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भक्ति रस काव्य व भजन

जब जब मैं तुमको याद करू लिरिक्स (jab jab main tumko yaad karu Lyrics in Hindi) - Kukki Arora Khatu Shyam Bhajan - Bhaktilok

81 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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भगवान श्री कृष्ण की अनोखी स्नेह कथा

यह भजन श्री कृष्ण के अनन्य प्रेम और स्नेह का वर्णन करता है। इसे भक्ति भाव से गाना आवश्यक है।

जब जब मैं तुमको याद करू लिरिक्स (jab jab main tumko yaad karu Lyrics in Hindi) - जब जब मैं तुमको याद करूतुम दौड़े दौड़े आते होये कौन सा रिश्ता ये कौन सा नाताये कौन सा रिश्ता सांवरिया जिसे हर पल आप निभाते हो ||कभी बेटा बन कर आते हो कभी मेरे पिता बन जाते होकभी माँ बन कर मेरे श्याम धनि गोदी में लाड लड़ाते होकभी बेटी बन कर सांवरिया मेरा जग में मान बढ़ाते हो ||कितना अनजान हु मैं बाबा तेरी महिमा जान ना पाता हुहर रूप में मेरे साथ है तू तुझको पहचान ना पाता हुहर सुख में मेरे सांवरिया मेरे सिर पे हाथ फिराते हो ||मेरा जीवन श्याम सवार दियांहर दुःख से मुझे उबार दियांकैसे मैं करू तेरा शुकराना हस्ता खिलता परिवार दियाकुक्की की भगिया में बाबा तुम ही तो फूल खिलाते होये कौन सा रिश्ता सांवरिया जिसे हर पल आप निभाते हो ||

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन की पंक्तियों में भक्त की गहरी आत्मीयता का उद्घाटन होता है। 'जब जब मैं तुमको याद करू, तुम दौड़े दौड़े आते हो' से यह सिद्ध होता है कि जब भी भक्त अपने प्रियतम श्री कृष्ण को याद करता है, तो भगवान उसकी पुकार सुनते हुए तत्क्षण उसकी सहायता के लिए उपस्थित होते हैं। यह एक ऐसी भक्ति का भाव है, जिसमें भक्त को विश्वास है कि भगवान उसके हर सुख-दुख में उसके साथ हैं। 'कभी बेटा बन कर आते हो, कभी मेरे पिता बन जाते हो' से स्पष्ट होता है कि भगवान कृष्ण नरक और स्वर्ग दोनों के पार उसकी सच्चाई और निस्वार्थ प्रेम के साथ एक सखा की तरह साथ निभाते हैं। इस प्रकार, भक्ति की ओर यह एक बुलावा है, जिससे भक्त का संबंध भगवान के साथ इंद्रधनुषी नातों में बंध जाता है।

भावार्थ में, यह भजन भक्त के मन की गहराई को दर्शाता है। 'कितना अनजान हु मैं बाबा, तेरी महिमा जान ना पाता हु' इस भाव में भक्त अपनी सीमाओं का अनुभव करता है, यह मानते हुए कि भक्त की बुद्धि एवं अनुभव भगवान की भक्ति की व्यापकता को ज्ञात नहीं कर सकते। यह राह का एक पहलू है, जहाँ भक्त में विनम्रता का ज्वालामुखी प्रज्वलित होता है। हर बार जब वह भगवान का स्मरण करता है, उस भक्ति के अंदर एक नई पहचान विद्यमान होती है। भगवान के विभिन्न रूपों का स्मरण करना भक्त को अपनी आध्यात्मिक यात्रा को सशक्त बनाता है और उसे उसके जीवन के हर प्रसंग में सांत्वना प्रदान करता है।

इस भजन की गहराई भगवान के विभिन्न रूपों में उनसे प्रेम की अनुगम्यता को दिखाती है। भक्ति मार्ग के सिद्धांतों के अनुसार, यह भजन भक्त के हृदय में प्रेम, श्रद्धा, और समर्पण की एक अद्भुत भावना को उत्पन्न करता है। भगवान कृष्ण का हर रूप भक्त को भक्ति की विविधता का अनुभव कराता है, जैसे 'कभी माँ बन कर', 'कभी पिता बन कर', ये सभी रिश्ते दर्शाते हैं कि दिव्य सत्ता हर रूप में हमारे साथ है। यह भावना ही हमें आत्मिक सुख की ओर अग्रसर करती है और हमें सिद्ध ज्ञान की ओर ले जाती है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का पौराणिक महत्व अति विशेष है। कई पुराणों में भगवान श्री कृष्ण को 'सर्वान्तर्यामी' कहा गया है, जो हर जीव में हैं। इस भजन में भक्त की गहनता और संवेदनाओं का संगम है, जो दर्शाता है कि भगवान के प्रति भावनाओं से भरी भक्ति हमें उनसे जोड़ती है। महाभारत में भी भगवान श्री कृष्ण को भक्तों के विभिन्न रूपों में मदद करने वाला अग्रणी अवतार माना गया है। इस प्रकार, यह भजन भक्तों को ध्यान केंद्रित करने की प्रेरणा देता है और उनके जीवन को आनंदित करता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक लाभ कई प्रकार का है। मानसिक तौर पर, यह भक्ति को सशक्त बनाता है, तनाव को कम करता है और मन में सकारात्मकता लाता है। शारीरिक रूप से, इसका नियमित जाप ऊर्जा को बढ़ाता है और स्वास्थ्य को सुदृढ़ करता है। आध्यात्मिक दृष्टि से, यह भक्त को आत्मबोध और शांति की ओर अग्रसर करता है, जिससे इंसान की भक्ति की शक्ति और भी बढ़ जाती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जाप करने का उत्तम समय प्रातः या सांय काल है। भक्ति भाव से एक साफ स्थान पर बैठकर, यदि संभव हो तो एक दीप जलाएं एवं ईश्वर के प्रति श्रद्धा पूर्वक मन में शुद्ध भाव रखें। भगवान श्री कृष्ण के प्रति प्रेम से भरा मन रखते हुए, इस भजन को पुनः पुनः गुनगुनाएं। इससे आध्यात्मिक ऊर्जा में वर्धन होता है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?

इस भजन का मुख्य संदेश है कि हर पल भगवान भक्त के साथ हैं और किसी भी रूप में उनकी सहायता के लिए उपस्थित होते हैं। यह भक्त की आपसी संबंधों की अनुभूति को दर्शाता है।

क्या इस भजन का सुनना या गाना आवश्यक है?

जी हां, इस भजन का गुणगान भक्त की मानसिक स्थिति को स्थिर और सकारात्मक बनाता है, जिससे भक्त अपनी भक्ति को गहराई से अनुभव कर सकता है।

कौन सी अवस्था में इस भजन का पाठ करना चाहिए?

इस भजन का पाठ प्रातः सूर्योदय के समय या संध्या समय करना उत्तम होता है। इससे मन की एकाग्रता बढ़ती है और ईश्वर के प्रति श्रद्धा का भाव जागृत होता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 18 Aug 2026

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