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गौरी के नंदा गजानंद लिरिक्स (Gauri Ke Nanda Gajanand Lyrics in Hindi) - Ganesh Bhajan Naresh Prajapat - Bhaktilok

86 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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गौरी के नंदा: विघ्नहरता गजानंद की आराधना

गणेश के चरणों में भक्ति का यह भजन मंगलकारी शुभता और संरक्षण का निरंतर संचार करता है।

गौरी के नंदा गजानंद लिरिक्स (Gauri Ke Nanda Gajanand Lyrics in Hindi) - गौरी के नंदा म्हारा विघ्न हरो गणराज गजानंद गौरी के नंदा गौरी के नंदा गजानंद || पिता तुम्हारे है शिव शंकर मस्तक पर चंदा माता तुम्हारी पार्वती मा ध्यावे जगत बन्दा गौरी के नंदा गजानंद || मूषक वाहन सुंड सुन्डाला फरसा हाथ ले धार गल वैजन्ती माल बिराजे चढ़े पुष्प गन्धागौरी के नंदा गजानंद || जो नर तुझको नही सुमरता उसका भाग्य मंदा जो नर तेरी करे सेवना उसका चले धंधागौरी के नंदा गजानंद || विघ्न हरण मंगल करण विध्या वर देता कहता भक्त राम भजन से कटे पाप फंदा म्हारा विघ्न हरो...गौरी के नंदा गजानंद ||

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

गौरी के नंदा गजानंद की आरती विशेष रूप से भगवान गणेश की महिमा का बखान करती है। भजन की पहली पंक्ति ‘गौरी के नंदा म्हारा विघ्न हरो’ से स्पष्ट है कि भक्ति का उद्देश्य जीवन के विघ्नों और बाधाओं को दूर करना है। गणेश की उपाधि ‘गजानंद’ उनमें दिखती है, जो सब प्रकार की कठिनाइयों के नाशक हैं। यहाँ माता पार्वती और भगवान शिव का भी जिक्र किया गया है, जिससे पता चलता है कि भगवान गणेश, जिनका संबंध गौरी से है, पारिवारिक और आध्यात्मिक सबंधों का प्रतीक हैं। यह दर्शाता है कि किसी भी भक्त ने अगर ईश्वर की भक्ति तथा नाम स्मरण किया तो उनके जीवन में आने वाले सभी विघ्न दूर हो सकते हैं।

भावार्थ में यह भजन यह संदेश देता है कि जो व्यक्ति भगवान गणेश की आराधना नहीं करता, उसका भाग्य अदृष्ट होता है। गाँवों में लोग मानते हैं कि गणेश जी की उपासना करने से व्यक्ति के धंधे, कार्य और जीवन में मंगल की वर्षा होती है। भजन में कहा गया है कि ‘जो नर तुझको नहीं सुमरता, उसका भाग्य मंदा’, इसका मतलब यह है कि भगवान का स्मरण, भक्ति और सेवा से व्यक्ति के दैहिक, मानसिक और आर्थिक बाधाएँ दूर होती हैं। भक्त जनों ने विश्वास किया है कि गणेश की कृपा से पापों से मुक्त होकर नया मार्गदर्शन मिलता है। प्रेम से भरा यह भजन अंतर्मुखी होकर गणेश जी के आशिर्वाद की प्राप्ति का साधन है।

गौरी के नंदा गजानंद भजन में भक्ति मार्ग का गहन आयाम है। भक्ति एक ऐसा मार्ग है जो व्यक्ति को आत्मज्ञान की ओर ले जाता है। इस भजन के माध्यम से भक्तों का मन स्थिर होता है और तृप्ति के लिए विघ्न हरण करने तथा सुख-समृद्धि के लिए विनम्रता का अहसास कराया गया है। भगवान गणेश अज्ञानता का तिमिर दूर करते हुए ज्ञान और बुद्धि प्रदान करते हैं, जिससे भक्त अपना सही मार्ग चुन सकें। इस भजन में जो भावनाएँ छिपी हैं, वे व्यक्ति को न केवल भक्ति की ओर प्रेरित करती हैं, बल्कि आत्म-विकास में भी सहायक होती हैं।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

गणेश जी को विघ्नहर्ता माना जाता है और यह भजन उनके प्रत्येक भक्त के लिए परम सौभाग्य और सामर्थ्य लाने और सभी कठिनाइयों से उबारने का आश्वासन देता है। हिंदू धर्म ग्रंथों में भगवान गणेश का नाम प्रमुखता से लिया गया है, जैसे कि शिव पुराण और गणेश पुराण में। वह बुद्धि, समृद्धि और भाग्य का द्योतक हैं। भक्त जनों के लिए यह भजन न केवल अपने दिल में उनकी उपासना का भूषण है, बल्कि समस्त पापों के नाश की भी प्रार्थना है। इनलोगों का मानना है कि गणेश की आराधना से जीवन में आने वाली सभी विघ्नों का नाश होता है, और पारिवारिक जीवन में सुख-शांति लौट आती है।

प्रथम पूज्य श्री गणेश जी के जन्म और उनकी कथाओं का संपूर्ण विवरण जानने के लिए ब्रह्म पुराण गणेश महिमा का पाठ करें। गौरी के नंदा गजानंद भजन का प्रतिदिन गायन करने से मानसिक शांति, आत्मिक संतोष तथा भक्ति का अनुभव होता है। यह भजन सोचने की शक्ति को बढ़ाता है और जीवन के सभी विघ्नों को दूर करता है। भक्तों का मानना है कि इस भजन को सुनने और गाने से विभिन्न बाधाएँ समाप्त होती हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जाप इस प्रकार किया जाना चाहिए कि सुबह-सुबह सूर्योदय के समय या संध्या की बेला में शांति से बैठकर किया जाए। इस दौरान मन को शांत कर एक दीया जलाना चाहिए और गणेश जी के चरणों में सुख समृद्धि के प्रतीक फल और मिठाई अर्पित करनी चाहिए। शुद्ध मन से भगवान गणेश को याद करते हुए भजन का गायन करना चाहिए।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

गौरी के नंदा गजानंद भजन का महत्व क्या है?

यह भजन भगवान गणेश की विशेष कृपा और विघ्नों के नाश को दर्शाता है, जिससे भक्तों को जीवन में सुख और समृद्धि प्राप्त होती है।

इस भजन का प्रभाव किस प्रकार महसूस होता है?

इस भजन का प्रतिदिन श्रवण और गायन करने से भक्तों के मन में शांति, धैर्य और सौभाग्य की वृद्धि होती है, जो जीवन की कठिनाइयों को दूर करता है।

इस भजन का सही जाप कब करना चाहिए?

इस भजन का जाप सुबह या संध्या के समय करना उचित होता है, जिससे मन और आत्मा दोनों को शांति प्राप्त होती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 23 Aug 2026

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