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Krishna Bhajan

मैं सूना प्रीतां नाल मुरली मोहन दी लिरिक्स (Mai suna preeta naal murli mohan di Lyrics in Hindi) - radha krishna punjabi bhajan - Bhaktilok

85 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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मुरली मोहन का प्रेमपूर्ण संबोधन

इस भजन में श्री कृष्ण के प्रति गहरी भक्ति और प्रेम का इज़हार किया गया है।

मैं सूना प्रीतां नाल मुरली मोहन दी मैं सूना प्रीतां नाल मुरली मोहन दी चले जामन किनारे ते चले जामन किनारे ते कौन सुने सैंया दासी ते कौन सुने सैंया दासी ते आ बसा ले मैनू मन के पिये आ बसा ले मैनू मन के पिये श्री घनश्याम सांवरे, श्याम सांवरे बले बले बाया रंग ढ़लके जित्थे देखां मयूर बोलिहें उत्थे चाली दासी, ओंथों ओ जियें मैं सूना प्रीतां नाल मुरली मोहन दी

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मुख्य थीम प्रेम और भक्ति है, जो श्री कृष्ण के प्रति समर्पित है। भजन की पहली पंक्ति में देवता को सम्बोधित करते हुए उनकी मुरली और प्रेम को सामने लाया गया है। 'मैं सूना प्रीतां नाल मुरली मोहन दी' का अर्थ है कि मैं अपने प्रिय सखा, मुरली बजाने वाले श्री कृष्ण की लीलाओं को सुनने के लिए तरस रहा हूँ। इन पंक्तियों में यह संकेत दिखता है कि भक्त की आत्मा का कृष्ण के साथ अटूट संबंध है और उसे कृष्ण की संगति का अत्यंत आग्रह है। भजन में यह भाव व्यक्त किया गया है कि भक्त श्री कृष्ण की इन्द्रधनुषी छवि को अपने मन में बसा ले, क्योंकि उनका प्रेम सभी दुखों को हर सकता है।

भावार्थ में यहाँ पर भक्त की व्यथा प्रस्तुत की गई है। 'चले जामन किनारे ते' का अर्थ है कि भक्त उनके प्रेम के लिए किनारे पर खड़ा है और उन्हें अपने पास बुलाने के लिए तरस रहा है। यह दर्शाता है कि प्रेम में दूरी कितनी कठिनाई लाती है। भक्त भगवान को सुनने और उनसे मिलने की खुशी चाहता है। 'बले बले बाया रंग ढ़लके' से यह संकेत मिलता है कि जब श्री कृष्ण का प्रेम भक्त पर बरसता है, तो जीवन में रंग और खुशियाँ भर जाती हैं। इस भजन में भक्त का मन रूपी पक्षी, कृष्ण की मधुर म्यूसिक में मंडराता है।

इस भजन के थियोलॉजिकल पहलू को समझना अत्यंत महत्वपूर्ण है। कृष्णा का व्यक्तित्व भक्ति मार्ग में एक अद्वितीय पहचान रखता है। हिंदू धर्म में कृष्ण को परम प्रेम और आनंद का स्रोत माना गया है। 'श्री घनश्याम सांवरे' कहने से, कृष्ण की दिव्यता और सौम्यता का एहसास होता है। यह भजन भक्त को आत्ममुग्धता और स्थितिभाव प्रदान करता है, और भक्ति के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करता है। भक्तिमार्ग का यह संदेश है कि सच्चे प्रेम की खोज में संसार के मोह से दूर रहना आवश्यक है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन कृष्ण के बागे में प्रेम और भक्ति की गहराई को साझा करता है। भारतीय पौराणिक कथाओं में श्री कृष्ण का नाम प्रेम, करुणा और सखे के रूप में लिया गया है। इस गीत का संदर्भ भागवत पुराण में भी मिलता है, जहाँ भगवान श्री कृष्ण की लीलाएं और उनके भक्तों का स्नेह दर्शाया गया है। भक्तिमार्ग में इस भजन का स्थान विशेष है क्योंकि यह भक्तों को श्री कृष्ण के गुणों की ओर आकर्षित करता है।

श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें। भजन का नियमित पाठ करने से मन की शांति, ध्यान और समर्पण की भावना में वृद्धि होती है। यह भजन आत्मा को ऊँचाई की ओर ले जाने वाला होता है, जिससे मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य में सुधार होता है। भक्त इस भजन को गाकर खुद की आंतरिक शांति को प्राप्त कर सकते हैं।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन की साधना करने के लिए सुबह या शाम का समय सर्वश्रेष्ठ होता है। साधक को एक स्वच्छ स्थान पर दीप जलाना चाहिए और भगवान कृष्ण के चित्र या प्रतिमा के सामने बैठकर भजन का पाठ करना चाहिए। मन को शांत करके एकाग्रतापूर्वक भजन का पाठ करने से भक्ति की गहराई को समझा जा सकता है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?

इस भजन का मुख्य संदेश भगवान श्री कृष्ण के प्रति प्रेम और समर्पण है, जो भक्त की आत्मा की गहराई को छूता है।

कौन सा समय इस भजन का पाठ करने के लिए उचित है?

सुबह या शाम का समय इस भजन का पाठ करने के लिए उपयुक्त होता है, जिससे मन को शांति और ध्यान का अनुभव होता है।

भजन के पाठ से क्या लाभ होता है?

भजन का नियमित पाठ मानसिक शांति, धैर्य और भक्ति में वृद्धि करता है, जो भक्त के आध्यात्मिक जीवन को प्रभावित करता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 23 Aug 2026

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