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Mahadev Bhajan

भला किसी का कर ना सको तो बुरा किसी का मत करना (Bhla Kisi Ka Kar Na Sako To Lyrics in Hindi) - CHETAWANI BHAJAN SHIV NIGAM - Bhaktilok

121 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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शिव का आशीर्वाद: बुराई से परहेज का पाठ

इस भजन के माध्यम से हम दूसरों के प्रति अच्छे कर्म करने की प्रेरणा प्राप्त करते हैं।

भला किसी का कर ना सको तो बुरा किसी का मत करना पुष्प नहीं बन सकते तो तुम कांटे बन कर मत रहना ॥ बन ना सको भगवान् अगर कम से कम इंसान बनो । नहीं कभी शैतान बनो नहीं कभी हैवान बनो ॥ सदाचार अपना न सको तो पापों में पग ना धरना । पुष्प नहीं बन सकते तो तुम कांटे बन कर मत रहना ॥ सत्य वचन ना बोल सको तो झूठ कभी भी मत बोलो । मौन रहो तो ही अच्छा कम से कम विष ना घोलो ॥ बोलो यदि पहले तुम तोलो फिर मुंह को खोला करना । पुष्प नहीं बन सकते तो तुम कांटे बन कर मत रहना ॥ घर ना किसी का बसा सको तो झोपड़ियां ना जला देना । मरहम पट्टी कर ना सको तो खार नमक ना लगा देना ॥ दीपक बन कर जल ना सको तो अंधियारा ना फैला देना । पुष्प नहीं बन सकते तो तुम कांटे बन कर मत रहना ॥ अमृत पिला ना सके किसी को ज़हर पिलाते भी डरना । धीर्ज बंधा नहीं सको तो घाव किसी के मत करना ॥ राम नाम की माला ले कर सुबह श्याम भजन करना । पुष्प नहीं बन सकते तो तुम कांटे बन कर मत रहना ॥

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन की मूल थीम दूसरों के प्रति दयालुता और सदाचार का पालन करना है। पहले प्रश्न में "भला किसी का कर ना सको तो बुरा किसी का मत करना" में यह संदेश है कि यदि हम किसी की भलाई नहीं कर सकते, तो कम से कम उन्हें हानि नहीं पहुँचाना चाहिए। यह हमें यह भी याद दिलाता है कि अगर हम दूसरों के लिए सकारात्मक नहीं बन सकते, तो नकारात्मकता का हिस्सा बनने का कोई कारण नहीं है। इसके आगे के बोल, "पुष्प नहीं बन सकते तो तुम कांटे बन कर मत रहना", हमारे सामाजिक व्यवहार को दर्शाते हैं। हमसे अपेक्षा की जाती है कि हम कम से कम दूसरों के जीवन में कठिनाईयां न डालें। इसलिए, इस भजन में नकारात्मकता का त्याग और सकारात्मकता का अनुसरण करना सिखाया गया है।

भजन में निहित भावार्थ गहरा है। यह हमें तात्कालिकता में सोचने की खूबी सिखाता है। हमें सोच समझकर बोलने की जरूरत है, जैसे कि "बोलो यदि पहले तुम तोलो फिर मुंह को खोला करना।" मतलब यह है कि हमारे शब्दों का प्रभाव बहुत गहरा हो सकता है, और इसलिए हमें उन्हें सोच-समझकर ही उच्चारण करना चाहिए। "सत्य वचन ना बोल सको तो झूठ कभी भी मत बोलो" हमें यह सिखाता है कि यदि हम सकारात्मक नहीं कर सकते, तो नकारात्मकता में नहीं लिपटना चाहिए। यह प्रवृत्ति मानवता के लिए परिभाषित करती है और हमें एक समर्पित इंसान बनने का सार्थक मार्ग दिखाती है।

इस भजन के माध्यम से सत्य, न्याय और दया के सिद्धांतों को समझाया गया है। भक्ति का यह मार्ग हमें सिखाता है कि यदि हम खुद को ईश्वर का साधक मानते हैं, तो हमारे आचार-विचार में शुद्धता होनी चाहिए। "घर ना किसी का बसा सको तो झोपड़ियां ना जला देना" से यह संकेत मिलता है कि दयालुता और सहानुभूति ही हमारी पहचान होनी चाहिए। यह हमें दूसरों की खुशी में भागीदार बनाने की प्रेरणा देती है। इस प्रकार, यह भजन हमें भक्ति और अनुशासन का मार्ग प्रशस्त करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का संदर्भ हमें भारतीय संस्कृति और धर्म में दी गई नैतिकता पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर प्रदान करता है। इसे सुनते या गाते समय, श्रद्धालु अपने कार्यों और इरादों पर विचार करता है। इस भजन में मानवता के प्रति प्रेम को प्रमुखता दी गई है, जो कि वेदों और उपनिषदों में भी बार-बार उल्लेखित है। इसका संदेश रामायण और महाभारत जैसे महाकाव्यों में भी समान रूप से निहित है, जहाँ संतों ने बाद में जीवन की सच्चाइयों का बल दिया। इस प्रकार, यह भक्ति स्थायी भक्ति मार्ग, मानवता की सेवा और भगवान शिव की कृपा की प्राप्ति का साधन है।

भगवान शिव की महिमा, लिंगोत्पत्ति और पवित्र तीर्थों के विवरण के लिए शिव पुराण का संपूर्ण अध्ययन करें। इस भजन का नियमित जाप करने से मानसिक शांति, आत्मबल, और सकारात्मक विचारों का विकास होता है। यह भक्तों को नकारात्मकता से दूर रखता है और ईश्वर की ओर मोड़ता है। इसके अलावा, यह साधक को आत्मिक बोध और जीवन में सही मार्ग चुनने की क्षमता प्रदान करता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जाप सुबह के समय करना सर्वश्रेष्ठ होता है, जब वातावरण शांति और आध्यात्मिकता से भरा होता है। सुगंधित धूप जलाना, दीपक जलाना, और फुलों की मालाएं चढ़ाना इस पूजन का हिस्सा हो सकता है। ध्यानपूर्वक सुखद आसन में बैठकर और मन को एकाग्र करते हुए इस भजन का उच्चारण करना चाहिए।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?

इस भजन का मुख्य संदेश है कि यदि आप दूसरों के लिए कोई भला कार्य नहीं कर सकते, तो उनसे बुरा करने से बचें।

किस समय में इस भजन का जाप करना चाहिए?

सुबह सूर्योदय के समय इस भजन का जाप करना सबसे उत्तम रहता है, क्योंकि यह दिन की सकारात्मक शुरुआत में मदद करता है।

भजन का अर्थ क्या है?

इस भजन का अर्थ है कि हमें सदा अच्छाई की ओर बढ़ना चाहिए और नकारात्मकता से दूर रहना चाहिए, जैसे कांटों की जगह पुष्प बनने का प्रयास करना।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 02 Sep 2026

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