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Krishna Bhajan

आज ब्रज में होली रे रसिया भजन लिरिक्स (Aaj Braj Mai Holi Re Rasiya Lyrics in Hindi) - Krishna Bhajan - Bhaktilok

56 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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ब्रज की होली: प्रेम और भक्ति का उत्सव

आज बृज में होली का यह भजन भक्तिभाव से गाया जाता है, सच्चे प्रेम की सरसता को उजागर करता है।

आज बृज में होली रे रसिया।होरी रे रसिया बरजोरी रे रसिया॥अपने अपने घर से निकसीकोई श्यामल कोई गोरी रे रसिया।कौन गावं के कुंवर कन्हियाकौन गावं राधा गोरी रे रसिया।नन्द गावं के कुंवर कन्हियाबरसाने की राधा गोरी रे रसिया।आज बृज में होली रे रसिया......कौन वरण के कुंवर कन्हियाकौन वरण राधा गोरी रे रसिया।श्याम वरण के कुंवर कन्हिया प्यारेगौर वरण राधा गोरी रे रसिया।आज बृज में होली रे रसिया......कौन के हाथ कनक पिचकारीकौन के हाथ कमोरी रे रसिया।कृष्ण के हाथ कनक पिचकारीराधा के हाथ कमोरी रे रसिया।आज बृज में होली रे रसिया......इत ते आए कुंवर कन्हियाउत ते राधा गोरी रे रसिया।उडत गुलाल लाल भए बादलमारत भर भर झोरी रे रसिया।आज बृज में होली रे रसिया......अबीर गुलाल के बादल छाएधूम मचाई रे सब मिल सखिया।चन्द्र सखी भज बाल कृष्ण छविआज बृज में होली रे रसिया......आज बृज में होली रे रसिया।होरी रे रसिया बरजोरी रे रसिया।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन के माध्यम से बृज में मनाए जाने वाले होली के पवित्र उत्सव का वर्णन किया गया है, जिसमें भगवान श्री कृष्ण और राधा का प्रेम केंद्रीय विषय है। 'आज बृज में होली रे रसिया' पंक्ति से स्पष्ट होता है कि भक्ति भाव से इस पावन अवसर पर सभी लोग रंगों में रंग जाते हैं। 'कौन गावं के कुंवर कन्हिया' कहकर भक्तगण श्री कृष्ण की महिमा का गान करते हैं, और यह स्पष्ट करते हैं कि हर गांव में उनके जैसे अनोखे प्रेमी हैं। इस होली में नंद गोकुल के कन्हैया और बरसाने की राधा का विशेष स्मरण किया गया है, जो इस उत्सव को और भी रोचक बनाता है। होली का यह उत्सव प्यार और भक्ति को एक नई ऊँचाई पर ले जाता है, जिसमें व्यक्तिगत एवं सामाजिक आनंद का अनुभव होता है।

इस भजन का भावार्थ प्रेम, भक्ति और सामाजिक एकता को दर्शाता है। 'उडत गुलाल लाल भए बादल' पंक्ति में रंगीन बादलों का चित्रण किया गया है जो इस उत्सव की महक को बढ़ाते हैं। यह पूरे बृज क्षेत्र को एकसाथ लाता है और भक्तों में मिलनसारिता का भाव भरता है। भक्तगण एक-दूसरे को रंग, अबीर और गुलाल से सराबोर कर आनंद का अनुभव करते हैं। इस प्रकार, होली के उत्सव के माध्यम से न केवल भगवान श्री कृष्ण के प्रति भक्ति प्रकट की जाती है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि भक्ति के माध्यम से भावनात्मक और आध्यात्मिक समीकरण कैसा हो सकता है।

इस भजन के दौरान भगवान श्री कृष्ण के प्रति जो भक्ति का भाव व्यक्त होता है, वह भक्ति मार्ग की एक अद्भुत छवि प्रस्तुत करता है। 'कृष्ण के हाथ कनक पिचकारी' जैसी पंक्तियाँ इस बात को दर्शाती हैं कि भक्ति में रंग-रस का समावेश होता है, जो आध्यात्मिक आनंद को बढ़ाने में सहायक है। भक्ति मार्ग में व्यक्तिगत समर्पण और प्रेम को प्रमुखता दी जाती है। यहां, रंगों का उत्सव एक प्रतीक बन जाता है, जो आत्मा की निर्दोषता और प्रेम की शक्ति को दर्शाता है, और भक्तों को जोड़ा रखता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

हिंदू धर्म में होली केवल एक उत्सव ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक जागरूकता का भी प्रतीक है। भक्ति के इस पर्व का उल्लेख पुराणों में भी मिलता है, जहां भगवान कृष्ण और राधा के प्रेम को दर्शाया गया है। विशेषकर 'भागवत पुराण' में भगवान कृष्ण के लीलाओं का वर्णन है, और होली के उत्सव का महत्व यहां समझाया गया है। साथ ही, भक्तों के बीच आपसी भक्ति और प्रेम को बढ़ावा देना होली का मूल उद्देश्य है। यह भजन इस समारोह की सार्थकता को उजागर करता है और हमें अपने कर्तव्यों और प्रेम के प्रति सजग रहने की प्रेरणा देता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन को गाने से मानसिक शांति और स्थिरता का अनुभव होता है। यह भक्ति भाव से भरा हुआ है, जिससे मानसिक तनाव कम होता है, और मन को आनंद मिलता है। नियमित रूप से इस भजन का जाप करने से आध्यात्मिक उन्नति होती है और भक्त का विश्वास और प्रेम भक्ति के प्रति और अधिक गहरा होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का पाठ सुबह के समय करना सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। पूजा के समय एक दीया जलाएं और कुमकुम या फूलों का छोटा सा भोग समर्पित करें। इसके अलावा, क्रोध और राग-द्वेष से मुक्त होकर, मन को शुद्ध कर इस भजन का जप करें। स्थिर आसन में बैठकर या किसी पवित्र स्थान पर ध्यान लगाते हुए इसे गाना चाहिए।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

आज बृज में होली रे रसिया भजन का मुख्य संदेश क्या है?

इस भजन का मुख्य संदेश प्रेम, सौहार्द और भक्ति के जश्न के रूप में होली का महत्व है, जिसमें कृष्ण और राधा का असीम प्रेम प्रकट होता है।

इस भजन का पाठ करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

पाठ के समय मन को केंद्रित करें और किसी भी प्रकार के राग-द्वेष से मुक्त होकर गाएँ। इसके साथ ही पूजा सामग्री तैयार रखना उचित है।

भजन गाने से किन आध्यात्मिक लाभों की प्राप्ति होती है?

भजन गाने से मन में शांति और संतुलन स्थापित होता है, साथ ही यह भक्त को आत्मिक रूप से अधिक गहरा अनुभव प्रदान करती है, जो भक्ति मार्ग की ओर आगे बढ़ाता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 22 Aug 2026

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