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भक्ति रस काव्य व भजन

चलो चलो माता वैष्णो के द्वार (Chalo chalo mata vaishno ke dawar Lyrics in Hindi) - Narendra Chanchal Mata Hindi Bhajan - Bhaktilok

79 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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माता वैष्णो की महिमा: भक्ति का मार्ग

माता वैष्णो के प्रति भक्ति और श्रद्धा का उत्कृष्ट भजन, जो हर हृदय को छू लेता है।

चलो चलो माता वैष्णो के द्वार, माता वैष्णो के द्वार चलो चलो। चलो चलो माता वैष्णो के द्वार, माता वैष्णो के द्वार चलो चलो। सबका दुःख हरने वाली, दुर्गा माता की महिमा। नमो नमो माता वैष्णो, सलाम सलाम माता वैष्णो। चलो चलो माता वैष्णो के द्वार, माता वैष्णो के द्वार चलो चलो। हम भूखे तिमिर के प्राणी, माता नैना देवी। नमो नमो माता वैष्णो, सलाम सलाम माता वैष्णो। चलो चलो माता वैष्णो के द्वार, माता वैष्णो के द्वार चलो चलो। पवन पुत्र हनुमान की कृपा से, हर परेशानी को मिटाते जाओ। नमो नमो माता वैष्णो, सलाम सलाम माता वैष्णो। चलो चलो माता वैष्णो के द्वार, माता वैष्णो के द्वार चलो चलो। हम सभी जो बुजुर्ग हैं माता वैष्णो के चरण में। नमो नमो माता वैष्णो, सलाम सलाम माता वैष्णो। चलो चलो माता वैष्णो के द्वार, माता वैष्णो के द्वार चलो चलो।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन में 'चलो चलो माता वैष्णो के द्वार' का जाप करते हुए भक्त माता वैष्णो देवी के दर्शन की लालसा व्यक्त कर रहे हैं। यहाँ पर 'द्वार' के माध्यम से असल में भक्तों का उनके परम स्थान की ओर उन्मुख होना दर्शाया गया है। माता वैष्णो देवी को सबका दुःख हरने वाली बताकर, भक्त अपनी समस्याओं और दुखों से मुक्ति की प्रार्थना करते हैं। 'नमो नमो माता वैष्णो' का उच्चारण करते हुए भक्त माता की महिमा का गुणगान करते हैं और उन्हें अपनी विनम्रता के साथ सच्चे मन से याद करते हैं। इस भजन का रागात्मक स्वर भक्तों को प्रेरित करता है कि वह अपनी कठिनाइयों को मात देते हुए माता के चरणों में समर्पित हों।

इस भजन का भावार्थ भक्तों के भीतर की आस्था और भक्ति को जगाता है। जब भक्त 'चलो चलो' का उच्चारण करते हैं, तब वह शारीरिक और मानसिक यात्रा की शुरुआत करते हैं। यह एक आह्वान है कि वह अपने दुःख और कठिनाईयों से निकलें और माता की शरण में जाएँ। माता वैष्णो देवी जिन्हें देवी दुर्गा का अवतार माना जाता है, उनका स्मरण भक्तों को शक्ति और साहस प्रदान करता है। भक्त जब 'सभी दुख हरने वाली' का गुणगान करते हैं, तब वह अपने हर कष्ट के लिए माता में विश्वास प्रकट करते हैं। इस प्रकार, माता का स्मरण भक्तों के लिए आंतरिक शांति प्राप्त करने का माध्यम बन जाता है।

भक्ति मार्ग का यह भजन भक्तों को सिखाता है कि उन्हें अपने जीवन की समस्याओं का समाधान माता की कृपा से प्राप्त हो सकता है। यह समझना आवश्यक है कि वैष्णो देवी केवल एक देवी नहीं, बल्कि ब्रह्माण के शक्ति रूप का प्रतीक हैं। इस भजन में समाहित धर्म की गहराई यह है कि भक्त अपने अंतर्मन को शुद्ध कर भक्तिभाव से माता की ओर चलें। इस प्रकार का समर्पण व्यक्तिगत मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करता है। भक्त की एकाग्रता, माता की आराधना और श्रद्धा को बढ़ाता है, जो अंततः उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन माता वैष्णो देवी की कथा और उनकी कृपा पर आधारित है, जो देवी स्कंद पुराण में वर्णित है। मान्यता है कि माता वैष्णो ने माँ भक्तों के दुखों का निवारण करने और उन्हें सुख-समृद्धि देने के लिए यह अवतार लिया। माता के भव्य मंदिर, जो कटरा, जम्मू-कश्मीर में स्थित है, वहां भक्तों की निरंतर भीड़ इस सिद्धि का प्रमाण है। भक्त इस भजन को गाकर अपने भीतर की भक्ति को पुनर्जीवित करते हैं, और धार्मिक ग्रंथों में विस्तार से वर्णित माता की महिमा और कृपा को स्मरण करते हैं।

मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें। इस भजन का पाठ करने से मानसिक शांति और सकारात्मकता का अनुभव होता है। भक्तों को धार्मिक अनुग्रह की प्राप्ति होती है, जिससे वे अपने कार्यों में बेहतर परिणाम हासिल करते हैं। इस प्रकार का भजन मानसिक तनाव को कम करने और आत्मविश्वास को बढ़ाने में सहायक होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का पाठ सुबह के समय, सूर्योदय से पहले करना सर्वोत्तम माना जाता है। भक्त को एक शांति प्रद वातावरण में, आसन लगाकर बैठकर और दीप जलाकर माता की आराधना करनी चाहिए। मन में एकाग्रता और समर्पण होना आवश्यक है। इस अनुभव से भक्त माता के दिव्य शक्ति का अनुभव कर सकते हैं।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

यह भजन किसकी महिमा का गुणगान करता है?

यह भजन माता वैष्णो देवी की महिमा का गुणगान करता है, जो दुर्गा का अवतार मानी जाती हैं।

इस भजन के गाने का सही समय क्या है?

इस भजन का पाठ सुबह के समय सबसे अच्छा है, जब वातावरण में शांति और सकारात्मकता होती है।

इस भजन के पाठ से कौन से लाभ होते हैं?

इस भजन का पाठ करने से मानसिक शांति, तनाव में कमी और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 25 Aug 2026

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