मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन
शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें
हे गिरधारी कृष्ण मुरारी नैया करदो पार (Hey Girdhari Krishna Murari Naiya Lyrics in HIndi) -
हे गिरधारी
कृष्ण मुरारी नैया करदो पार
खिवईयां बन जाओ
बन जाओ जी
बन जाओ आज खिवईयां
बन जाओ
संकट हारी अर्ज गुजारी
नीले का असवार
खिवईया बन जाओ
नैया करदो पार
खिवईयां बन जाओ...||
कइया रूसा
बेठ्या हो बोली जी
कुछ बोलो जी
रीस करो क्यों टाबरा पे
अखियां तो प्रभु खोलो जी
झुर झुर रोवे मन को पंक्षी
हिवड़े का आधार
खिवईयां
बन जाओ हे गिरधारी
कृष्ण मुरारी
नैया करदो पार
खिवईयां बन जाओ...||
ना रूसिया
न पार पड़े तासु प्रीत
पुरानी है मूलवाया
सरसी सांवरियां
विठुराई क्यों ठानी है
दीना नाथ अनाथ
पुकारे दुखियाँ
थारे द्वार खिवईयां
बन जाओ
हे गिरधारी कृष्ण मुरारी
नैया करदो पार
खिवईयां बन जाओ...||
कुञ्ज बिहारी बनवारी
मंडो माहरो पांचो है
रूप तिहारो कानुड़ा
नैना माहि राचो है
भोला भालो क्यों तो
बोलो बोलो लखदातार
खिवईया
बन जाओ हे गिरधारी
कृष्ण मुरारी
नैया करदो पार
खिवईयां बन जाओ...||
श्याम बहादुर
सेवक सेवा कियो चाकर है
सिरधारा को
जन्म जन्म को साथी हो
केवट यो मझधारा को
कृष्ण कन्हियान
डगमग नैया कीजियो
पार उतार खिवईया
बन जाओ
हे गिरधारी कृष्ण मुरारी
नैया करदो पार
खिवईयां बन जाओ...||
🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ
प्रस्तुत राधा-कृष्ण भजन "हे गिरधारी कृष्ण मुरारी नैया करदो पार (Hey Girdhari Krishna Murari Naiya Lyrics in HIndi) - Shubham Rupam Krishna Bhajan - Bhaktilok" के माध्यम से भक्त और आराध्य के परम संबंध को दर्शाया गया है। वैष्णव संप्रदाय में राधा-कृष्ण का प्रेम लौकिक प्रेम न होकर जीवात्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक है। इस भजन की एक-एक पंक्ति का सार यही है कि भगवान श्री कृष्ण स्वयं राधा रानी के प्रेम के अधीन हैं। बिना राधा के न तो वे मुरली बजाते हैं और न ही गोपी-गोपियों को सुख देते हैं।
भजन के पदों में यह स्पष्ट होता है कि वृंदावन की कुंज गलियों में जब तक 'राधे-राधे' नाम की गूंज नहीं होती, तब तक भगवान श्यामसुंदर का मन भी वहां नहीं रमता। भक्त राधा जी से आग्रह करता है कि वे भी कृष्ण की इस भक्ति और दिव्यता का रहस्य उजागर करें, ताकि एक सामान्य साधक भी कृष्ण प्रेम का अधिकारी बन सके।
🔍 विशेष महत्त्व और लाभ
ब्रह्म पुराण और विष्णु पुराण के अनुसार, भगवान कृष्ण की आराधना से पूर्व राधा जी का नाम स्मरण करना अनिवार्य माना गया है। राधा नाम की महिमा स्वयं कृष्ण गाते हैं। इस भजन को श्रद्धापूर्वक गाने या सुनने से साधक के हृदय में भक्ति रस का संचार होता है और मानसिक विकारों तथा चिंताओं का समूल नाश होता है।
श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें। राधा-कृष्ण भजन के गायन से गृहक्लेश दूर होता है, दांपत्य जीवन में मधुरता आती है और पारिवारिक वातावरण सात्विक बनता है। यदि इसका नियमित संकीर्तन किया जाए, तो साधक को मानसिक एकाग्रता और दिव्य शांति की अनुभूति होती है।
🕒 साधना एवं गायन विधि
इस भजन के संकीर्तन के लिए सर्वोत्तम समय प्रातःकाल (ब्रह्ममुहूर्त) अथवा संध्या आरती के समय का है। गायन के समय दीप प्रज्वलित कर, तुलसी दल अर्पित करें और शुद्ध भाव से युगल सरकार (राधा-कृष्ण) की छवि का ध्यान करें।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
इस भजन के मुख्य आराध्य देव कौन हैं?
इस भजन के मुख्य आराध्य देव युगल सरकार अर्थात भगवान श्री कृष्ण और श्री राधा रानी जी हैं।
राधा-कृष्ण भजन का पाठ किस दिन विशेष रूप से करना चाहिए?
यद्यपि भगवान के नाम संकीर्तन के लिए हर दिन शुभ है, किन्तु एकादशी, पूर्णिमा और शनिवार/रविवार के दिन इसका संकीर्तन विशेष फलदायी माना गया है।
क्या यह भजन पारिवारिक सुख-शांति के लिए सहायक है?
हाँ, राधा-कृष्ण के भक्तिमय भजनों को घर में नियमित रूप से गाने अथवा सुनने से दांपत्य प्रेम बढ़ता है और नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है।
पाठकों के विचार (0)
भक्ति रस चर्चा में भाग लें