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भक्ति रस काव्य व भजन

चुनरिया माँ की रेशमी कोई गोटा लगाओ रे लिरिक्स (Chunariya Maa Ki Reshami Koi Gota Lagao Lyrics in Hindi) - Rekha Garg mata Bhajan - Bhaktilok

54 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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माँ का भव्य स्वागत: चुनरिया एवं भक्ति का संगम

इस भक्ति में माँ के प्रति असीम श्रद्धा और प्रेम को अभिव्यक्त किया गया है।

चुनरिया माँ की रेशमी कोई गोटा लगाओ रे हो मैया रानी आ गयी जयकारा लगाओ रे चुनरिया माँ की रेशमी कोई गोटा लगाओ रे || हाथो में लोटा गंगा जल पानी हो मैया रानी आ गयी सब चरण धुलाओ रे चुनरिया माँ की रेशमी कोई गोटा लगाओ रे || हाथ में थाली दिया और बाती हो मैया रानी आ गयी सब ज्योत जलाओ रे चुनरिया माँ की रेशमी कोई गोटा लगाओ रे || हाथ में थाली चन्दन रोली हो मैया रानी आ गयी सब तिलक लगाओ रे चुनरिया माँ की रेशमी कोई गोटा लगाओ रे || हाथ में थाली फूलो वाली हो मैया रानी आ गयी सब माला पहनाओ रे चुनरिया माँ की रेशमी कोई गोटा लगाओ रे || हाथ में थाली थाली में चुनरी हो मैया रानी आ गयी सब चुनरी चढाओ रे चुनरिया माँ की रेशमी कोई गोटा लगाओ रे

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मुख्य विषय माँ का स्वागत करना है। "चुनरिया माँ की रेशमी कोई गोटा लगाओ रे" की पंक्ति में माँ को चुनरी अर्पित करने का संकेत मिलता है, जो भक्त की भक्ति और श्रद्धा को प्रकट करता है। प्रत्येक stanza में माँ की आराधना के आलंबन का उल्लेख है, जैसे कि गंगा जल, दीप, चंदन, और फूल। यह दर्शाता है कि भक्त माँ का स्वागत करते समय कैसे विभिन्न वस्तुओं से उन्हें सम्मानित करना चाहता है। इससे यह संकेत मिलता है कि माँ को समर्पित प्रत्येक वस्तु में एक विशेष शक्ति और महत्व होता है। माँ की उपस्थिति का एहसास भक्त के लिए अत्यंत संजीवनी होती है, यह भजन भक्त के मन में प्रेम और श्रद्धा जगाता है, जो भक्त को आध्यात्मिकता की ओर अग्रसर करता है।

इस देवी के स्वागत को भक्ति मार्ग का एक उत्तम उदाहरण माना जा सकता है। इसमें भावनाओं को गहराई से व्यक्त किया गया है, जब भक्त कहते हैं 'हो मैया रानी आ गयी', तो यह किसी मां के आगमन से उत्पन्न खुशी का संकेत है। चौकसी से माँ का स्वागत करना, उनके चरणों को धोकर उन्हें पवित्र बनाना, उनके लिए दीप जलाना, ये सभी क्रियाएं प्रेम और आदर के प्रतीक हैं। चुनरी या गोटा जैसे वस्त्रों का प्रयोग प्रेम से भरे इस स्वागत में एक विशेष भावना को दर्शाता है। भक्त के मन में यह भाव होता है कि वे माँ को सोलह श्रृंगार से सजाकर उन्हें प्रसन्न करना चाहते हैं।

यह गीत माँ के प्रति भक्ति और श्रद्धा व्यक्त करता है। भारतीय वैदिक दर्शन में, माँ को जगत जननी माना गया है, और उनका स्वागत करना हमारे संस्कारों का हिस्सा है। इस भजन के माध्यम से भक्ति का मार्ग कैसे प्रदर्शित होता है यह ध्याननीय है। भक्त का मानसिक और आध्यात्मिक रूप से माँ से जुड़ाव उसे संपूर्णता और आंतरिक शांति की ओर ले जाता है। इस प्रकार, यह भजन केवल एक गीत नहीं है, बल्कि भक्ति के मार्ग को समझाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

समग्र रूप से 'चुनरिया माँ की रेशमी' भजन माँ दुर्गा अथवा शक्ति की आराधना में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। भारतीय संस्कृति में देवी-पूजन में विशेष अवसरों पर इस प्रकार भजनों का प्रचार होता है। यह समारोहों में, पूजा-पाठ में, और सामाजिक समारोहों में सक्रिय रूप से गाया जाता है। इससे भक्तों का मन एकजुट होता है और सभी एक सामूहिकता में एकत्र होकर दिव्यता की अनुभूति करते हैं। इसके मूल में माता का पूजन, सामर्य, और जीवन में सकारात्मकता का संचार करना है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का जाप भक्तों को मानसिक शांति, संतुलन, और ध्यान की स्थिति में ले जाता है। गहनता से सुनने या गाने से भक्त को आत्मीय उत्थान और हर्ष की अनुभूति होती है। यह नकारात्मकताओं को दूर करने और सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करने में भी मदद करता है, जिससे भक्तों का जीवन समर्पित और संपूर्ण बनता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन को सुबह या शाम के समय गाने का आदान-प्रदान करते हैं, खासकर उन दिनों में जब विशेष देवी पूजा की जाती है। पूजा करते समय, एक साफ स्थान में दीया जलाना, फूलों की माला अर्पित करना, और माता के चरणों में धूप अथवा अगरबत्ती का उपयोग करना उचित होता है। दिल में श्रद्धा एवं सच्ची भक्तिभाव के साथ इस भजन का उच्चारण करना चाहिए।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

यह भजन माँ के प्रति गहन प्रेम और श्रद्धा का इजहार करता है, जिसमें उनके स्वागत के लिए भक्ति भाव दर्शाए जाते हैं।

क्यों इस भजन में चुनरी का उल्लेख किया गया है?

चुनरी को देवी की पूजा में एक पवित्र वस्त्र माना जाता है, जो माँ की कृपा और संरक्षण का प्रतीक है।

इस भजन का एक सही उच्चारण क्या है?

भले ही यहाँ उच्चारण प्रथाओं का भिन्नता हो, परंतु भक्ति के साथ गाने से इसका प्रभाव और भी ज्यादा बढ़ता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 29 Aug 2026

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