन हमें याद दिलाता है कि मातृत्व और बाल लीलाएँ कैसे भक्ति के मार्ग को सरल, सुखद और प्रेममय बनाते हैं।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। भजन का नियमित पाठ मानसिक शांति प्रदान करता है, जिससे भक्त मानसिक तनाव से मुक्त होते हैं। यह भक्ति हृदय को शुद्ध करती है और सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ावा देती है। साथ ही, यह भजन ध्यान और साधना में सहायता करता है, जिससे भक्त की आत्मा में और गहरे अवबोधन संभव होते हैं।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का पाठ सुबह के समय विशेष लाभकारी होता है। ध्यान करते समय एक दीया जलाना और अपने इष्ट देवता का ध्यान करना आवश्यक है। शांत व स्थिर स्थान पर बैठकर भजन का गान करना चाहिए और मन में प्रेम एवं श्रदधा भाव रखने चाहिए।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का महत्व क्या है?

यह भजन कृष्ण की माया, प्रेम एवं भक्ति का अद्भुत वर्णन करता है जहाँ माँ-बेटे के रिश्ते का भी गहरा जुड़ाव है।

कृष्ण के रंग का क्या अर्थ है इस भजन में?

कृष्ण का काला रंग इस बात का प्रतीक है कि प्यार एवं भक्ति की कोई सीमा नहीं होती, ये सब कुछ समाहित कर सकती हैं।

यह भजन किस पुराण से संबंधित है?

यह भजन विशेष रूप से श्रीमद्भागवत पुराण से जुड़ा है, जो कृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन करता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 23 Aug 2026

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