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एक डाल दो पंछी बैठा कौन गुरु कौन चेला भजन लिरिक्स (Ek Dal Do Panchi Baitha Koun Guru Koun Chela Lyrics in Hindi) - Kabir Bhajan Master Rana - Bhaktilok

110 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

एक डाल दो पंछी बैठा कौन गुरु कौन चेला भजन लिरिक्स (Ek Dal Do Panchi Baitha Koun Guru Koun Chela Lyrics in Hindi) - 



एक डाल दो पंछी बैठाकौन गुरु कौन चेला
गुरु की करनी गुरु भरेगा
चेला की करनी चेला रे साधुभाई
उड़ जा हंस अकेला |


माटी चुन-चुन महल बनाया
लोग कहे घर मेरा
ना घर तेराना घर मेरा
चिड़िया रैन-बसेरा रे साधुभाई
उड़ जा हंस अकेला |


कौड़ी कौड़ी माया जोड़ी
जोड़ भरेला थैला
कहत कबीर सुनो भाई साधो
संग चले ना ढेला रे साधुभाई
उड़ जा हंस अकेला |


मात कहे ये पुत्र हमारा
बहन कहे ये वीरा
भाई कहे ये भुजा हमारी
नारी कहे नर मेरा रे साधुभाई
उड़ जा हंस अकेला |


देह पकड़ के माता रोये
बांह पकड़ के भाई
लपट-झपट के तिरिया रोये
हंस अकेला जाई रे साधुभाई
उड़ जा हंस अकेला |


जब तक जीवेमाता रोये
बहन रोये दस मासा
बारह दिन तक तिरिये रोये
फेर करे घर वासा रे साधुभाई
उड़ जा हंस अकेला |


चार गज़ी चादर मंगवाई
चढ़ा काठ की घोड़ी
चारों कोने आग लगाई
फूँक दियो जस होरी रे साधुभाई
उड़ जा हंस अकेला |


हाड़ जले हो जैसे लाकड़ी
केश जले जस धागा
सोना जैसी काया जल गयी
कोई ना आया पैसा रे साधुभाई
उड़ जा हंस अकेला |


घर की तिरिया ढूंढन लागि
ढूंढ फिरि चहुँ देसा
कहत कबीर सुनो भाई साधो
छोड़ो जग की आशा रे साधुभाई
उड़ जा हंस अकेला |


पान-पान में बाँध लगाया
बाद लगाया केला
कच्चे पक्के की मर्म ना जाने
तोड़ा फूल कंदेला रे साधुभाई
उड़ जा हंस अकेला |


ना कोई आताना कोई जाता
झूठा जगत का नाता
ना काहू की बहन भांजी
ना काहू की माता रे साधुभाई
उड़ जा हंस अकेला |


डोढी तक तेरी तिरिया जाए
खोली तक तेरी माता
मरघट तक सब जाए बाराती
हंस अकेला जाता रे साधुभाई
उड़ जा हंस अकेला |


इक तई ओढ़ेदो तई ओढ़े
ओढ़े मल-मल धागा
शाला-दुशाला कितनी ओढ़े
अंत सांस मिल जासा रे साधुभाई
उड़ जा हंस अकेला |


कौड़ी-कौड़ी माया जोड़ी
जोड़े लाख-पचासा
कहत कबीर सुनो भाई साधो
संग चले ना मासा रे साधुभाई
उड़ जा हंस अकेला |


कौड़ी-कौड़ी माया जोड़ी
जोड़ जोड़ भाई ढेला
नंगा आया हैपंगा जाएगा
संग ना जाए ढेला रे साधुभाई
उड़ जा हंस अकेला |


माटी से आया रे मानव
फिर माटी मिलेला
किस-किस साबन तन को धोया
मन को कर दिया मैला रे साधुभाई
उड़ जा हंस अकेला |


माटी का एक नाग बना कर 
पूजे लोग-लुगाया
जिन्दा नाग जब घर में निकले
ले लाठी धमकाया रे साधुभाई
उड़ जा हंस अकेला |


जिन्दे बाप को कोई ना पूजे
मरे बाप पुजवाया
मुट्ठी भर चावल लेकर के 
कौवे को बाप बनाया रे साधुभाई
उड़ जा हंस अकेला |


बेचारे इंसान ओ देखो
अजब हुआ रे हाल
जीवन भर नंग रहा रे भाई
मरे उढ़ाई शाल रे साधुभाई
उड़ जा हंस अकेला |


प्रेम-प्यार से बनते रिश्ते
अपने होय पराये
अपने सगे तुम उनको जानो
काम वक़्त पे आये रे साधुभाई
उड़ जा हंस अकेला |


ये संसार कागज़ की पुड़िया
बूँद पड़े गल जाना
ये संसार कांटो की बाड़ी
उलझ-उलझ मर जाना रे साधुभाई
उड़ जा हंस अकेला |


जीवन धारा बह रही है
बहरों का है रेला
बूँद पड़े तनवा गल जाए
जो माटी का ढेला रे साधुभाई
उड़ जा हंस अकेला |


जिसको दुनिया सब कहे
वो है दर्शन-मेला
इक दिन ऐसा आये
छूटे सब ही झमेला रे साधुभाई
उड़ जा हंस अकेला |












संतों और ऋषियों के आध्यात्मिक इतिहास की गहरी समझ के लिए संत एवं ऋषि ज्ञानकोश अवश्य पढ़ें।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

शिरडी के साईं बाबा को समर्पित यह भजन "एक डाल दो पंछी बैठा कौन गुरु कौन चेला भजन लिरिक्स (Ek Dal Do Panchi Baitha Koun Guru Koun Chela Lyrics in Hindi) - Kabir Bhajan Master Rana - Bhaktilok" सबका मालिक एक होने के सिद्धांत को प्रतिपादित करता है। साईं बाबा का जीवन काल सादगी, प्रेम, सहिष्णुता और मानवता का संदेश देता है। इस भजन की सरल पंक्तियां भक्त को सीधे बाबा के दिव्य आशीर्वाद और करुणा से जोड़ती हैं।

भजन का मुख्य भाव श्रद्धा और सबूरी (धैर्य) का है। साईं बाबा अपने भक्तों को वचन देते हैं कि जो भी उनके द्वार पर आएगा, वह कभी खाली हाथ नहीं जाएगा। बाबा की उदी (भस्म) और उनके वचनों का स्मरण ही इस भजन का सार है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

साईं बाबा के भजनों के संकीर्तन से भक्तों के मन में धर्म-जाति के भेद से ऊपर उठकर प्राणी मात्र के प्रति प्रेम की भावना जागृत होती है। बाबा की पूजा में सादगी और शुद्ध अंतःकरण का विशेष महत्त्व है।

संतों और ऋषियों के आध्यात्मिक इतिहास की गहरी समझ के लिए संत एवं ऋषि ज्ञानकोश अवश्य पढ़ें। साईं बाबा के भजन से पारिवारिक शांति प्राप्त होती है, मन के द्वेष और कलह दूर होते हैं और साधक में संतोष तथा धैर्य का विकास होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

साईं बाबा की आराधना के लिए गुरुवार का दिन विशेष रूप से फलदायी है। साईं बाबा की मूर्ति या चित्र के सम्मुख दीप जलाकर, उदी का तिलक लगाएं और श्रद्धापूर्वक भजन गाएं।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

शिरडी साईं बाबा की उपासना के दो मुख्य स्तंभ क्या हैं?

बाबा ने अपने भक्तों को 'श्रद्धा' (विश्वास) और 'सबूरी' (धैर्य) को जीवन का मूल आधार बनाने की शिक्षा दी थी।

साईं भजनों के संकीर्तन के लिए कौन सा दिन उत्तम है?

गुरुवार (गुरु दिवस) का दिन साईं बाबा के पूजन, व्रत और भजन संकीर्तन के लिए अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है।

साईं बाबा की 'उदी' का क्या महत्त्व है?

उदी बाबा की धूनी की पवित्र भस्म है। भक्तों का अटूट विश्वास है कि उदी धारण करने से शारीरिक बीमारियां और मानसिक कष्ट दूर होते हैं।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 02 Sep 2026

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