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भक्ति रस काव्य व भजन

हमारे साथ श्री रघुनाथ तो किस बात की चिंता लिरिक्स भजन इन हिंदी

47 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind | 2 मिनट पठन समय
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हमारे साथ श्री रघुनाथ तो किस बात की चिंता लिरिक्स भजन इन हिंदी

हमारे साथ श्री रघुनाथ 
तो किस बात की चिंता
शरण में रख दिया जब 
माथ तो किस बात की चिंता
शरण में रख दिया जब 
माथा तो किस बात की चिंता

किया करते हो तुम दिन 
रात क्यों बिन बात की चिंता
किया करते हो तुम दिन 
रात क्यों बिन बात की चिंता

किया करते हो तुम दिन 
रात क्यों बिन बात की चिंता
किया करते हो तुम दिन
रात क्यों बिन बात की चिंता

तेरे स्वामी,
तेरे स्वामी को रहती है, 
तेरे हर बात की चिंता
तेरे स्वामी को रहती है, 
तेरे हर बात की चिंता

हमारे साथ श्री रघुनाथ 
तो किस बात की चिंता
हमारे साथ श्री रघुनाथ 
तो किस बात की चिंता

न खाने की, न पीने की, 
न मरने की, न जीने की
न खाने की, न पीने की, 
न मरने की, न जीने की
न खाने की, न पीने की,
न मरने की, न जीने की

रहे हर स्वास
रहे हर स्वास में भगवान 
के प्रिय नाम की चिंता
रहे हर स्वास में भगवान 
के प्रिय नाम की चिंता

हमारे साथ श्री रघुनाथ 
तो किस बात की चिंता
हमारे साथ श्री रघुनाथ 
तो किस बात की चिंता

विभीषण को अभय वर दे 
किया लंकेश पल भर में
विभीषण को अभय वर दे 
किया लंकेश पल भर में
विभीषण को अभय वर 
दे किया लंकेश पल भर में

उन्ही का हा, उन्ही का हा
उन्ही का हा कर रहे गुण 
गान तो किस बात की चिंता
उन्ही का हा कर रहे गुण 
गान तो किस बात की चिंता

हमारे साथ श्री रघुनाथ तो 
किस बात की चिंता
हमारे साथ श्री रघुनाथ 
तो किस बात की चिंता

हुई भक्त पर किरपा 
बनाया दास प्रभु अपना
हुई भक्त पर किरपा 
बनाया दास प्रभु अपना
हुई भक्त पर किरपा 
बनाया दास प्रभु अपना

उन्ही के हाथ,
उन्ही के हाथ में अब हाथ 
तो किस बात की चिंता
उन्ही के हाथ में अब हाथ 
तो किस बात की चिंता

हमारे साथ श्री रघुनाथ 
तो किस बात की चिंता
हमारे साथ श्री रघुनाथ 
तो किस बात की चिंता

शरण में रख दिया जब 
माथ तो किस बात की चिंता
शरण में रख दिया जब 
माथ तो किस बात की चिंता

किस बात की चिंता, 
अरे किस बात की चिंता
किस बात की चिंता, 
किस बात की चिंता ||

प्रभु श्री राम के आदर्शों और मर्यादा पुरुषोत्तम के सम्पूर्ण चरित्र का रसास्वादन करने के लिए रामायण महाग्रंथ अन्वेषक का उपयोग करें।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 10 Aug 2026

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